बुलंद सोच, भोपाल।
मध्य प्रदेश की दो प्रमुख भ्रष्टाचार निरोधक एजेंसियों, लोकायुक्त और आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू), के पास बीते साढ़े छह वर्षों में कुल 50,453 शिकायतें व आवेदन प्राप्त हुए। इनमें से केवल 486 मामले ही अदालत तक पहुंच सके। यह जानकारी हाल ही के सत्र में विधानसभा में सरकार द्वारा दी गई, जो भ्रष्टाचार के मामलों में कार्रवाई की सुस्त रफ्तार को दर्शाती है। यह स्थिति तब है जब इन दोनों जांच एजेंसियों में अनुभवी पुलिस अधीक्षक सालों से अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
लोकायुक्त में शिकायतों और कार्रवाई का ब्यौरा
वर्ष 2020 से 2025 के बीच लोकायुक्त को 27,192 शिकायतें प्राप्त हुईं। इनमें से 2,475 मामलों में गहन जांच दर्ज की गई, जिसके बाद विशेष पुलिस स्थापना ने 1,451 एफआईआर दर्ज कीं। कुल 477 मामलों में अदालत में चालान प्रस्तुत किया गया। इस अवधि में विशेष न्यायालयों ने 84 मामलों में अंतिम निर्णय सुनाया, जिनमें से 55 में दोषसिद्धि हुई, 26 आरोपी बरी हुए और 3 मामले अभियुक्तों की मृत्यु के कारण समाप्त हो गए। यह जानकारी कांग्रेस विधायक बाला बच्चन के प्रश्न के लिखित उत्तर में विधानसभा में प्रस्तुत की गई।
ईओडब्ल्यू की जांच प्रक्रिया और लंबित मामले
दूसरी ओर, 2020 से जून 2026 के बीच ईओडब्ल्यू को 23,261 आवेदन प्राप्त हुए। इनमें से केवल 3,018 मामलों को ही विस्तृत जांच योग्य मानते हुए शिकायत के रूप में दर्ज किया गया। जांच के बाद 756 आवेदन बंद कर दिए गए, जबकि बड़ी संख्या में मामले विभिन्न स्तरों पर लंबित हैं। इतनी बड़ी संख्या में शिकायतों के बावजूद, अदालत में केवल 9 मामलों में ही अभियोग पत्र प्रस्तुत किया जा सका। यह जानकारी कांग्रेस विधायक प्रताप ग्रेवाल के प्रश्न के उत्तर में सामान्य प्रशासन विभाग ने विधानसभा में दी।
जांच प्रक्रिया में लगने वाला समय
लोकायुक्त और ईओडब्ल्यू दोनों में काम कर चुके सेवानिवृत्त डीएसपी आरके सिंह ने बताया कि किसी भी शिकायत के मिलने पर उसे संबंधित जिले के एसपी कार्यालय से मुख्यालय भेजा जाता है। इसके बाद लोकायुक्त में विधिक सलाहकार समेत वरिष्ठ अधिकारी शिकायत की समीक्षा करते हैं। जिन मामलों को विभागीय जांच के योग्य पाया जाता है, उन्हें संबंधित विभाग के प्रमुख के पास जांच के लिए भेजा जाता है और विभाग द्वारा इसकी सूचना वापस दी जाती है। सिंह के अनुसार, यह बहुस्तरीय प्रक्रिया ही मामलों के निपटारे में लगने वाले लंबे समय का एक प्रमुख कारण है।
भ्रष्टाचार निरोधक एजेंसियों में अनुभवी पुलिस अधीक्षक
प्रदेश की भ्रष्टाचार निरोधक एजेंसियों के प्रमुखों को दोनों एजेंसियों में काम करने का अच्छा अनुभव है। जबलपुर ईओडब्ल्यू के पुलिस अधीक्षक अनिल विश्वकर्मा लोकायुक्त में भी एसपी रह चुके हैं। एसपी सुनील पाटीदार ईओडब्ल्यू में एआईजी रह चुके हैं और वर्तमान में लोकायुक्त भोपाल के पुलिस अधीक्षक हैं। इसी प्रकार, इंदौर के ईओडब्ल्यू के अधीक्षक रामेश्वर यादव लोकायुक्त ग्वालियर में पुलिस अधीक्षक रह चुके हैं। भोपाल के ईओडब्ल्यू के एसपी अरुण मिश्रा भी लोकायुक्त में अधीक्षक के पद पर कार्य कर चुके हैं। इसके अतिरिक्त, ग्वालियर ईओडब्ल्यू के दिलीप तोमर और लोकायुक्त एसपी निरंजन शर्मा अपने गृह जिले वाली एजेंसियों में पुलिस अधीक्षक के रूप में पदस्थ हैं।

