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2026-08-14

बदनावर फोरलेन पर छह मौतों के बाद सुरक्षा व्यवस्था की जांच शुरू

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, बदनावर।

बदनावर फोरलेन पर महाकाल दर्शन कर लौट रहे छह लोगों की मौत के भीषण हादसे के बाद, आखिरकार इस मार्ग की सुरक्षा व्यवस्था जांच के दायरे में आ गई है।
हादसे के अगले दिन सोमवार को धार से सहायक क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी (एआरटीओ) ह्रदयेश यादव के नेतृत्व में एक टीम पंचकवासा पहुंची। टीम ने घटनास्थल से लेकर आसपास के मार्ग का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान वाहन चालकों के लिए दिशा भ्रम वाले स्थानों को चिह्नित किया गया तथा संकेतक, सावधानी बोर्ड और आवश्यक सुरक्षा इंतजाम करने के निर्देश दिए गए।
अधिकारियों ने यह स्वीकार किया कि दुर्घटनाओं को रोकने के लिए केवल वाहन चालकों पर कार्रवाई करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि सड़क पर ऐसी व्यवस्था भी आवश्यक है जिससे गलत दिशा में जाने की स्थिति ही न बने।
इस निरीक्षण के दौरान एसडीएम प्रियंका मिमरोट, एसडीओपी अरविंदसिंह तोमर, तहसीलदार सुरेश नागर और टीआइ अमितसिंह कुशवाह भी उपस्थित थे।
दरअसल, रविवार को यह हादसा उस समय हुआ जब जामनगर से मशीनरी लेकर बदनावर के ग्राम बोराली स्थित फैक्ट्री जा रहा एक ट्राला अपने निर्धारित टर्न से आगे निकल गया था। चालक को अपनी गलती का अहसास तब हुआ जब वह बड़नगर की ओर जा चुका था।
वापस लौटने के लिए ट्राला गलत दिशा में पंचकवासा की ओर दौड़ा और सामने से आ रही एक कार से उसकी टक्कर हो गई। इस हादसे में छह लोगों की मौत हो गई थी।
पुलिस ने ट्राला चालक के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया है। हालांकि, अब सवाल केवल चालक पर कार्रवाई का नहीं है, बल्कि यह भी है कि जिस फोरलेन पर गलत दिशा में वाहन चलाना एक गंभीर समस्या बन चुका है, वहां हादसों को रोकने के लिए जिम्मेदार एजेंसियां स्थायी व्यवस्था कब करेंगी।
छह शवों के बीच प्रशासन देर रात 11 बजे तक घटनास्थल पर डटा रहा। देर शाम मृतकों के परिजन गुजरात से बदनावर सिविल अस्पताल पहुंचे, जिससे पूरा परिसर शोक में डूब गया।
प्रशासन ने रात में ही पोस्टमार्टम की व्यवस्था कराई। इसके बाद, सभी शवों को एंबुलेंस से रात 11 बजे तक गुजरात के लिए रवाना कर दिया गया।
कलेक्टर राजीव रंजन मीना और एसपी सचिन शर्मा के निर्देश पर, परिजनों को मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए भटकना न पड़े, इसके लिए सभी मृतकों के ऑनलाइन मृत्यु प्रमाण पत्र रात में ही तैयार कर उन्हें सौंप दिए गए।
उज्जैन-बदनावर राष्ट्रीय राजमार्ग एनएच-752डी पर बदनावर के नागेश्वर धाम के पास सड़क की बनावट वाहन चालकों के लिए भ्रम की स्थिति पैदा करती है। ओवरब्रिज के दोनों ओर सर्विस रोड हैं।
करीब दो किलोमीटर तक टू-लेन मार्ग के बाद फोरलेन शुरू होता है। गुजरात की ओर से आने वाले कई वाहन मुख्य फोरलेन के बजाय सर्विस रोड से नगर में पहुंच जाते हैं।
उज्जैन, रतलाम या इंदौर की ओर जाने वाले चालकों को जब तक सही रास्ते का पता चलता है, तब तक वे बदनावर की गलियों में पहुंच चुके होते हैं। इसके बाद मुख्य मार्ग पर लौटने के लिए कई चालक गलत दिशा का सहारा लेते हैं।
ग्राम बामनसुता में गलत दिशा में चलने वाले वाहनों की समस्या को लेकर ग्रामीण पहले भी आंदोलन कर चुके हैं, लेकिन कोई स्थायी समाधान नहीं हुआ है। पंचकवासा-बदनावर मार्ग भी हादसों के लिहाज से संवेदनशील है।
लोगों का कहना है कि गलती चालक की थी तो कार्रवाई की गई, लेकिन यदि रास्ता ही भ्रमित कर रहा है तो फिर जिम्मेदारी किसकी है। अब केवल चालान नहीं, बल्कि स्थायी इंतजाम आवश्यक हैं।
नागेश्वर धाम, बामनसुता और पंचकवासा का तकनीकी सर्वे, स्पष्ट दिशा-सूचक बोर्ड, रोड मार्किंग, रिफ्लेक्टर, रोशनी, डिवाइडर और सीसीटीवी लगाए जाना जरूरी हैं।
छह मौतों के बाद संकेतक लगाने के जो निर्देश दिए गए हैं, वे अब सड़क पर दिखने चाहिए, ताकि अगला हादसा रोकने के लिए फिर से जिंदगियों की कीमत न चुकानी पड़े।

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