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2026-08-06

नांदनी गांव में मुक्तिधाम तक सड़क नहीं, कीचड़ से गुजरी अंतिम यात्रा

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, भोपाल।

भोपाल के हुजूर विधानसभा क्षेत्र के ग्राम नांदनी में विकास के दावों की पोल खुल गई। रविवार को एक महिला के शव की अंतिम यात्रा घुटनों तक कीचड़ से होकर निकालनी पड़ी। मुक्तिधाम तक सड़क नहीं होने के कारण ग्रामीणों ने शव को कंधों पर उठाकर दलदल जैसे रास्ते से अंतिम संस्कार के लिए पहुंचाया।

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ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि वर्षों से शिकायतों के बावजूद पंचायत और जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों ने इस समस्या का समाधान नहीं कराया। जानकारी के अनुसार, हुजूर विधानसभा की ग्राम पंचायत नांदनी के निवासी घनश्याम महेश्वरी की पत्नी कुंता बाई महेश्वरी का निधन हो गया था। उनके शव की रविवार को दोपहर 12 बजे अंतिम यात्रा निकाली गई, लेकिन मुक्तिधाम तक जाने के लिए पक्का रास्ता नहीं होने के कारण ग्रामीणों को घुटनों तक कीचड़ में शव को कंधों पर उठाकर ले जाना पड़ा। अंतिम यात्रा की यह तस्वीर गांव में विकास के दावों पर सवाल खड़े कर रही है।

ग्रामीणों की शिकायतें और अनदेखी

ग्रामीणों ने बताया कि सरकारी स्कूल से मुक्तिधाम तक जाने वाला मार्ग वर्षा में पूरी तरह दलदल में तब्दील हो जाता है। हर वर्ष अंतिम संस्कार के दौरान लोगों को इसी तरह भारी परेशानी झेलनी पड़ती है। कई बार ग्राम पंचायत की सरपंच कृपामणि राजेश वर्मा, पंचायत सचिव तथा अन्य जनप्रतिनिधियों से सड़क निर्माण की मांग की गई, लेकिन आज तक कोई सुनवाई नहीं हुई है।

ग्रामीणों का आरोप है कि अंतिम यात्रा के दौरान सरपंच को मौके पर बुलाया गया था। उन्होंने रास्ते की बदहाल स्थिति देखी, लेकिन कुछ देर बाद वहां से चली गईं। इसके बाद भी सड़क और मुक्तिधाम की मूलभूत सुविधाओं के निर्माण के लिए कोई ठोस पहल नहीं की गई। मुक्तिधाम तक पहुंचने का रास्ता केवल सुविधा का विषय नहीं है, बल्कि गांव के प्रत्येक परिवार की गरिमा और सम्मान से जुड़ा मुद्दा है। इसके बावजूद वर्षों से इस ओर लगातार उपेक्षा बरती जा रही है।

वैकल्पिक मार्ग पर कब्जा और प्रशासन से मांग

एक अन्य घटना में, एंबुलेंस बुलाना नहीं आता था तो एक व्यक्ति ठेले से अपनी पत्नी को अस्पताल लेकर पहुंचा, जहां रास्ते में उसकी मौत हो गई। वह ठेले पर ही शव लेकर श्मशान पहुंचा।

मुक्तिधाम के रास्ते को लेकर एसडीएम को पत्र लिखा गया है, जिसमें सीमांकन कर रास्ता निर्माण करवाने के लिए राशि उपलब्ध करवाने की मांग की गई है। मुक्तिधाम तक जाने का एक अन्य रास्ता भी है, लेकिन उस पर लोगों ने कब्जा कर लिया है। यही कारण है कि ग्रामीण दूसरे कीचड़ भरे रास्ते से होकर मुक्तिधाम अंतिम यात्रा लेकर पहुंचे। यह जानकारी सरपंच प्रतिनिधि राजेश वर्मा ने दी।