बुलंद सोच।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक सुभाषित साझा किया। अंतर्राष्ट्रीय युवा दिवस के अवसर पर, पीएम मोदी ने भारतीय युवाओं को देश की सबसे बड़ी शक्ति बताया।
युवाओं के प्रयासों की सराहना करते हुए, प्रधानमंत्री मोदी ने ‘एक्स’ पोस्ट में लिखा कि, ‘हमारे युवा साथी देश का भविष्य ही नहीं, वर्तमान की सबसे बड़ी शक्ति भी हैं। उन्होंने अपनी संवेदनशीलता, सेवाभाव और सामर्थ्य से दुनियाभर में अलग पहचान बनाई है।’
इसके साथ ही, प्रधानमंत्री ने संस्कृत का एक श्लोक भी ‘एक्स’ पर पोस्ट किया। श्लोक था, ‘चक्षुषा मनसा वाचा कर्मणा च चतुर्विधम्। प्रसादयति यो लोकं तं लोकोऽनुप्रसीदति।।’ इस श्लोक का हिंदी अर्थ है कि जो व्यक्ति अपनी दृष्टि, विचारों, वाणी और कर्मों के माध्यम से लोगों का हृदय जीत लेता है, वह ही उनके विश्वास, सम्मान और सद्भाव का पात्र बनता है।
पहले साझा किए गए सुभाषित
इससे पहले, मंगलवार को प्रधानमंत्री की ओर से सोशल मीडिया ‘एक्स’ पर एक अन्य श्लोक साझा किया गया था। यह श्लोक था, ‘अष्टौ गुणाः पुरुषं दीपयन्ति प्रज्ञा सुशीलत्वदमौ श्रुतं च। पराक्रमश्च बहुभाषिता च दानं यथाशक्ति कृतज्ञता च।।’
इस श्लोक का अर्थ है कि ये आठ गुण मनुष्य के जीवन को प्रकाशमान करते हैं। बुद्धि उसके मार्ग को स्पष्ट करती है, सदाचार उसके आचरण को पवित्र बनाता है और संयम उसे अनुशासित रखता है। ज्ञान उसे विवेक देता है, वीरता कठिन परिस्थितियों में अडिग रखती है और वाणी की कुशलता उसे समाज में सम्मान दिलाती है। अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान करना और उपकारों के प्रति कृतज्ञ रहना उसके व्यक्तित्व को पूर्णता प्रदान करते हैं।
प्रधानमंत्री की ओर से 7 अगस्त को भी एक सुभाषित साझा किया गया था। तब उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर लिखा था, ‘किं चन्द्रमाः प्रत्युपकारलिप्सया करोति गोभिः कुमुदावबोधनम्। स्वभाव एवोन्नतचेतसां सतां परोपकारव्यसनं हि जीवितम्॥’
इस श्लोक का हिंदी अर्थ है कि चंद्रमा किसी प्रत्युपकार की इच्छा से अपनी किरणों द्वारा कुमुदिनी को प्रकाशित नहीं करता, अपितु यह उसका स्वाभाविक गुण है। उसी प्रकार महान और उदार हृदय वाले सज्जन बिना किसी स्वार्थ या अपेक्षा के दूसरों का हित करते रहते हैं, क्योंकि परोपकार उनके स्वभाव में होता है।

