बुलंद सोच, इंदौर।

लंबे समय से विवादों में घिरी नीट परीक्षा में एक और बड़ी लापरवाही सामने आई है। इस महीने की 30 तारीख को होने वाली नीट-पीजी परीक्षा के लिए छात्रों को डेढ़ से दो हजार किलोमीटर दूर के परीक्षा केंद्र आवंटित किए गए हैं। परीक्षा केंद्र का संदेश मिलने के बाद छात्र और अभिभावक इस बात से हैरान हैं कि इतनी दूर परीक्षा देने कैसे जाएंगे। परीक्षा केंद्रों को लेकर केवल दूरी की ही गड़बड़ी नहीं हुई है, बल्कि जो संदेश आए हैं उनमें केंद्र अलग दिख रहा है और वेबसाइट पर अलग। छात्रों को यह समझ नहीं आ रहा है कि कौन सा केंद्र सही है और परीक्षा देने उन्हें कहां जाना है। मंगलवार रात 12 बजे अलॉटमेंट के बाद छात्रों की परेशानी बढ़ गई है, क्योंकि उनके केंद्रों में न केवल शहर बदले हैं, बल्कि राज्य भी दूसरा हो गया है, वह भी कम से कम 1500 किलोमीटर दूर। उदाहरण के तौर पर, इंदौर के एक छात्र को कर्नाटक के गुलबर्ग शहर के कलबुर्गी में केंद्र मिला है। एक अन्य छात्र को तो 2100 किलोमीटर दूर पोर्ट ब्लेयर (अंडमान-निकोबार आइलैंड) परीक्षा देने जाना पड़ेगा। इसी तरह, एक छात्र को हिमाचल प्रदेश का हमीरपुर और एक को आंध्र प्रदेश का कुरनूल परीक्षा केंद्र आवंटित किया गया है।
देवी अहिल्या विश्वविद्यालय में एलएलबी मूल्यांकन पर आरोप
देवी अहिल्या विश्वविद्यालय की मंगलवार को हुई छात्र सुनवाई में एलएलबी के फर्स्ट और सेकंड सेमेस्टर के विद्यार्थी खराब परीक्षा परिणाम की शिकायत लेकर पहुंचे। छात्रों ने आरोप लगाया कि उनकी उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन ठीक से नहीं किया गया है। कई कॉपियों में प्रश्नों के उत्तर जांचे बिना ही अंक दे दिए गए, जबकि कुछ प्रश्नों में शून्य अंक तक दिए गए हैं। उधर, विश्वविद्यालय ने शासकीय नवीन विधि विद्यालय के एलएलबी सेकंड सेमेस्टर के विद्यार्थियों की उत्तरपुस्तिका की सैंपलिंग करने का निर्णय लिया है। कुछ दिन पहले जारी हुए एलएलबी सेकंड सेमेस्टर के परिणाम के मुताबिक, बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं को दो विषयों में फेल किया गया है, जिनमें लेबर एंड इंडस्ट्रियल लॉ और संविधान विषय शामिल हैं। कुल 54 विद्यार्थियों को इन दोनों विषयों में एटीकेटी दी गई है, और विद्यार्थियों का कहना है कि उनके उत्तर सही होने के बावजूद उन्हें कम अंक मिले हैं। इसी तरह, फर्स्ट सेमेस्टर के विद्यार्थियों ने भी रिव्यू रिजल्ट को लेकर नाराजगी जताई, जो विश्वविद्यालय ने सोमवार को जारी किया था। विद्यार्थियों के अनुसार, अधिकांश छात्रों के अंकों में कोई बदलाव नहीं किया गया, जबकि कुछ विद्यार्थियों के अंक चार से बढ़कर सीधे 30 से 35 तक हो गए, जिससे मूल्यांकन प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो रहे हैं। मंगलवार को विद्यार्थियों ने परीक्षा नियंत्रक डॉ. अशेष तिवारी और सहायक कुलसचिव मोनाली सूर्यवंशी के सामने अपनी शिकायतें रखीं। छात्रों ने कहा कि मूल्यांकन में हुई गलती का खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ रहा है, और कुछ विद्यार्थी फर्स्ट सेमेस्टर में भी फेल होने के कारण अगले वर्ष में प्रमोट होने में परेशानी का सामना कर रहे हैं। मामले को गंभीरता से लेते हुए विश्वविद्यालय सेकंड सेमेस्टर की उत्तरपुस्तिकाओं की सैंपलिंग करवाने को राजी हुआ। परीक्षा नियंत्रक डॉ. अशेष तिवारी ने बताया कि कॉपियों को दोबारा विषय विशेषज्ञों से जांचवाया जाएगा और विश्वविद्यालय करीब 10 दिनों में सैंपलिंग की प्रक्रिया पूरी करेगा। इसके बाद जांच की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। विद्यार्थियों ने मूल्यांकन केंद्र की व्यवस्था पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं, उनके मुताबिक रिव्यू के अंतर्गत कॉपी देखने के लिए मूल्यांकन केंद्र के कर्मचारी पर्याप्त समय नहीं देते हैं। छात्रों ने बताया कि कर्मचारी महज पांच मिनट में ही कॉपियां वापस मांग लेते हैं और उनका व्यवहार भी ठीक नहीं रहता है। इस संबंध में परीक्षा नियंत्रक डॉ. तिवारी ने मूल्यांकन केंद्र प्रभारी डॉ. राजेंद्र सिंह को कर्मचारियों को विद्यार्थियों से ठीक से व्यवहार करने को कहा है। एलएलबी चौथे सेमेस्टर के विद्यार्थियों को फैमिली लॉ और एजुकेशन लॉ विषय में एटीकेटी आई है, और विश्वविद्यालय ने इनकी समस्या का समाधान करते हुए दोबारा मूल्यांकन करवाने का आश्वासन दिया है। इसके लिए तीन विषय विशेषज्ञों की कमेटी बनाई गई है, जिन्हें कापियां जांचकर देनी हैं। वहीं, एलएलबी छठे सेमेस्टर का रिव्यू रिजल्ट अभी घोषित नहीं हुआ है, बावजूद इसके विद्यार्थियों को प्रोविजनल रिजल्ट जारी किया गया है।

