बुलंद सोच, ग्वालियर।
मुख्यमंत्री ने अतिथि शिक्षकों को सत्र में 10 दिन का आकस्मिक अवकाश देने की घोषणा की है। साथ ही यह भी कहा गया है कि लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई) आगामी दिनों में इस संबंध में आदेश जारी करेगा। अतिथि शिक्षकों को पूरे सत्र में रविवार या किसी सरकारी अवकाश के अलावा छुट्टी देने का कोई प्रावधान नहीं था। जिस दिन अतिथि शिक्षक स्कूल नहीं जाते थे और ई-अटेंडेंस नहीं लगाते थे, उस दिन का मानदेय काट लिया जाता था। मुख्यमंत्री द्वारा की गई घोषणा के बाद अब इन शिक्षकों को पूरे सत्र में कुछ छुट्टियां मिल जाएंगी।
ई-अटेंडेंस अनिवार्यता समाप्त
लोक शिक्षण विभाग ने अतिथि शिक्षकों के लिए 90 प्रतिशत ई-अटेंडेंस की अनिवार्यता समाप्त कर दी है। इससे पहले, जिन अतिथि शिक्षकों की पिछले सत्र में 90 प्रतिशत ई-अटेंडेंस नहीं थी, वे अपने स्कूलों में दोबारा रिजॉइन नहीं कर पा रहे थे, भले ही शिक्षक के पद खाली थे। यह स्थिति लोक शिक्षण विभाग द्वारा 90 प्रतिशत से कम अटेंडेंस वाले शिक्षकों की जॉइनिंग पर रोक लगाने के कारण उत्पन्न हुई थी। जिले के सरकारी स्कूलों में लगभग 1032 अतिथि शिक्षक कार्यरत हैं, जिनमें सबसे अधिक डबरा, भितरवार और घाटीगांव ब्लॉक में हैं। इनमें से लगभग 10 प्रतिशत अतिथि शिक्षक ऐसे थे, जिनकी ई-अटेंडेंस 90 प्रतिशत से कम थी, जिसके कारण वे अपने स्कूल में दोबारा रिजॉइन नहीं कर पा रहे थे। लोक शिक्षण विभाग ने बीच में एक आदेश जारी कर ऐसे शिक्षकों को कारण बताने और इस सत्र में 90 प्रतिशत से अधिक ई-अटेंडेंस लगाने का शपथ पत्र जिला शिक्षा अधिकारी को देकर रिजॉइनिंग के लिए आवेदन करने को कहा था। इस प्रक्रिया में अतिथि शिक्षकों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। लोक शिक्षण विभाग के नए आदेश से अब अतिथि शिक्षकों को राहत मिली है, और वे सीधे स्कूल में जाकर अपने पद पर दोबारा रिजॉइन कर सकते हैं। अतिथि शिक्षकों को जुलाई से अप्रैल तक के लिए नियुक्त किया जाता है, इसलिए उन्हें जुलाई महीने में फिर से स्कूल में रिजॉइन करना होता है। यदि उनके पद पर नियमित शिक्षक आ जाता है, तो उन्हें ऐसे स्कूल का चयन करना होता है जहां पद खाली हो।

