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2026-08-03

मध्यप्रदेश में आपदाओं से निपटने भोपाल में बनेगा हेल्थ इमरजेंसी ऑपरेटिंग सेंटर

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, भोपाल।

मध्य प्रदेश में अब बाढ़, भूकंप और महामारी जैसी प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए स्वास्थ्य सेवाएं आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ-एनडीआरएफ) के साथ पूरी तरह एकीकृत होंगी।

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इसके लिए केंद्र सरकार के प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन के तहत भोपाल में प्रदेश का पहला हेल्थ इमरजेंसी ऑपरेटिंग सेंटर (एचईओसी) बनाया जा रहा है।

आपातकाल में समय पर इलाज सुनिश्चित

इस नियंत्रण कक्ष का उद्देश्य बाढ़ या किसी बीमारी के प्रकोप के दौरान मरीजों तक समय पर इलाज न पहुंचने और बीमारी के फैलने की सबसे बड़ी समस्या को रोकना है।

इस केंद्र में स्वास्थ्य विशेषज्ञ तैनात होंगे, जिनमें वरिष्ठ जन स्वास्थ्य परामर्शदाता बाढ़ प्रभावित जिलों से हर घंटे की रिपोर्ट लेंगे।

ये विशेषज्ञ दवाओं की कमी, डॉक्टरों और एंबुलेंस की आवश्यकता का आकलन कर पूरी कार्ययोजना बनाएंगे तथा बाढ़ के बाद गंदे पानी से होने वाली बीमारियों को रोकने के लिए मैदानी टीमों को निर्देश देंगे।

ये टीमें बीमारी के फैलाव और अधिक जोखिम वाले क्षेत्रों का मानचित्रण करेंगी, ताकि सहायता सही जगह पहुंच सके; इसके लिए उपकरण खरीदे जा रहे हैं और आईटी विभाग को सक्रिय किया गया है।

ऑनलाइन निगरानी और टेलीमेडिसिन

अब इंजीनियर और आईटी टीम मिलकर पूरे प्रदेश के जिला अस्पतालों और नियंत्रण कक्षों को ऑनलाइन जोड़ेंगे, जिससे बाढ़ जैसी स्थिति में भी नेटवर्क और सर्वर बंद न हों।

टेलीमेडिसिन और हेल्पलाइन के माध्यम से दूरदराज के गांवों में बैठे मरीजों को भी डॉक्टर की सलाह मिल सकेगी।

कोविड से मिली सीख और भविष्य की तैयारी

राज्य निगरानी अधिकारी डॉ. अश्विन भगत ने बताया कि यह केंद्र कोविड-19 महामारी से मिली सीख के आधार पर बनाया गया है।

उन्होंने कहा कि अब असम जैसी बाढ़, भूकंप और उसके बाद आने वाली बीमारियों से निपटने के लिए हमारी टीम तैयार है, और यह टीम नई-नई बीमारियों व इबोला जैसी महामारियों के आने पर भी तुरंत प्रतिक्रिया देगी।

प्रशिक्षण और संचालन

इस केंद्र को संचालित करने वाले कर्मचारियों और अधिकारियों को केंद्र सरकार प्रशिक्षित कर रही है; हाल ही में भोपाल में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय से आए विशेषज्ञों ने टीम को प्रशिक्षण दिया।

एचईओसी का मकसद स्वास्थ्य प्रतिक्रिया को तेज करना है। संसाधन मैपिंग के हिसाब से काम होगा, ताकि आपदा के समय संसाधन सही जगह, सही समय पर पहुंचें और लोगों की जान बचाई जा सके। यह केंद्र राज्य स्तर पर भोपाल में रहेगा और 24 घंटे सातों दिन काम करेगा, जैसा कि एनएचएम, भोपाल की अपर मिशन संचालक दिशा प्रणय नागवंशी ने बताया।