बुलंद सोच, भोपाल।

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में राजस्व विभाग के कामकाज की स्थिति उजागर हुई है। आम जनता अपनी ही जमीन और संपत्ति का कानूनी हक पाने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर है।
नामांतरण, सीमांकन और बंटवारे जैसे राजस्व के अहम और बुनियादी मामलों के निराकरण में भोपाल का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक है और यह प्रदेश के सबसे खराब पांच जिलों में शुमार हो गया है।
सीमांकन (जमीन की नपाई) के मामले में भोपाल का प्रदर्शन पूरे राज्य में सबसे निचले पायदान पर है, जिसके चलते लोगों को जमीन की खरीद-बिक्री, बैंक से लोन लेने और पारिवारिक विवाद सुलझाने में महीनों लग रहे हैं।
आंकड़ों में भोपाल का प्रदर्शन
राजस्व मामलों के निपटारे में राजधानी के हालात चिंताजनक हैं और तय समय सीमा बीत जाने के बाद भी सैंकड़ों फाइलें लंबित हैं।
अविवादित सीमांकन के लिए अधिकतम 45 दिन की समय सीमा तय है, लेकिन भोपाल में 499 मामले 45 दिन से ज्यादा समय से लंबित हैं। इस काम में भोपाल पूरे प्रदेश में सबसे खराब (नंबर 1) स्थिति में है।
अविवादित नामांतरण के लिए 30 और विवादित के लिए 45 दिन का समय तय है, इसके बावजूद 91 मामले 180 दिनों (6 महीने) से ज्यादा वक्त से लंबित हैं। नामांतरण में खराब प्रदर्शन के मामले में जबलपुर, रीवा, धार और टीकमगढ़ के बाद भोपाल का ही नंबर है।
अविवादित बंटवारे के लिए अधिकतम 45 दिन का समय मिलता है, लेकिन 103 मामले 90 दिन से अधिक समय से लंबित हैं। प्रदेश के 55 जिलों की सूची में भोपाल इस मामले में 52वें स्थान पर खिसक गया है।
लंबित मामलों के प्रमुख कारण
राजस्व न्यायालयों में लंबित मामलों की संख्या बढ़ने के पीछे कई मुख्य कारण सामने आए हैं।
तहसीलदार वीआईपी ड्यूटी और अन्य अतिरिक्त कामों से मुक्त किए जाने के बावजूद, अपनी कोर्ट में पूरा समय नहीं दे रहे हैं।
जमीनों के कागजी (मूल) रिकॉर्ड और मौके की वास्तविक स्थिति में काफी भारी अंतर पाया जा रहा है।
अधिकारियों ने मौके पर जाए बिना ही दफ्तर से बंदोबस्त का काम कर दिया, जिसके कारण खसरों की री-नंबरिंग हो गई और अब विवाद बढ़ रहे हैं।
सीएम हेल्पलाइन में राजस्व विभाग
आम जनता की शिकायतों के निपटारे (सीएम हेल्पलाइन) में भी राजस्व विभाग की हालत सबसे खराब है।
100 दिन से ज्यादा समय से लंबित शिकायतों के मामले में राजस्व विभाग 30,403 लंबित मामलों के साथ पहले नंबर पर है। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग (20,455), गृह विभाग (15,773) और नगरीय विकास विभाग (5,366) का नंबर आता है।
आम जनता की परेशानी
राजस्व के काम अटकने से आम लोग खासे परेशान हैं।
उदाहरण के तौर पर ग्राम गुनगा के किसान नक्शा दुरुस्ती और कब्जे के आधार पर बंटाकन के लिए साल भर से परेशान हैं।
खजूरी कलां निवासी नामित त्रिवेदी के पड़ोसी ने सड़क पर कब्जा कर रास्ता बंद कर दिया है, लेकिन लंबे समय से उनका सीमांकन लंबित है।
नीलबड़ के भरत सोनी की शिकायत है कि रजिस्ट्री के बाद भी उनका नामांतरण नहीं हुआ और दूसरे पक्ष ने उनके प्लॉट पर कब्जा कर लिया।
कलेक्टर का आश्वासन
इस पूरे मामले पर भोपाल कलेक्टर प्रियांक मिश्रा का कहना है कि पिछले कुछ समय में लंबित केसों की संख्या में कमी आई है और धीरे-धीरे यह और कम हो जाएगी।
उन्होंने बताया कि सभी एडीएम को केसों की बारीकी से निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैं और तहसील कोर्ट में केसों की रेंडम जांच भी कराई जाएगी ताकि सही स्थिति का आकलन किया जा सके।
इसके अलावा जनसुनवाई में आने वाले केसों का भी लगातार अपडेट लिया जा रहा है।

