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2026-08-02

ओमान में इमामत के नाम पर ठगी, रायसेन के फैजान से कराए 40 कमरों के टॉयलेट साफ

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, भोपाल।

रायसेन जिले के दीवानगंज निवासी मोहम्मद फैजान को ओमान में मस्जिद में इमामत (नमाज पढ़ाने) कराने का सपना दिखाकर कैद जैसी जिंदगी जीने पर मजबूर किया गया। उन्हें न सम्मान मिला, न वेतन और न ही दो वक्त की रोटी की गारंटी। करीब ढाई महीने तक मानसिक और आर्थिक प्रताड़ना झेलने के बाद भोपाल के सामाजिक कार्यकर्ता सैयद आबिद हुसैन की पहल पर भारतीय दूतावास और विदेश मंत्रालय के हस्तक्षेप से उनकी सुरक्षित वतन वापसी हुई।

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फैजान ने दैनिक भास्कर को बताया कि जनवरी 2026 में उनकी मुलाकात एक एजेंट से हुई, जिसने ओमान की एक मस्जिद में इमामत का काम दिलाने का भरोसा दिलाया। पहले 20 हजार रुपए लिए गए, जिसके बाद मेडिकल प्रक्रिया के दौरान 1 लाख 80 हजार रुपए और जमा कराए गए। परिवार ने करीब 2 लाख रुपए का इंतजाम कर उन्हें विदेश भेजा। फैजान 4 मई 2026 को ओमान के मस्कट पहुंचे।

मस्कट पहुंचने के बाद कंपनी ने उन्हें दो-तीन दिन अपने पास रखा और फिर एक मिनिस्ट्री ऑफिस भेज दिया। जिस काम के लिए फैजान गए थे, वह उन्हें कभी नहीं मिला। उनसे 30 से 40 कमरों वाले मिनिस्ट्री ऑफिस की सफाई कराई जाती थी, जिसमें सभी कमरों, टॉयलेट, बाथरूम और बर्तनों की सफाई का काम शामिल था।

फैजान के अनुसार, उनसे रोज 14 से 15 घंटे काम कराया जाता था। इसके बावजूद कंपनी ने न वेतन दिया और न खाने के लिए पैसे। पैसे मांगने पर हर बार कहा जाता था कि ‘अभी नहीं हैं, बाद में देंगे’। धीरे-धीरे उनकी जेब खाली हो गई और कई बार लगातार चार-चार दिन तक भूखे रहने की नौबत आ गई।

भूख से परेशान फैजान की मदद कंपनी ने नहीं, बल्कि वहां रहने वाले भारतीयों ने की। मस्कट निवासी नवाब भाई ने उन्हें खाने के लिए पैसे दिए, जबकि मोहम्मद खलील अहमद उन्हें अपने घर ले गए और करीब डेढ़ महीने तक अपने पास रखा।

मई के आखिर और जून की शुरुआत तक फैजान ने कई बार एजेंट से संपर्क किया, लेकिन एजेंट हर बार ‘एक-दो दिन इंतजार करो’ कहकर टालता रहा और बाद में उसने नंबर ही ब्लॉक कर दिया। जब फैजान ने कंपनी से भारत लौटने की बात कही, तो कंपनी ने 650 रियाल (16,629 रुपए) जमा कराने की शर्त रख दी।

18 जुलाई को फैजान का मामला भोपाल के सामाजिक कार्यकर्ता सैयद आबिद हुसैन तक पहुंचा। उन्होंने उसी दिन भारतीय दूतावास और विदेश मंत्रालय के अधीन भारतीय प्रवासी सहायता केंद्र को शिकायत भेजी। दूतावास ने फैजान को बुलाकर दस्तावेजी प्रक्रिया शुरू कराई। कंपनी ने फैजान का पासपोर्ट भी अपने कब्जे में रख लिया था, जिसे दूतावास के हस्तक्षेप के बाद वापस मिला।

बाद में लेबर कोर्ट से एग्जिट परमिट मिला। 26 जुलाई को भारतीय दूतावास ने ई-मेल भेजकर पुष्टि की कि फैजान की वापसी की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। फैजान 28 जुलाई की रात मुंबई पहुंचे और 30 जुलाई की रात अपने घर दीवानगंज लौट आए। कानूनी प्रक्रिया पूरी होने पर ही उनकी घर वापसी संभव हो सकी।

भोपाल निवासी सामाजिक कार्यकर्ता सैयद आबिद हुसैन कई वर्षों से विदेशों में फंसे भारतीयों की मदद कर रहे हैं। उनके अनुसार, अब तक वे करीब 1500 भारतीयों की सुरक्षित वतन वापसी में सहयोग कर चुके हैं। फैजान के मामले में भी उन्होंने भारतीय दूतावास, विदेश मंत्रालय और भारतीय प्रवासी सहायता केंद्र से समन्वय कर प्रक्रिया तेज कराई। उनका कहना है कि सही समय पर शिकायत और दस्तावेज उपलब्ध होने पर अधिकांश मामलों में भारतीय दूतावास प्रभावी कार्रवाई करता है।