बुलंद सोच, भोपाल।
मध्य प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में इलाज की सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के तहत कानों की जांच करने वाली नई और आधुनिक मशीनें (ऑडियोलॉजी उपकरण) उपलब्ध कराई जाएंगी। इन नई मशीनों से छोटे और नवजात बच्चों में कम सुनने या बहरेपन की बीमारी का शुरुआत में ही पता चल सकेगा। बीमारी की सही समय पर पहचान होने से बच्चों का इलाज, जैसे कान की मशीन लगाना, कॉकलियर इम्प्लांट और स्पीच थेरेपी, सही उम्र में शुरू किया जा सकेगा। ये मशीनें ईएनटी डॉक्टरों के लिए भी उपयोगी होंगी, जो कान में दर्द, कानों में सीटी बजने जैसी आवाजें, चक्कर आने या कम सुनाई देने जैसी समस्याओं का सही कारण जान सकेंगे। अब तक इन विशेष जांचों के लिए गरीब और आम मरीजों को महंगे निजी जांच केंद्रों पर जाना पड़ता था, लेकिन अस्पतालों में इन मशीनों के लगने से मरीजों को एक ही जगह निशुल्क और बेहतर इलाज की सुविधा मिल सकेगी।
उपकरण खरीद और स्थापना
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, मध्य प्रदेश पब्लिक हेल्थ सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एमपीपीएचएससीएल) ने इन अत्याधुनिक उपकरणों की आपूर्ति, स्थापना और परीक्षण के लिए निविदा प्रक्रिया शुरू कर दी है। गुणवत्तापूर्ण मशीनों की उपलब्धता सुनिश्चित होने के बाद इन्हें राज्य के विभिन्न जिला और संभागीय अस्पतालों में तेजी से स्थापित किया जाएगा। एमपीपीएचएससीएल, भोपाल के प्रबंध निदेशक मयंक अग्रवाल ने बताया कि राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत ऑडियोलॉजी उपकरणों की खरीद के लिए एक पारदर्शी निविदा प्रक्रिया शुरू की गई है। अग्रवाल ने यह भी कहा कि इन आधुनिक मशीनों के लगने से दूरदराज के क्षेत्रों से आने वाले गरीब मरीजों और मासूम बच्चों को जिला स्तर पर ही मुफ्त और सटीक जांच का लाभ मिल सकेगा।

