बुलंद सोच, कोलकाता।
पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद से कथित खतरे के इनपुट के बाद पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है। यह निर्णय खुफिया एजेंसियों से मिले इनपुट और स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) की जांच में सामने आए तथ्यों के बाद लिया गया है।
सुरक्षा एजेंसियों ने मुख्यमंत्री के लिए बुलेटप्रूफ वाहन के इस्तेमाल को अनिवार्य कर दिया है। अधिकारियों का मानना है कि मौजूदा परिस्थितियों में किसी भी तरह का जोखिम नहीं लिया जा सकता।
जांच और गिरफ्तारियां
एसटीएफ ने इस मामले में पूर्व बर्धमान जिले के बर्धमान शहर से हमीम मंडल को गिरफ्तार किया है। इसके बाद उसकी कथित सहयोगी अर्पिता सरकार को भी हिरासत में लिया गया।
जांच एजेंसियों के अनुसार, शुरुआती जांच में दोनों के तार पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद और शहजाद भट्टी नेटवर्क से जुड़े होने के संकेत मिले हैं।
पुलिस का दावा है कि आरोपियों के पास से मुख्यमंत्री के दैनिक कार्यक्रम और यात्रा मार्ग से जुड़ी संवेदनशील जानकारी भी बरामद हुई है। फिलहाल एजेंसियां इस बात की जांच कर रही हैं कि यह जानकारी उनके पास कैसे पहुंची और इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क तो सक्रिय नहीं था।
बुलेटप्रूफ वाहन का उपयोग
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, मुख्यमंत्री के काफिले में बुलेटप्रूफ वाहन पहले से शामिल था, लेकिन शुभेंदु अधिकारी आमतौर पर लोगों से सीधे संपर्क बनाए रखने के लिए सामान्य वाहन से यात्रा करना पसंद करते थे।
हालांकि, ताजा सुरक्षा इनपुट मिलने के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने उन्हें केवल बुलेटप्रूफ वाहन से यात्रा करने की सलाह दी है। रविवार शाम को कांथी स्थित अपने पैतृक आवास से कोलकाता लौटते समय उन्होंने इसी वाहन का इस्तेमाल किया।
पूर्व में भी सुरक्षा चिंताएं
मुख्यमंत्री की सुरक्षा को लेकर पहले भी चिंता जताई जा चुकी है। विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के दो दिन बाद, 6 मई को उत्तर 24 परगना के मध्यमग्राम में उनके करीबी सहयोगी चंद्रनाथ रथ की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।
इस घटना के बाद भी सुरक्षा अधिकारियों ने मुख्यमंत्री की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की थी। अब आतंकी खतरे से जुड़े नए इनपुट सामने आने के बाद सुरक्षा घेरा और मजबूत कर दिया गया है।
फिलहाल एसटीएफ, खुफिया एजेंसियां और अन्य सुरक्षा इकाइयां मामले की गहराई से जांच कर रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मुख्यमंत्री की सुरक्षा को लेकर सामने आया खतरा कितना व्यापक था और इसके पीछे कौन-कौन लोग शामिल थे।
सुरक्षा एजेंसियों ने मुख्यमंत्री के कार्यक्रमों, यात्रा मार्ग और सार्वजनिक आयोजनों के दौरान भी अतिरिक्त सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं।

