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2026-07-25

मध्य प्रदेश: कामकाजी महिला छात्रावासों की सीएजी जांच में बड़ी गड़बड़ी उजागर

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच,।

मध्य प्रदेश में कामकाजी महिलाओं के लिए निर्मित छात्रावासों की स्थिति पर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट में कई गंभीर खामियां सामने आई हैं। रिपोर्ट के अनुसार, 59 छात्रावासों में से 22 का उपयोग महिलाओं के बजाय अन्य कार्यों के लिए किया जा रहा है। इनमें से कई छात्रावास स्कूल, प्रशिक्षण केंद्र और सरकारी कार्यालयों में परिवर्तित हो गए हैं, वहीं केवल 13 छात्रावास ही पूरी तरह या आंशिक रूप से चालू पाए गए।

ऑडिट का दायरा और अन्य उपयोग

मध्य प्रदेश विधानसभा में प्रस्तुत सीएजी की इस रिपोर्ट में कामकाजी महिलाओं के छात्रावासों की योजना के संचालन और निगरानी में कई कमियां उजागर हुई हैं। यह ऑडिट वर्ष 2019-20 से 2023-24 की अवधि का है, जिसमें प्रदेश के 34 जिलों में स्थित सभी 59 छात्रावासों की जांच की गई। रिपोर्ट में बताया गया है कि 59 में से 22 छात्रावासों का उपयोग मूल उद्देश्य के बजाय अन्य कार्यों के लिए किया जा रहा था, जिनमें लड़के-लड़कियों के छात्रावास, आशा कार्यकर्ताओं के प्रशिक्षण केंद्र, शहरी निकायों के कार्यालय और अन्य सरकारी उपयोग शामिल हैं। ऑडिट के दौरान यह भी सामने आया कि कुछ स्थानों पर छात्रावासों को किराये पर देकर आय भी अर्जित की जा रही थी। खरगोन, धार, सिवनी और छतरपुर सहित कई जिलों में छात्रावासों के कुछ हिस्से सरकारी विभागों, प्रशिक्षण केंद्रों और स्कूलों को किराए पर दिए गए थे।

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छात्रावासों की संचालन स्थिति

रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश के 59 छात्रावासों में से केवल 13 ही 31 मार्च 2024 तक पूरी तरह या आंशिक रूप से संचालित हो रहे थे। जांच में चार छात्रावास पूरी तरह बंद पाए गए, जबकि तीन छात्रावासों का पता ही नहीं चल सका। इसके अतिरिक्त, तीन छात्रावासों का निर्माण वर्षों बाद भी पूरा नहीं हुआ था और एक छात्रावास का निर्माण स्वीकृति मिलने के दशकों बाद भी शुरू नहीं किया गया था। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि 12 छात्रावास जर्जर या खंडहर जैसी स्थिति में मिले।

कम ऑक्यूपेंसी और अन्य अनियमितताएं

सीएजी ने यह भी पाया कि चालू 13 छात्रावासों में से 9 में 40 से 50 प्रतिशत तक ही कमरे भरे हुए थे। इसकी मुख्य वजह पुरानी इमारतें, आधुनिक सुविधाओं की कमी, लोगों में जागरूकता का अभाव और डे-केयर सेंटर का चालू न होना बताई गई। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि जिन 11 छात्रावासों में डे-केयर सेंटर स्वीकृत थे, वहां निरीक्षण के दौरान एक भी डे-केयर सेंटर संचालित नहीं मिला। इसके अलावा, कुछ छात्रावासों में ऐसे लोग भी निवास कर रहे थे जो इस योजना के पात्र नहीं थे। महिला एवं बाल विकास विभाग ने वर्ष 2019 से 2024 के बीच कामकाजी महिलाओं के लिए छात्रावासों की वास्तविक जरूरत का कोई सर्वेक्षण भी नहीं कराया था, जबकि इसी अवधि में प्रदेश में महिलाओं की श्रम भागीदारी दर में वृद्धि हुई है।