बुलंद सोच, जबलपुर।

जबलपुर में शिक्षकों के लिए लागू की गई ई-अटेंडेंस व्यवस्था की समय-सीमा में बार-बार हो रहे बदलाव ने शिक्षकों की परेशानी बढ़ा दी है। शिक्षकों का कहना है कि ई-अटेंडेंस के लागिन समय को लेकर विभागीय स्तर पर स्पष्टता नहीं है।
ई-अटेंडेंस व्यवस्था लागू होने के बाद शुरुआत में लागिन का समय सुबह 9:30 बजे से 11:30 बजे तक निर्धारित किया गया था। इसके बाद समय-सीमा घटाकर सुबह 9:30 से 11 बजे की गई और फिर इसे 9:30 से 10:30 बजे तक कर दिया गया। अब अधिकारियों की ओर से वीडियो कांफ्रेसिंग में शिक्षकों को सुबह 10 बजे से पहले लागिन करने के निर्देश दिए जाने की बात सामने आ रही है। समय में लगातार बदलाव को लेकर शिक्षकों में नाराजगी है।
शिक्षकों का कहना है कि ई-अटेंडेंस का उद्देश्य स्कूलों में शिक्षकों की उपस्थिति सुनिश्चित करना और व्यवस्था को पारदर्शी बनाना है, लेकिन इसके लिए स्पष्ट और स्थायी नियम होना जरूरी है। बार-बार समय बदलने से शिक्षक इस बात को लेकर चिंतित रहते हैं कि कहीं निर्धारित समय में लागिन नहीं होने पर उनकी उपस्थिति प्रभावित न हो जाए। तकनीकी दिक्कतों और नेटवर्क संबंधी समस्याओं के बीच बदलती समय-सीमा ने परेशानी और बढ़ा दी है।
राज्य शिक्षक संघ जबलपुर के जिलाध्यक्ष नरेंद्र त्रिपाठी ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार के नाम पर शिक्षकों को लगातार मानसिक दबाव में रखना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को मानसिक त्रासदी देकर उन्नत शिक्षा की कल्पना नहीं की जा सकती।
त्रिपाठी ने यह भी कहा कि विभाग को पहले अपनी व्यवस्थाओं और निर्देशों में स्पष्टता लानी चाहिए, ताकि शिक्षक तनावमुक्त होकर अपने मूल दायित्व यानी विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने पर ध्यान केंद्रित कर सकें।
नरेंद्र त्रिपाठी ने आरोप लगाया कि ई-अटेंडेंस को लेकर लगातार किए जा रहे प्रयोग और बदलते निर्देश विभागीय व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहे हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री मोहन यादव से मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को बार-बार बदलते नियमों और मानसिक दबाव से राहत दिलाने के लिए ई-अटेंडेंस की समय-सीमा को लेकर स्पष्ट, स्थायी और व्यावहारिक व्यवस्था बनाई जानी चाहिए।

