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2026-08-03

बड़े तालाब का जलस्तर 7.10 फीट नीचे, तीन लाख लोगों की जलापूर्ति पर चिंता

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, भोपाल।

राजधानी भोपाल की जीवनरेखा माने जाने वाले बड़े तालाब (भोज वेटलैंड) पर इस वर्ष कमजोर मानसून का प्रभाव स्पष्ट रूप से दिख रहा है। भोपाल और इसके प्रमुख कैचमेंट क्षेत्र सीहोर में पिछले वर्ष की तुलना में कम वर्षा के कारण तालाब का जलस्तर अपेक्षित गति से नहीं बढ़ पा रहा है।

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वर्तमान जलस्तर

रविवार को बड़े तालाब का जलस्तर 1659.70 फीट दर्ज किया गया। इसका फुल टैंक लेवल (एफटीएल) 1666.80 फीट है। इस प्रकार, तालाब अपने पूर्ण जलभराव स्तर से 7.10 फीट नीचे बना हुआ है।

बारिश के बावजूद कम बढ़ोतरी

20 जुलाई को बड़े तालाब का जलस्तर 1659.50 फीट था। इसके बाद कई दौर की बारिश होने के बावजूद जलस्तर में केवल 0.20 फीट की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिससे यह 1659.70 फीट पर पहुंचा। यह स्थिति दर्शाती है कि इस वर्ष मानसून का प्रभाव तालाब के जलभराव पर अपेक्षित रूप से नहीं पड़ा है।

पिछले वर्ष से तुलना

पिछले वर्ष एक अगस्त को बड़े तालाब का जलस्तर 1664.30 फीट था। इस वर्ष जलस्तर पिछले साल की तुलना में 4.60 फीट कम है, जिसे सीधे तौर पर कम बारिश का परिणाम माना जा रहा है।

कम वर्षा के आंकड़े

वर्षा के आंकड़े भी इस स्थिति की पुष्टि करते हैं। पिछले वर्ष एक अगस्त तक भोपाल में 26.25 इंच और सीहोर में 25.4 इंच वर्षा दर्ज की गई थी। इसके विपरीत, इस वर्ष दो अगस्त तक भोपाल में केवल 18.98 इंच और सीहोर में 20.6 इंच बारिश हुई है। इस प्रकार, भोपाल में लगभग 7.3 इंच और सीहोर में 4.8 इंच कम वर्षा रिकॉर्ड की गई है।

सीहोर कैचमेंट का प्रभाव

बड़े तालाब का अधिकांश कैचमेंट क्षेत्र सीहोर जिले में स्थित है। सीहोर में सामान्य से कम बारिश होने का सीधा असर तालाब में पानी की आवक पर पड़ा है, जिसके कारण जलस्तर अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच सका है।

जलापूर्ति पर चिंता

बड़ा तालाब केवल एक प्राकृतिक जलाशय नहीं है, बल्कि यह भोपाल की जलापूर्ति व्यवस्था का प्रमुख आधार भी है। नगर निगम इसी तालाब से पुराने भोपाल, संत हिरदाराम नगर (बैरागढ़) और आसपास के क्षेत्रों की तीन लाख से अधिक आबादी को प्रतिदिन पेयजल उपलब्ध कराता है। यह तालाब शहर के भूजल स्तर को बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

मानसून के दौरान भी तालाब का जलस्तर एफटीएल से 7.10 फीट नीचे बने रहना भविष्य की जलापूर्ति और जल संरक्षण, दोनों के लिहाज से चिंता का विषय माना जा रहा है।

मौसम का पूर्वानुमान

मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, प्रदेश में अगले पांच दिनों तक मौसम में किसी बड़े बदलाव की संभावना नहीं है। चक्रवाती परिसंचरण और ट्रफ लाइन के प्रभाव से ग्वालियर-चंबल संभाग, रीवा और सीधी में मूसलाधार बारिश की संभावना जताई गई है। अरब सागर और गुजरात तट से मिल रही नमी के कारण भोपाल, इंदौर और उज्जैन संभाग में रुक-रुक कर बारिश का दौर जारी रह सकता है।

मौसम विभाग का अलर्ट

मौसम विभाग ने सीधी, सिंगरौली, मंडला, डिंडोरी, जबलपुर, उमरिया, शहडोल और अनूपपुर जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। भोपाल, इंदौर, सीहोर, विदिशा, देवास, धार, नर्मदापुरम, हरदा, बैतूल, सतना, मैहर, रीवा, मऊगंज, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, बालाघाट, नरसिंहपुर और कटनी जिलों में येलो अलर्ट घोषित किया गया है।