बुलंद सोच, बालाघाट।
दक्षिण वन मंडल बालाघाट सामान्य के सोनेवानी कंजर्वेशन रिजर्व लालबर्रा में विश्व बाघ दिवस पर एक बाघ की मौत हो गई। यह बाघ सोनेवानी की चर्चित ‘बाघिन गौरा’ का डेढ़ वर्षीय शावक ‘सूखा’ था। बुधवार, 29 जुलाई को गश्त के दौरान सोनेवानी कंजर्वेशन रिजर्व के बहियाटिकुर सर्किल के कक्ष क्रमांक 443 में अंबा माई रोड नाके के आगे यह बाघ मृत पाया गया। मृत बाघ के शरीर पर अनेक स्थानों पर गंभीर चोट के निशान मिले हैं। बाघ की मौत आपसी संघर्ष में होना बताया जा रहा है और शव दो दिन पुराना था।
दस माह से था लापता
जानकारी के अनुसार, गौरा बाघिन का शावक ‘सूखा’ पिछले दस माह से लापता था। अपनी मां से बिछड़ने के बाद वह बहुत कमजोर हो गया था, जिसकी तलाश वन विभाग की टीम लगातार कर रही थी। बाघिन वैसे तो अपने शावकों को तीन वर्ष तक साथ में रखती है, जिससे वे शिकार करना सीख सकें। मां से बिछड़ने के बाद कम भोजन मिलने के कारण ‘सूखा’ शावक कमजोर हो गया था, जिसके चलते आपसी संघर्ष में वह परास्त हो गया।
वन विभाग की कार्रवाई
बाघ की मौत की जानकारी मिलते ही सीसीएफ गौरव चौधरी सहित पूरा वन अमला मौके पर पहुंचा। पूरे क्षेत्र को सील कर दिया गया। प्रोटोकॉल के तहत पटवारी और स्थानीय जनप्रतिनिधि की मौजूदगी में कान्हा से आए चिकित्सक सहित तीन सदस्यीय चिकित्सकों की टीम ने मृत बाघ का पोस्टमार्टम किया। पोस्टमार्टम में ‘सूखा’ शावक के शरीर में आपसी संघर्ष के कारण अनेक स्थानों पर गहरे घाव पाए गए।
सोनेवानी में दूसरी बाघ की मौत
सोनेवानी में पिछले एक साल के भीतर यह दूसरे बाघ की मौत हुई है। पिछले वर्ष जब वन परिक्षेत्र अधिकारी का स्थानांतरण हुआ था, तब सहायक वन परिक्षेत्र अधिकारी, बीटगार्ड और अस्थाई कर्मियों ने बाढ़ में बहकर आई एक बाघिन के शव को बिना प्रोटोकॉल के जला दिया था। इस वर्ष दूसरे वन परिक्षेत्र अधिकारी का स्थानांतरण हुए एक सप्ताह भी नहीं हुए थे कि फिर एक बाघ की मौत हो गई। सोनेवानी में वन अधिकारियों और वनकर्मियों की लगातार लापरवाही से बाघों की संख्या बढ़ने की बजाय कम होने लगी है। इसका असर आगामी दिनों में पर्यटन पर भी पड़ सकता है।
सीसीएफ का बयान
सीसीएफ बालाघाट, गौरव चौधरी ने बताया कि बहियाटिकुर के कक्ष क्रमांक 443 में एक शावक मृत हालत में मिला है। उसके शरीर पर गहरे चोट के निशान पाए गए हैं। प्रथम दृष्टया आपसी संघर्ष में बाघ की मौत होना प्रतीत हो रहा है। बाघ का पोस्टमार्टम कराकर अंतिम संस्कार कर दिया गया है। वर्षाकाल प्रारंभ होने के कारण सोनेवानी में मानसून गश्ती लगातार की जा रही है।

