बुलंद सोच।
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को तमिलनाडु सरकार की उस याचिका पर सुनवाई करने पर सहमति जताई, जिसमें कर्नाटक सरकार को तमिलनाडु के हिस्से का कावेरी नदी का पानी तुरंत छोड़ने का निर्देश देने की मांग की गई है। शीर्ष कोर्ट इस याचिका पर 13 अगस्त को सुनवाई करेगा। चीफ जस्टिस (सीजेआई) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहन की पीठ ने राज्य सरकार की ओर से पेश वकील की दलीलों पर ध्यान दिया। वकील ने पीठ को बताया कि कम बारिश वाले साल में तमिलनाडु को कावेरी नदी के पानी का उसका उचित हिस्सा नहीं मिल रहा है। सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली तमिलनाडु सरकार ने तीन अगस्त को सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था और कर्नाटक को तमिलनाडु के हिस्से का कावेरी का पानी तुरंत छोड़ने का निर्देश देने की मांग की थी।
अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा मामला
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे के कथित गबन की कोर्ट की निगरानी में विशेष जांच दल (एसआईटी) से जांच कराने की मांग वाली याचिकाओं पर सुनवाई टालने के अनुरोध पर विचार करने पर सहमति जताई। उत्तर प्रदेश सरकार के वकील ने सुप्रीम कोर्ट से इन याचिकाओं पर सुनवाई टालने का अनुरोध किया था, जिसकी वजह यह बताई गई कि मामले में पेश हो रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता उपलब्ध नहीं हैं। सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची तथा जस्टिस वी. मोहन की पीठ को एक वकील ने सूचित किया कि उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश हो रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता एक प्रतिनिधिमंडल के साथ संयुक्त राष्ट्र गए हैं, जहां उन्हें एक कार्यक्रम में शामिल होना है। पीठ ने वकील से पूछा कि क्या ये मामले सुनवाई के लिए सूचीबद्ध हैं, जिस पर वकील ने जवाब दिया कि हां, 30 से 33 नंबर तक के मामले सूचीबद्ध हैं और अनुरोध किया कि इसे अगले सप्ताह सुनवाई के लिए लिया जाए।
शिवसेना (यूबीटी) याचिका
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को शिवसेना (यूबीटी) की उस याचिका पर सुनवाई दो हफ्ते के लिए टाल दी, जिसमें उसके छह सांसदों के महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में विलय को लोकसभा अध्यक्ष की ओर से दी गई मंजूरी को चुनौती दी गई है। जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस अलोक अराधे की पीठ ने कहा कि शिवसेना (यूबीटी) नेता अरविंद गणपत सावंत की ओर से दाखिल याचिका पर लोकसभा अध्यक्ष के कार्यालय और अन्य संबंधित पक्षों को अभी तक जारी नोटिस की तामील नहीं हुई है। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि अदालत को अंतरिम राहत के मुद्दे पर विचार करना होगा, क्योंकि इसके गंभीर परिणाम हैं। सिब्बल ने आगे कहा कि अध्यक्ष केवल अयोग्यता के आवेदन पर बचाव के तौर पर किसी मामले का फैसला कर सकते हैं और उनके पास असीमित अधिकार नहीं हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई दो हफ्ते बाद करने का निर्णय लिया।

