बुलंद सोच, जबलपुर।
रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के कर्मचारियों के नियमितीकरण को निलंबित करने के कुलगुरु के आदेश पर हाई कोर्ट ने अंतरिम रोक लगा दी है। न्यायमूर्ति विशाल धगट की एकलपीठ ने शरद सिंह कौशिक सहित अन्य की याचिका पर सुनवाई की।
कोर्ट ने कहा कि फिलहाल नियमितीकरण में अनियमितता साबित करने वाला कोई ठोस आधार रिकॉर्ड पर नहीं है। जांच समिति की अंतिम रिपोर्ट आने तक 14 जुलाई, 2026 का कुलगुरु का आदेश प्रभावी नहीं रहेगा।
याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता केसी घिल्डियाल और अधिवक्ता अवधेश कुमार अहिरवार ने नियमितीकरण प्रक्रिया को विधिसम्मत बताते हुए कर्मचारियों के अधिकार बहाल रखने की मांग की।
कोर्ट ने कर्मचारियों को अंडरटेकिंग देने की शर्त पर यह राहत प्रदान की है। कैविएटर अधिवक्ता स्वप्निल गांगुली ने अनियमितता की आशंका और जांच समिति के गठन की जानकारी दी।
राज्य सरकार की ओर से शासकीय अधिवक्ता हितेंद्र सिंह उपस्थित हुए। कर्मचारियों को यह अंडरटेकिंग देनी होगी कि जांच रिपोर्ट उनके विरुद्ध आने पर उन्हें अंतर राशि वापस करनी होगी।
मामले की अगली सुनवाई सात सितंबर से शुरू होने वाले सप्ताह में होगी।
मेडिकल इंटर्न्स की मांग
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने भी मेडिकल इंटर्न्स की आर्थिक समस्याओं को उठाया है। एबीवीपी ने एमबीबीएस और बीडीएस इंटर्न्स का स्टाइपेंड 30,000 रुपये करने की मांग की है और इस संबंध में मुख्यमंत्री को एक ज्ञापन भेजा है।

