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2026-07-31

मध्य प्रदेश सरकार ने ग्रीष्मकालीन मूंग खरीद सीमा 25 से बढ़ाकर 60 प्रतिशत की

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, भोपाल।

किसानों के आंदोलन के कारण मध्य प्रदेश सरकार ग्रीष्मकालीन मूंग की खरीदी को लेकर अपने निर्णय से पीछे हट गई है। अब पात्र किसान से मानक उत्पादन की केवल 25 प्रतिशत मूंग के बजाय 60 प्रतिशत मूंग खरीदी जाएगी। किसान इसे अपनी जीत बता रहे हैं, हालांकि मुख्य वजह इससे बने राजनीतिक दबाव को माना जा रहा है।

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आंदोलन और राजनीतिक दबाव

प्रदेश के कुछ नेता अपनी लोकप्रियता बढ़ाने के लिए परदे के पीछे इसे राजनीतिक रंग दे रहे थे। राज्य सरकार का उद्देश्य था कि किसानों की न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) निर्भरता कम की जाए ताकि प्रदेश का आर्थिक स्वास्थ्य बेहतर रहे और किसान आत्मनिर्भर बनें, पर कांग्रेस को यह रास नहीं आया। भाजपा के नेताओं ने भी किसानों को हथियार बना लिया। इसी प्रमुख मांग को लेकर हजारों किसानों ने राजधानी भोपाल में मंगलवार और बुधवार को डेरा डाल दिया था। बुधवार रात उनका धरना समाप्त हुआ।

प्रमुख मूंग उत्पादक जिले और राजनीतिक संवेदनशीलता

मध्य प्रदेश में ग्रीष्मकालीन मूंग की खेती बड़े पैमाने पर नर्मदापुरम, हरदा, नरसिंहपुर, रायसेन और सीहोर जिलों में होती है। सिंचाई सुविधाओं की उपलब्धता के कारण यहां के किसान पहले से संपन्न हैं और राजनीतिक तौर पर सक्रिय भी रहते हैं। इन जिलों की मजबूत ग्रामीण पृष्ठभूमि को देखते हुए भाजपा हो या कांग्रेस, इनकी अनदेखी का जोखिम नहीं उठाना चाहती है।

पिछली बार की स्थिति और वर्तमान आंदोलन

पिछले साल जब सरकार ने मूंग के उपार्जन से हाथ पीछे किए तो ज्यादा नुकसान बड़े किसानों का ही हो रहा था। उन्होंने राजनीतिक तौर पर अपनी बात पहुंचाई, मगर जब सरकार टस से मस नहीं हुई तो आंदोलन शुरू हो गया। दबाव बढ़ा तो सरकार को उपार्जन का प्रस्ताव भेजना पड़ा, जिसे केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बिना देर किए स्वीकृति दे दी। इस बार भी लगभग यही स्थिति बनी, जबकि सरकार ने स्पष्ट कर दिया था कि 25 प्रतिशत उपज का उपार्जन किया जाएगा। किसानों के संगठन ज्यादा खरीदी की मांग को लेकर सक्रिय हुए और धीरे-धीरे यह मांग कई जिलों से होते-होते भोपाल में आंदोलन में परिवर्तित हो गई।

कांग्रेस की भूमिका

वहीं, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी नर्मदापुरम और हरदा पहुंचे। उन्होंने किसान सभा की और पार्टी कार्यकर्ताओं को संदेश दिया कि बिना बैनर के साथ खड़े हों। जीतू पटवारी भोपाल में होने के बाद भी धरनास्थल पर नहीं पहुंचे क्योंकि इससे आंदोलन को राजनीतिक रंग दे दिया जाता और उद्देश्य पूरा नहीं होता।

सरकार की मंशा और उड़द प्रोत्साहन

दरअसल, ग्रीष्मकालीन मूंग की खरीदी सरकार के लिए घाटे का सौदा है। पिछले सालों की साढ़े हजार करोड़ रुपये की मूंग गोदामों में रखी हुई है क्योंकि ग्रीष्मकालीन मूंग की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठते रहे हैं। सरकार मूंग की खेती को आमजन, किसान और भूमि की उर्वरा शक्ति को बनाए रखने की अच्छी मंशा के साथ हतोत्साहित कर रही है। इसकी भरपाई के लिए उड़द की खेती के लिए कहा जा रहा है। इस पर 600 रुपये प्रति क्विंटल प्रोत्साहन राशि देने का निर्णय भी लिया गया है।