BREAKING NEWS
2026-08-14

अचलेश्वर महादेव ट्रस्ट चुनाव में प्रशासन की ढिलाई, हाई कोर्ट की दो माह की समयसीमा समाप्त

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, ग्वालियर।

ग्वालियर में अचलनाथ दरबार का संचालन करने वाले ट्रस्ट के चुनाव की घोषणा का सरकारी आदेश अभी तक जारी नहीं हुआ है। यह स्थिति तब है जब उच्च न्यायालय ने दो माह के भीतर चुनाव की घोषणा करने का निर्देश दिया था, जिसकी समयसीमा बीत चुकी है। प्रशासन के अधिकारियों द्वारा ये निर्देश भी नहीं माने गए हैं। उच्च न्यायालय ने अचलेश्वर महादेव ट्रस्ट के चुनाव की घोषणा के लिए दो माह का समय दिया था। इसके अतिरिक्त, जिला न्यायालय से जुड़े एक अन्य प्रकरण के निराकरण के लिए छह माह का समय निर्धारित किया गया है। अचलेश्वर महादेव के भक्तगण और श्रद्धालु न्यायालय के आदेश के पालन का इंतजार कर रहे हैं, ताकि बेहतर व्यवस्थाओं का संचालन हो सके। चुनाव प्रक्रिया को इस दिशा में पहली सीढ़ी माना जा रहा है।

Advertisement

हाई कोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला

न्यायमूर्ति आशीष श्रोती ने अचलेश्वर महादेव सार्वजनिक न्यास के प्रबंधन और संपत्तियों में कथित अनियमितताओं से जुड़े एक मामले की सुनवाई की। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की ग्वालियर खंडपीठ ने इस मामले में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। उच्च न्यायालय ने जिला न्यायालय द्वारा वर्ष 2022 में पारित उस आदेश को निरस्त कर दिया, जिसमें पब्लिक ट्रस्ट रजिस्ट्रार द्वारा प्रस्तुत प्रकरण को खारिज कर दोबारा जांच के लिए भेजा गया था। अदालत ने मामले की दोबारा सुनवाई के निर्देश देते हुए छह माह के भीतर प्रकरण का निराकरण करने को कहा है।

अनियमितताओं की शिकायत और जांच

प्रकरण की शुरुआत तब हुई जब सामाजिक कार्यकर्ता संतोष सिंह राठौर ने अचलेश्वर महादेव सार्वजनिक न्यास के संचालन, संपत्तियों के प्रबंधन और वित्तीय लेन-देन में गड़बड़ियों की शिकायत की थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि न्यास का संचालन नियमों के अनुरूप नहीं हो रहा है और इसकी संपत्तियों तथा धनराशि का उचित प्रबंधन नहीं किया जा रहा। उच्च न्यायालय के निर्देश पर पब्लिक ट्रस्ट रजिस्ट्रार ने मामले की जांच कराई थी। जांच के दौरान संयुक्त संचालक कोष एवं लेखा विभाग की रिपोर्ट में वित्तीय अनियमितताओं की ओर संकेत किया गया। इसके आधार पर रजिस्ट्रार ने मध्य प्रदेश पब्लिक ट्रस्ट अधिनियम की धारा 26 के तहत जिला न्यायालय में आवेदन प्रस्तुत कर आवश्यक दिशा-निर्देश मांगे थे।

न्यास कार्यकारिणी का कार्यकाल समाप्त

सुनवाई के दौरान उच्च न्यायालय ने पाया कि न्यास की निर्वाचित कार्यकारिणी का कार्यकाल दो वर्ष का था और अंतिम चुनाव वर्ष 2017 में हुए थे। इस प्रकार, कार्यकारिणी का कार्यकाल 2019 में ही समाप्त हो चुका था। इसके बावजूद, नई कार्यकारिणी का गठन नहीं हुआ। अदालत ने कहा कि ऐसी स्थिति में पूर्व पदाधिकारियों को सुनवाई का अवसर नहीं मिलने को आधार बनाकर पूरे मामले को खारिज करना उचित नहीं था। संतोष राठौर की ओर से पंजीयक लोक न्यास को एक रिप्रेजेंटेशन भी फाइल किया जा चुका है। अदालत ने यह भी माना कि जिला न्यायालय ने मामले के मूल तथ्यों और आरोपों पर विचार करने के बजाय तकनीकी आधारों पर फैसला दिया, जो न्यायसंगत नहीं था। उच्च न्यायालय ने जिला न्यायालय का आदेश निरस्त कर दिया।

प्रशासन का पक्ष

एसडीएम लश्कर नरेंद्रबाबू यादव ने बताया कि अचलेश्वर ट्रस्ट के चुनाव के लिए सदस्यों की सूची मांगी गई है, जो अभी तक प्राप्त नहीं हुई है। उन्होंने दोहराया कि दो माह में चुनाव की घोषणा के निर्देश हैं। यादव ने यह भी स्पष्ट किया कि पहले जो समिति संचालन के लिए बनी थी, वह अब अस्तित्व में नहीं है।