बुलंद सोच, दतिया।
दतिया विधानसभा उपचुनाव का परिणाम आज घोषित होगा। यह भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न है।
इस जनादेश से न केवल दोनों दलों की चुनावी रणनीति की कसौटी होगी, बल्कि पूर्व गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा की राजनीतिक साख और संगठन में उनकी पकड़ को लेकर भी बड़ा संदेश जाएगा।
भाजपा की चुनावी रणनीति
भाजपा ने इस बार लंबे समय तक दतिया का प्रतिनिधित्व करने वाले डॉ. नरोत्तम मिश्रा के स्थान पर आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया था।
टिकट बदलने के बाद कार्यकर्ताओं की नाराजगी और भीतरघात की चर्चाएं पूरे चुनाव प्रचार के दौरान सुर्खियों में रहीं।
इन अटकलों को समाप्त करने के लिए पार्टी ने पूरी ताकत झोंक दी, जिसमें मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, एक दर्जन से अधिक मंत्री, सांसद और विधायक लगातार क्षेत्र में सक्रिय रहे।
भाजपा ने चुनाव में जातीय समीकरण साधने पर भी विशेष जोर दिया। दतिया विधानसभा में ब्राह्मण मतदाता लगभग 14.8 प्रतिशत, अहिरवार-जाटव 14.7 प्रतिशत, कुशवाहा-काछी 12.2 प्रतिशत, यादव 7.4 प्रतिशत और लोधी 6.9 प्रतिशत हैं।
इन प्रमुख वर्गों तक पहुंच बनाने के लिए पार्टी ने अलग-अलग नेताओं को जिम्मेदारी सौंपी तथा बसई सहित उन इलाकों पर भी विशेष ध्यान दिया जहां ब्राह्मण, लोधी और अन्य ओबीसी मतदाताओं की संख्या अधिक है।
कांग्रेस की चुनौती
दूसरी ओर, कांग्रेस ने पूर्व विधायक घनश्याम सिंह को अपना प्रत्याशी बनाया। उनकी पहचान सरल और साफ-सुथरी छवि वाले नेता के रूप में रही है।
राजपरिवार से जुड़े होने के कारण क्षेत्र में उनकी अच्छी पकड़ मानी जाती है और ग्रामीण इलाकों में भी उनका प्रभाव रहा है।
हालांकि, मतदान के बाद कांग्रेस में अंदरूनी मतभेद खुलकर सामने आए, जब घनश्याम सिंह ने पूर्व विधायक राजेंद्र भारती पर पार्टी के खिलाफ काम करने का आरोप लगाया।
अन्य दावेदार और चुनावी परिदृश्य
आजाद समाज पार्टी के प्रत्याशी दामोदर यादव ने किसान, सड़क, बिजली और भ्रष्टाचार जैसे स्थानीय मुद्दों को प्रमुखता से उठाया।
चुनाव के अंतिम चरण में मुकाबला मुख्य रूप से भाजपा और कांग्रेस के बीच सिमटता नजर आया।
राजनीतिक विश्लेषकों का आकलन
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अपेक्षाकृत कम मतदान, महिलाओं की घटती भागीदारी और भाजपा में भीतरघात की चर्चाओं ने मुकाबले को बेहद रोचक बना दिया है।
दतिया लंबे समय तक डॉ. नरोत्तम मिश्रा का मजबूत राजनीतिक गढ़ रहा है; टिकट कटने के बावजूद उन्होंने भाजपा प्रत्याशी के समर्थन में लगातार प्रचार किया।
आज का परिणाम केवल जीत-हार तय नहीं करेगा, बल्कि यह भी संकेत देगा कि दतिया की जनता ने भाजपा की नई रणनीति पर भरोसा जताया है या कांग्रेस को वापसी का मौका दिया है, साथ ही डॉ. नरोत्तम मिश्रा के राजनीतिक प्रभाव और भविष्य की भूमिका को लेकर भी कई सवालों के जवाब मिल जाएंगे।

