बुलंद सोच,।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की आत्मकथा का विमोचन किया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने सभा को संबोधित किया और पूर्व राष्ट्रपति की जमकर तारीफ की, उनके जीवन संघर्ष को प्रेरणा बताया।
संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी मां का जिक्र करते हुए भावुक हो गए।
पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की इस आत्मकथा का शीर्षक ‘ट्रायम्फ ऑफ द इंडियन रिपब्लिक: माय लाइफ, माय स्ट्रगल्स’ है। इसमें रामनाथ कोविंद के शुरुआती वर्षों से लेकर सार्वजनिक जीवन और भारत के 14वें राष्ट्रपति के रूप में सेवा तक के अनुभवों, संघर्षों और उपलब्धियों का ब्योरा है।
किताब विमोचन के अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने पूर्व राष्ट्रपति की तारीफ करते हुए कहा कि, “राष्ट्रपति के रूप में उनका मार्गदर्शन और उनका स्नेह, उनकी आत्मीयता मेरी बहुत बड़ी पूंजी रही।”
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि उन्होंने रामनाथ कोविंद के जीवन और उनकी कार्यक्षमताओं को जितना समझा है, उससे वह विश्वास से कह सकते हैं कि यह आत्मकथा भारतीय लोकतंत्र और भारतीय समाज की धरोहर बनेगी।
प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि रामनाथ कोविंद ने छोटी सी उम्र में अपनी मां को खो दिया था। उन्होंने अपनी बात जोड़ते हुए कहा कि वह भाग्यशाली रहे कि उनकी मां 100 वर्ष से अधिक जीवित रहीं और उन्हें आशीर्वाद देती रहीं, इसके बावजूद वह मां की कमी महसूस करते हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने आगे कहा कि ऐसे हालात में कोई भी टूट सकता है, लेकिन रामनाथ कोविंद को उन मुश्किल हालात ने और मजबूत बनाया।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भविष्य में रामनाथ कोविंद जैसे अनेकों युवा चाहिए, जो परेशानियों से परास्त न हों, मुश्किलों से मायूस न हों, बल्कि अपनी मेहनत से हर मंजिल को आसान बनाने का हौसला रखें।
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि इसी बदलाव से सशक्त भारत के निर्माण का संकल्प पूरा होगा और यहीं से आत्मनिर्भर तथा विकसित भारत का रास्ता बनेगा।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि पूर्वजों ने सदियों तक संघर्ष किया था। महात्मा गांधी, बाबा साहेब अंबेडकर, ज्योतिबा फुले, सावित्रीबाई फुले जैसी महान विभूतियों ने एक ऐसे भारत के नवनिर्माण का सपना देखा था, जहां गरीब से गरीब, वंचित से वंचित को शिखर तक पहुंचने का अवसर मिल सके। उन्होंने जोड़ा कि रामनाथ कोविंद जैसे व्यक्तित्वों ने अपनी मेहनत और काबिलियत के दम पर न सिर्फ अपना जीवन बदला, बल्कि सदियों के उस सपने और विजन को साकार करने में अहम भूमिका निभाई।
प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि राष्ट्रपति जैसे पद से सेवामुक्त होने के बाद भी रामनाथ कोविंद ने विश्राम नहीं लिया है और वह अभी भी ‘एक देश, एक चुनाव’ जैसे महत्वपूर्ण विषय पर काम कर रहे हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह एक ऐसा विषय है, जिसका समाधान देश के लोकतंत्र का नया अध्याय शुरू कर सकता है।

