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2026-08-14

एनसीएलटी में 383 पुनरुद्धार योजना आवेदन लंबित, सुप्रीम कोर्ट ने मंगवाए आंकड़े

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच।

एक समान कार्यकाल, तय सेवानिवृत्ति आयु और योग्यता आधारित चयन ही न्यायाधिकरणों में योग्य लोगों को लाने और बनाए रखने का मार्ग है।

एवीजे हाइट्स के फ्लैट मालिक कई वर्षों से एक आदेश का इंतजार कर रहे हैं। उनके बिल्डर एवीजे डेवलपर्स के खिलाफ 2019 में दिवाला प्रक्रिया शुरू हुई थी।

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लेनदारों ने 4 जुलाई 2024 को पुनरुद्धार योजना को मंजूरी दी, जिसके आठ दिन बाद यह योजना राष्ट्रीय कंपनी विधि अधिकरण (एनसीएलटी) के समक्ष पहुंची।

हालांकि, दो साल बाद भी यह मामला वहीं अटका हुआ था। अप्रैल 2026 में जब सुप्रीम कोर्ट की नजर इस फाइल पर पड़ी, तो यह सवाल केवल एक मकान तक सीमित नहीं रहा।

अदालत ने पूरे देश के आंकड़े मंगवाए, जिससे यह तस्वीर सामने आई कि देशभर की एनसीएलटी पीठों के सामने पुनरुद्धार योजनाओं की मंजूरी के 383 आवेदन लंबित थे।

इन मामलों में देरी 48 दिन से लेकर 738 दिन तक थी। दिवाला एवं दिवालियापन संहिता में ऐसे मामलों के लिए अधिकतम 330 दिन की समयसीमा तय की गई है।

कानून अपनी जगह कायम है, लेकिन कैलेंडर साथ नहीं दे रहा है। यह कानून की नहीं, बल्कि क्षमता की नाकामी है।