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2026-07-29

अमेरिकी नागरिकों से ठगी: चार आरोपी जेल भेजे गए, सरगना की तलाश जारी

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, ग्वालियर।

अमेरिकी नागरिकों से ठगी के मामले में चार आरोपियों को न्यायालय में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया है। पुलिस अब इस ठगी के नेटवर्क के सरगना की तलाश कर रही है, जिसके पकड़े जाने पर इस गिरोह की विस्तृत जानकारी सामने आ सकेगी।

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यह इंटरनेशनल कॉल सेंटर ग्वालियर-शिवपुरी हाईवे पर मोहना स्थित होटल जैनपथ के कमरा नंबर-6 में संचालित हो रहा था। पुलिस ने यहीं से गुजरात के अहमदाबाद निवासी राजपूत अभिषेक, शिवेंद्र नरेंद्र सिंह परिहार, नागालैंड के शुभोम घोष और झांसी के आर्यन को पकड़ा। ये चारों पिछले पांच माह से इसी स्थान पर रुके हुए थे और एक कमरे से ही लैपटॉप व अन्य उपकरणों के माध्यम से गूगल वॉयस कॉल करते थे।

आरोपी स्वयं को ‘लैंडिंग क्लब’ का सदस्य बताकर अमेरिकी नागरिकों को लोन दिलाने का झांसा देते थे और इस प्रकार उनसे ठगी करते थे।

जांच में सामने आया है कि आरोपियों के पास जो डाटा आता था, वह अमेरिका की एक सोलर कंपनी का था। इसमें अमेरिकी नागरिकों के नाम, नंबर व अन्य जानकारी शामिल होती थी। यह डाटा डार्क वेब से खरीदा जाता था और फिर सरगना द्वारा इन आरोपियों को उपलब्ध कराया जाता था। ये चारों आरोपी रातभर अमेरिकी नागरिकों को कॉल करते थे।

इस ठगी का सरगना प्रबल परिहार है, जो गुजरात के अहमदाबाद में रहता है। प्रबल परिहार ने ही आरोपियों को होटल में कमरा दिलाया था तथा लैपटॉप, मोबाइल और हेडफोन जैसे उपकरण उपलब्ध कराए थे।

आरोपियों ने पुलिस को बताया कि प्रबल ने शुरुआत में उनसे सिर्फ अंग्रेजी में बात करने के लिए कहा था। बाद में, जब वे यहां आए और अमेरिकी लोगों के नाम, नंबर साझा किए गए तथा उन्हें लोन का झांसा देने की स्क्रिप्ट दी गई, तो उन्होंने प्रबल से बात की। इस पर प्रबल ने उन्हें हर माह तनख्वाह के साथ रहने-खाने का पैसा भी देने का वादा किया। नौकरी न होने के कारण वे इस लालच में आ गए। आरोपियों ने यह भी बताया कि प्रबल डार्क वेब से सोलर कंपनी का डाटा खरीदकर उपलब्ध कराता था।

अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एएसपी) जयराज कुबेर ने बताया कि चूंकि अमेरिकी नागरिक ठगे गए हैं, इसलिए विदेश मंत्रालय के माध्यम से अमेरिका की जांच एजेंसी एफबीआई को इस संबंध में सूचना दी जाएगी।

एएसपी जयराज कुबेर के अनुसार, इस मामले में फिलहाल पुलिस फरियादी है। ठगे गए अमेरिकी नागरिकों के बयान एफबीआई की मदद से दर्ज किए जाएंगे। पुलिस के पास ठगे गए लोगों का डाटा भी उपलब्ध है।