बुलंद सोच।
राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (एनपीपीए) ने चार जरूरी दवाओं की सीलिंग प्राइस में एकमुश्त 50% तक बढ़ोतरी को मंजूरी दी है। यह मंजूरी दवाओं की लगातार घटती उपलब्धता और कंपनियों द्वारा उत्पादन को घाटे का सौदा बताए जाने के बाद दी गई है। प्राधिकरण का कहना है कि इस निर्णय का उद्देश्य दवाओं को महंगा करना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि मरीजों को ये जीवनरक्षक दवाएं बाजार में लगातार मिलती रहें।
एनपीपीए ने तीन राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम से जुड़े टीकों की सीलिंग प्राइस भी संशोधित की है। बीसीजी वैक्सीन की कीमत 8.20 रुपये से बढ़ाकर 9.89 रुपये प्रति डोज कर दी गई है। मीजल्स-रूबेला (एमआर) वैक्सीन के दाम 72.90 रुपये से बढ़ाकर 87.93 रुपये प्रति 0.5 एमएल वायल हो गए हैं। मीजल्स वैक्सीन की कीमत 51.40 रुपये से बढ़कर 62.00 रुपये प्रति 0.5 एमएल वायल हो गई है।
कार्बोप्लैटिन इंजेक्शन (10 mg/ml) की कीमत ₹60.49 प्रति एमएल से बढ़कर ₹90.74 प्रति एमएल हो गई है। सिसप्लैटिन इंजेक्शन (1 mg/ml) की कीमत ₹7.26 प्रति एमएल से बढ़कर ₹10.89 प्रति एमएल हो गई है। एंटी-टिटनेस इम्युनोग्लोबुलिन 250 IU की कीमत ₹1,274.68 प्रति वायल से बढ़कर ₹1,912.02 प्रति वायल हो गई है। एंटी-टिटनेस इम्युनोग्लोबुलिन 500 IU की कीमत ₹1,920.79 प्रति वायल से बढ़कर ₹2,881.19 प्रति वायल हो गई है।
ब्रेस्ट कैंसर उपचार में नई दवा को मंजूरी
ब्रेस्ट कैंसर के मरीजों के लिए राहत भरी खबर है। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) की विशेषज्ञ समिति ने एनहर्टू दवा के दो नए इस्तेमाल को मंजूरी देने की सिफारिश की है। अगर अंतिम मंजूरी मिल जाती है, तो इस दवा का इस्तेमाल ऑपरेशन से पहले और ऑपरेशन के बाद भी किया जा सकेगा। इससे शुरुआती चरण के एचईआर2-पॉजिटिव ब्रेस्ट कैंसर से जूझ रहे मरीजों के इलाज के विकल्प बढ़ेंगे और बेहतर नतीजे मिलने की उम्मीद है।
कैंसर दवाओं की कीमतों में बढ़ोतरी का कारण
कार्बोप्लैटिन और सिसप्लैटिन कैंसर के इलाज में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाली शुरुआती कीमोथेरेपी दवाओं में शामिल हैं। एनपीपीए के सामने यह चिंता रखी गई थी कि इनके सक्रिय दवा घटक (एपीआई) की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। इससे कंपनियों के लिए उत्पादन मुश्किल हो रहा था और बाजार में इनकी कमी का खतरा पैदा हो गया था। इसी वजह से प्राधिकरण ने सार्वजनिक हित में विशेष अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए कीमतों में 50 फीसदी तक की बढ़ोतरी का फैसला लिया। इन कीमतों की छह महीने बाद दोबारा समीक्षा भी की जाएगी।
