बुलंद सोच, भोपाल।

भोपाल में आवासीय भवनों के व्यावसायिक उपयोग को लेकर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद नगर निगम ने सर्वे शुरू कर दिया है। नगर निगम 15 सितंबर तक ऐसे मकानों की पहचान करेगा, जो आवासीय हैं लेकिन उनका उपयोग कारोबार के लिए हो रहा है। शुरुआती आकलन में ऐसी लगभग 1 लाख संपत्तियां होने का अनुमान है। सुप्रीम कोर्ट ने 5 अगस्त को इस मामले में कार्रवाई जारी रखने के निर्देश दिए थे। इसके साथ ही, न्यायालय ने मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय से दुकान संचालकों को मिले सभी अंतरिम राहत आदेश (स्टे) निरस्त कर दिए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसके निर्देशों के समानांतर कोई दूसरी जांच प्रक्रिया या समिति कार्रवाई में बाधा नहीं बन सकती। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने राज्य सरकार की ओर से पेश पक्ष पर नाराजगी व्यक्त की और कहा कि अवैध निर्माण तथा रिहाइशी भवनों के व्यावसायिक उपयोग के मामलों में कानून का सख्ती से पालन कराया जाए। सुप्रीम कोर्ट के इन निर्देशों के बाद नगर निगम ने शहर में व्यापक सर्वे और कार्रवाई की तैयारी तेज कर दी है। शनिवार से ही टीमें क्षेत्र में पहुंचने लगी हैं। नगर निगम अपनी रिपोर्ट 15 सितंबर को कोर्ट में प्रस्तुत करेगा। यदि किसी घर से ब्यूटी पार्लर, किराना दुकान, कोचिंग सेंटर, बुटीक, क्लिनिक या कोई अन्य व्यावसायिक गतिविधि संचालित की जा रही है, तो उस पर कार्रवाई हो सकती है। जांच में नियमों का उल्लंघन मिलने पर नोटिस जारी होंगे और कार्रवाई नहीं करने वालों की संपत्ति सील की जा सकती है। भोपाल में करीब 1 लाख ऐसी संपत्तियां हैं जहां रिहाइशी मकानों का व्यावसायिक उपयोग हो रहा है, जिन पर ताला लगने का खतरा है। सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार से यह भी पूछा था कि “क्या राज्य सरकार कोर्ट के आदेशों के साथ खेल रही है?” यह सवाल भोपाल में रिहाइशी इलाकों में चल रहे कारोबार पर सीलिंग की कार्रवाई रोकने के संदर्भ में था।
रहवासियों की पीड़ा
सुप्रीम कोर्ट में भोपाल के जिस इलाके को लेकर आदेश दिया गया है, वहां के रहवासियों ने अपनी परेशानी बताई। अरेरा कॉलोनी ई-4 के रहवासी लवनीश भाटी ने बताया कि वे साल 1998 से अपने परिवार के साथ यहां रह रहे हैं। उन्होंने कहा कि पिछले 8-10 सालों में कॉलोनी के अंदर बड़े निर्माण हो गए हैं, यहां मॉल खुल गए और तीन से चार मंजिला इमारतें बन गईं। शराब के बार की तरह चाय बार भी खुल गए हैं, जहां दोपहर 2 बजे से लोगों का जमावड़ा शुरू हो जाता है और रात 12 बजे तक रहता है। खुलेआम स्मोकिंग भी होती है, जिससे आसपास रहने वाले लोगों की सेहत पर असर पड़ रहा है। लवनीश भाटी का कहना है कि पहले दुकानें केवल मुख्य सड़क तक थीं, लेकिन अब कॉलोनी के अंदर तक दुकानें खुल गई हैं। सुबह से रात तक ऐसा लगता है कि यह कोई आवासीय क्षेत्र नहीं, बल्कि कोई हाईवे हो। गाड़ियों का शोर इतना बढ़ गया है कि रहना मुश्किल हो गया है। इन गतिविधियों की वजह से त्योहार भी नहीं मना पाते हैं; जैसे दीवाली पर पटाखे कहां फोड़ें, यह सोचना पड़ता है। उन्होंने बताया कि कई लोग इन समस्याओं के कारण अपने घरों को खाली करके चले गए हैं। पार्किंग की समस्या भी विकट है; उनके घर के सामने ही गाड़ियां खड़ी कर दी जाती हैं, जिससे कई बार घर का गेट खोलना भी मुश्किल हो जाता है। लवनीश ने बताया कि वे खुद अपनी कार कई बार 20-30 मीटर दूर खड़ी करते हैं। 10 नंबर मार्केट में प्रवेश करते ही ट्रैफिक जाम से सामना होने की बात भी सामने आई।
याचिकाकर्ता ने बताया कारण
आवासीय भवनों में व्यावसायिक गतिविधियां होने और अवैध निर्माण को लेकर रहवासी विवेक त्रिपाठी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई है। इसी याचिका पर कोर्ट ने सरकार और नगर निगम को फटकार लगाई है। विवेक त्रिपाठी ने बताया कि उन्होंने अरेरा कॉलोनी में प्लॉट इसलिए लिया था, ताकि परिवार शांति और सुकून से रह सके। उन्होंने कहा कि साल 2015 तक तो सब ठीक रहा, लेकिन इसके बाद भू-माफिया की नजर पड़ गई। नक्शा घर बनाने के लिए पास होता था, लेकिन मॉल बन गए और वहां व्यावसायिक गतिविधियां होने लगीं। उन्होंने आरोप लगाया कि नगर निगम बिना अनुमति के हर निर्माण को तुरंत तोड़ देता है, लेकिन इस मामले में उसने आंखें मूंदे रखीं और कोई कार्रवाई नहीं की, जिसका खामियाजा सीधे तौर पर रहवासियों को भुगतना पड़ रहा है। विवेक त्रिपाठी ने बताया कि यहां मंदिर के सामने ही शराब की दुकान खुल गई, लेकिन उसे बंद नहीं किया गया। इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में जाना बेहतर समझा, क्योंकि यह सीधे तौर पर रहवासियों के मौलिक अधिकारों का हनन है। उन्होंने कहा कि कोर्ट ने भी इसे माना है और इसके बाद सख्त कार्रवाई करने को कहा है। विवेक त्रिपाठी ने क्षेत्र का नक्शा दिखाते हुए कहा कि इस नक्शे में बिट्ठन मार्केट में व्यावसायिक गतिविधि होना बताई गई है और 10 नंबर मार्केट भी दिख रहा है, लेकिन यहां तो कॉलोनी में ही दुकानें और मॉल खुल गए हैं।
व्यापारियों की मांग
इस मामले में भोपाल चैंबर ऑफ कॉमर्स व्यापारियों के समर्थन में सामने आया है। चैंबर सरकार से जल्द ही मास्टर प्लान लागू करने या फिर मिक्स लैंड यूज व्यवस्था की मांग कर रहा है। चैंबर के सचिव अजय देवनानी ने बताया कि भोपाल के प्रमुख मार्गों और मुख्य सड़कों पर वर्षों से चल रही व्यावसायिक गतिविधियों को देखते हुए जनहित एवं शहरी जरूरतों के लिए मिक्स लैंड यूज नीति लागू की जा सकती है। भोपाल चैंबर ऑफ कॉमर्स भी व्यापारियों के समर्थन में है और मिक्स लैंड यूज व्यवस्था की मांग कर रहा है। व्यापारियों का कहना है कि इस मामले से 5 लाख लोगों पर असर पड़ेगा।

