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2026-07-26

दतिया उपचुनाव में पिछड़ा वर्ग सबसे बड़ा चुनावी फैक्टर

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, ग्वालियर।

दतिया विधानसभा उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच मुकाबला अब केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि सामाजिक समीकरणों का भी बन गया है। दोनों दल अलग-अलग वर्गों को अपने पक्ष में करने के लिए माइक्रो मैनेजमेंट की रणनीति पर काम कर रहे हैं। इस सीट पर पिछड़ा वर्ग सबसे बड़ा वोट बैंक होने के कारण चुनावी रणनीति का केंद्र बना हुआ है।

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दतिया सीट का राजनीतिक इतिहास

दतिया विधानसभा सीट लंबे समय तक कांग्रेस का मजबूत गढ़ रही है। हालांकि पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने इस सीट को कांग्रेस से छीनकर भाजपा के खाते में डाला था, लेकिन अगले चुनाव में कांग्रेस ने फिर जीत हासिल कर अपनी पकड़ मजबूत कर ली। अब उपचुनाव में भाजपा एक बार फिर इस सीट पर कब्जा जमाने की कोशिश कर रही है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल स्वयं चुनावी रणनीति की कमान संभाले हुए हैं। पार्टी की कोशिश सामान्य वर्ग के साथ-साथ पिछड़े और अनुसूचित वर्ग के मतदाताओं तक अपनी पहुंच मजबूत करने की है।

मतदाता demographics और चुनावी रणनीति

दतिया विधानसभा में लगभग दो लाख मतदाता हैं। इनमें पिछड़ा वर्ग के मतदाताओं की संख्या लगभग एक लाख नौ हजार है, जो कुल मतदाताओं का 50.7 प्रतिशत है। अनुसूचित जाति के मतदाता 51,270 हैं, जो कुल मतदाताओं का 23.8 प्रतिशत हैं। सामान्य वर्ग के मतदाता 37,840 हैं, जो 17.6 प्रतिशत हैं। मुस्लिम मतदाता 9,461 हैं, जो 4.4 प्रतिशत हैं, और अनुसूचित जनजाति के मतदाता 6,320 हैं, जो 2.9 प्रतिशत हैं। इन्हीं सामाजिक समीकरणों को देखते हुए दोनों प्रमुख दलों ने अपने-अपने अभियान की दिशा तय की है।

भाजपा की रणनीति और प्रमुख नेता

पिछड़े वर्ग के मतदाताओं तक पहुंच बनाने के लिए भाजपा ने सांसद भारत सिंह कुशवाह को दतिया का प्रभारी बनाया है। उनके साथ अपेक्स के प्रशासक महेंद्र सिंह यादव, राजेंद्र पाल, उद्यानिकी मंत्री नारायण सिंह कुशवाह सहित कई नेता गांव-गांव जाकर संपर्क अभियान चला रहे हैं। झांसी के यादव समाज के नेता भी प्रचार में सक्रिय हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के प्रभाव को भी भाजपा चुनावी रणनीति का हिस्सा बना रही है। पार्टी पहले ही केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की सभा करा चुकी है, जबकि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भाजपा प्रत्याशी के समर्थन में रोड शो करेंगे। अनुसूचित वर्ग को साधने के लिए राष्ट्रीय अध्यक्ष लाल सिंह आर्य, पूर्व विधायक घनश्याम पिरोनिया और पूर्व मंत्री इमरती देवी सहित कई नेता प्रचार में जुटे हैं। सामान्य वर्ग में प्रभाव बढ़ाने के लिए पूर्व मंत्री अरविंद सिंह भदौरिया और ग्वालियर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष मधुसूदन भदौरिया को जिम्मेदारी दी गई है। पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश पचौरी भी सामाजिक बैठकों में भाग ले चुके हैं, जबकि भाजपा के संभागीय प्रभारी निशांत खरे दतिया में लगातार कैंप कर रहे हैं।

कांग्रेस की चुनौतियां और अभियान

कांग्रेस भी सामाजिक समीकरण साधने की कोशिश कर रही है, लेकिन संगठनात्मक स्तर पर उसे चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। सामान्य और अनुसूचित वर्ग के मतदाताओं तक पहुंच बनाने के लिए पूर्व मंत्री जयवर्धन सिंह सक्रिय हैं, जबकि पिछड़े वर्ग के बीच राज्यसभा सदस्य अशोक सिंह प्रचार कर रहे हैं। कांग्रेस के कई नेता दतिया पहुंच रहे हैं, लेकिन वार्ड और बूथ स्तर पर संगठन की कमजोरी के कारण उनका प्रभाव सीमित दिखाई दे रहा है। पार्टी को उम्मीद है कि अनुसूचित जाति और मुस्लिम मतदाता एक बार फिर उसके साथ रहेंगे।

आजाद समाज पार्टी की भूमिका

इस उपचुनाव में आजाद समाज पार्टी से दामोदर यादव भी मैदान में हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उनकी मौजूदगी भाजपा की तुलना में कांग्रेस के वोट बैंक पर अधिक असर डाल सकती है। ऐसे में पिछड़े वर्ग के मतदाताओं का रुझान इस चुनाव का परिणाम तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।