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जबलपुर में टी-सीरीज टैंक ओवरहाल परियोजना की आधारशिला, रक्षा उत्पादन में रिकॉर्ड वृद्धि का दावा

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, जबलपुर।

रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार को वाहन निर्माणी जबलपुर (वीएफजे) में टी-सीरीज टैंक के ओवरहाल प्रोजेक्ट की आधारशिला रखी। रक्षामंत्री इस अवसर पर मुख्य अतिथि की आसंदी से संबोधित कर रहे थे।

उन्होंने वाहन निर्माणी जबलपुर परिसर में टी-72 टैंक के अपग्रेडेशन और आधुनिकीकरण प्लांट की आधारशिला रखी। यह ₹472 करोड़ की परियोजना सेना की मारक क्षमता में वृद्धि करेगी और स्वदेशी रक्षा उत्पादन को नई गति प्रदान करेगी।

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रक्षामंत्री के वक्तव्य

रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि देश ‘नई दुनिया’ की नई चुनौती के लिए तैयार है, और हमारा ध्यान एडवांस तकनीक पर है। उन्होंने रक्षा क्षेत्र में तकनीक के बेहतर इस्तेमाल के प्रति कृत संकल्पित होने की बात कही।

उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहा है। रक्षामंत्री ने जोर देकर कहा कि मिसाइल, ड्रोन और टैंक के सभी उपयोगी साजो-सामान अब देश में ही बन रहे हैं। उन्होंने बताया कि अब देश आयात पर निर्भर नहीं, बल्कि निर्यात पर जोर दे रहा है, जो विकसित भारत की एक बेहतरीन तस्वीर पेश करने का सफल प्रयास है।

रक्षामंत्री ने यह भी कहा कि जबलपुर रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में एक प्रमुख हब के रूप में उभरे, इसके लिए प्रयास जारी हैं।

उन्होंने कहा कि 2014 में रक्षा उत्पादन महज ₹46,000 करोड़ था। वर्तमान सरकार के प्रयासों, नई तकनीक और बेहतर सोच के तालमेल से मेहनत रंग लाई और आज भारत का घरेलू रक्षा उत्पादन बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में रिकॉर्ड ₹1.80 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है।

राजनाथ सिंह ने बताया कि पिछले एक दशक में रक्षा उत्पादन में लगभग चार गुना की वृद्धि दर्ज की गई है। ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ जैसी पहलों के कारण भारतीय रक्षा उत्पाद अब दुनिया के अनेक देशों में पहुंच रहे हैं।

मुख्यमंत्री का संबोधन

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में जबलपुर एक अलग पहचान रखता है और इस नए टी-सीरीज प्रोजेक्ट से शहर ही नहीं बल्कि पूरे प्रदेश का गौरव बढ़ेगा। उन्होंने आगे कहा कि एमएसएमई के माध्यम से युवा हाथों को काम मिलेगा और प्रदेश में निवेश बढ़े, इसको लेकर सरकार सतत प्रयास कर रही है।

टैंकों की भूमिका और क्षमता

रक्षा मंत्री के अनुसार, विशेषज्ञ मानते थे कि ड्रोन-मिसाइल के इस दौर में टैंक एक पुराना हथियार है, लेकिन इसकी क्षमता और बेहतर प्रदर्शन से इनकार नहीं किया जा सकता है। टी-72 और टी-92 टैंक को तकनीक से जोड़ते हुए और उन्नत बनाने का लक्ष्य लेकर कार्य हो रहा है, जिससे यह सीमा पर ‘आयरन वॉल’ (दीवार) की तरह कार्य करेगा।

वाहन निर्माणी जबलपुर में टी-सीरीज टैंक ओवरहाल प्रोजेक्ट के माध्यम से हर साल 80 टैंकों को मजबूत आधार प्रदान करते हुए नया रूप दिया जाएगा। चेन्नई स्थित अवाडी फैक्ट्री 150 टैंक की मरम्मत करेगी। इस तरह जबलपुर और अवाडी में टी-72 और टी-90 टैंक की ओवरहाल के बाद सेना को कुल 230 टैंक नए रूप में हर साल मिलेंगे।

उपस्थित गणमान्य व्यक्ति

आर्मर्ड व्हीकल निगम लिमिटेड (एवीएनएल) की इकाई वीएफजे में आयोजित कार्यक्रम के दौरान सांसद आशीष दुबे, लोनिवि मंत्री राकेश सिंह, महापौर जगत बहादुर सिंह, विधायक अशोक रोहाणी, अभिलाष पांडे, रक्षा उत्पादन विभाग के सचिव संजीव कुमार, रक्षा उत्पादन विभाग की संयुक्त सचिव डॉ. गरिमा भगत, एवीएनएल सीएमडी सत्यव्रत मुखर्जी, निदेशक वित्त राजीव कुमार शर्मा और वीएफजे सीजीएम प्रवीण कुमार सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।