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2026-08-14

अमेरिकी अदालत द्वारा अदाणी के खिलाफ केस बंद होने पर राहुल गांधी का PM मोदी पर हमला

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच।

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा। यह हमला अमेरिकी संघीय अदालत द्वारा अदाणी समूह के अध्यक्ष गौतम अदाणी के खिलाफ आपराधिक आरोपों को स्थायी रूप से खारिज किए जाने के बाद किया गया। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि इस मामले में जितना दिख रहा है, उससे कहीं ज्यादा है। उन्होंने कहा कि एक ‘समझौता कर चुके प्रधानमंत्री’ को भारत के हित बेचने के लिए मजबूर किया गया। लोकसभा में विपक्ष के नेता ने यह भी दावा किया कि भारत को इसकी बहुत बड़ी कीमत चुकानी पड़ रही है। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अमेरिकी अदालत के फैसले से जुड़ी एक मीडिया रिपोर्ट का स्क्रीनशॉट साझा किया। इस रिपोर्ट में बताया गया था कि अमेरिकी न्याय विभाग के गौतम अदाणी और उनके भतीजे सागर अदाणी के खिलाफ आरोप खारिज करने के अनुरोध को अदालत ने मंजूरी दे दी थी। अपनी पोस्ट में राहुल गांधी ने कहा, “इसमें जितना दिख रहा है, उससे कहीं ज्यादा है।” उन्होंने आगे लिखा, “एक समझौता कर चुके प्रधानमंत्री को भारत के हित बेचने के लिए मजबूर किया गया। भारत इसकी बहुत बड़ी कीमत चुका रहा है।”

अमेरिकी अदालत का फैसला

अमेरिकी संघीय अदालत के जज निकोलस गाराउफिस ने हाल ही में गौतम अदाणी और उनके भतीजे सागर अदाणी के खिलाफ आपराधिक आरोपों को स्थायी रूप से रद्द कर दिया। न्यूयॉर्क के पूर्वी जिले के जज गाराउफिस ने अमेरिकी न्याय विभाग के आरोप रद्द करने के अनुरोध को मंजूरी दी। इस फैसले से बंदरगाह से लेकर ऊर्जा क्षेत्र तक काम करने वाले अदाणी समूह पर करीब दो साल से बना कानूनी दबाव खत्म हो गया। अदाणी ने अमेरिकी अदालत के इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि वह इसे ‘विनम्रता’ और न्यायिक प्रक्रिया के प्रति ‘गहरे सम्मान’ के साथ स्वीकार करते हैं।

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खारिज किए गए आरोप

10 अगस्त को, जज गाराउफिस ने 47 पन्नों का आदेश जारी किया। इसमें उन्होंने अमेरिकी न्याय विभाग के आरोप खारिज करने के अनुरोध को मंजूरी दी। यह मांग गौतम अदाणी, सागर अदाणी और अदाणी ग्रीन एनर्जी के पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) विनीत जैन से जुड़े मामले में की गई थी। इनके खिलाफ तीन आरोप खारिज किए गए, जिनमें प्रतिभूति धोखाधड़ी की साजिश, वायर धोखाधड़ी की साजिश और प्रतिभूति धोखाधड़ी के आरोप शामिल थे। इन आरोपों को स्थायी रूप से खारिज किया गया है, जिसका अर्थ है कि इन्हीं आरोपों को दोबारा दर्ज नहीं किया जा सकता।

लंबित आरोप

जज गाराउफिस ने मामले में दो आरोपों पर अभी फैसला नहीं दिया है। इनमें पहली धारा में विदेशी भ्रष्ट आचरण अधिनियम के उल्लंघन का आरोप और पांचवीं धारा में न्याय में बाधा डालने की साजिश का आरोप शामिल है। ये दोनों आरोप भारत में रहने वाले पांच सह-आरोपियों से जुड़े हैं, जो अब तक अदालत में पेश नहीं हुए हैं। इन सह-आरोपियों में रंजीत गुप्ता, सिरिल कैबनेस, सौरभ अग्रवाल, दीपक मल्होत्रा और रूपेश अग्रवाल शामिल हैं। अमेरिकी न्याय विभाग को अदालत की शर्तें पूरी करने के लिए 31 अगस्त तक का समय दिया गया है। वहीं, अदालत में पेश नहीं हुए आरोपियों के वकीलों को भी इसी तारीख तक पुष्टि करनी होगी कि उनके मुवक्किल आरोप खारिज किए जाने पर सहमत हैं।

अदालत का स्पष्टीकरण

जज ने स्पष्ट किया कि आरोपों को खारिज करना अभियोजन पक्ष के विवेक का इस्तेमाल करने का फैसला है। यह आरोपों पर अदालत का फैसला नहीं है। जज गाराउफिस ने अपने आदेश में लिखा कि किसी को भी इस फैसले को सरकार के फैसले से अदालत की सहमति या आरोपों की सच्चाई पर अदालत की राय नहीं समझना चाहिए। इस मामले में कोई मुकदमा नहीं चला, किसी गवाह से पूछताछ नहीं हुई और अदालत में सबूतों की जांच भी नहीं हुई। अदाणी समूह ने इन आरोपों से लगातार इनकार किया है और उसका कहना है कि उसने लागू कानून के मुताबिक ही काम किया है।

न्याय विभाग द्वारा आरोप हटाने का कारण

मई में, अमेरिकी न्याय विभाग ने विस्तृत समीक्षा के बाद आरोपों को रद्द करने का अनुरोध किया था। न्याय विभाग ने इसके पीछे अधिकार क्षेत्र और सबूतों से जुड़ी चुनौतियों का हवाला दिया। विभाग ने यह भी बताया कि जिन गतिविधियों के आरोप लगाए गए हैं, उनका ज्यादातर हिस्सा भारत से जुड़ा है और भारतीय अधिकारियों ने भी इस मामले की जांच की है। इसके अतिरिक्त, किसी निवेशक को हुए नुकसान की पहचान नहीं की गई है। अमेरिकी न्याय विभाग ने कहा था कि इस मामले को आगे बढ़ाना अब विभाग की प्राथमिकताओं के अनुरूप नहीं है। विभाग ने यह भी तर्क दिया कि बाइडन प्रशासन के अंतिम हफ्तों में सार्वजनिक किए गए इस मामले के मुकदमे तक पहुंचने की वास्तविक संभावना बहुत कम थी। विभाग ने इसे राजनीतिक रूप से प्रेरित ‘नाम लेकर बदनाम करने’ की कोशिश जैसा भी बताया था।