बुलंद सोच, इंदौर।
शनिवार को दिलीप नगर में स्पीड ब्रेकर पार करते समय दो कारों में टक्कर हो गई। इस दुर्घटना में फ्रंट सीट के सामने खड़ा एक चार साल का बच्चा कार के सामने के कांच से बाहर जा गिरा और उसकी मौत हो गई।
शहर की सड़कों पर अक्सर ऐसी स्थितियाँ देखी जाती हैं जहाँ लोग महंगी और लग्जरी कारों में बच्चों की सुरक्षा के नियमों का पालन नहीं करते। छोटे बच्चों को बिना सीट बेल्ट के बैठाया जाता है और सनरूफ वाली कारों में बच्चे खड़े होकर यात्रा करते हैं। ऐसी लापरवाही से होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने और मासूमों की जान बचाने के लिए, विशेषज्ञों से कार सुरक्षा के फीचर्स और आदतों पर चर्चा की गई है, जो यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करती हैं।
बच्चों की सुरक्षा के लिए दिशा-निर्देश
सुरक्षा मानकों के अनुसार, 135 सेंटीमीटर से कम ऊंचाई या ढाई साल से कम उम्र वाले बच्चों को कार की पिछली सीट पर ही बैठाना चाहिए।
पांच साल के बच्चे का शरीर और लंबाई सामान्य वयस्क सीट बेल्ट के लिए छोटी होती है। यदि साधारण सीट बेल्ट सीधे पांच साल के बच्चे को पहनाई जाती है, तो वह बेल्ट उनके गले या पेट पर आ सकती है। यह किसी भी ब्रेक या दुर्घटना के समय खतरनाक साबित हो सकता है। इसलिए, पांच साल के बच्चे के लिए हाई-बैक बूस्टर सीट या फारवर्ड-फेसिंग चाइल्ड कार सीट का उपयोग करना चाहिए।
यदि बच्चा बूस्टर सीट पर बैठा है और कार की 3-पॉइंट सीट बेल्ट का उपयोग कर रहा है, तो बेल्ट की स्थिति सही होनी चाहिए। शोल्डर बेल्ट (ऊपरी बेल्ट) बच्चे की छाती और कंधे के बीच से गुजरनी चाहिए, गले या चेहरे पर नहीं। लैप बेल्ट (निचली बेल्ट) बच्चे की जांघों या कमर के निचले हिस्से पर कसकर लगनी चाहिए, पेट पर नहीं।
जोखिम बढ़ाने वाली स्थितियाँ
विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चों को गोद में बैठाकर यात्रा करना सुरक्षित नहीं है, क्योंकि दुर्घटना या अचानक ब्रेक लगने पर बच्चे को हाथों में थामना असंभव हो जाता है।
बच्चे को कभी भी सक्रिय एयरबैग वाली आगे की सीट पर नहीं बैठाना चाहिए।
कार में चाइल्ड लॉक का उपयोग करना चाहिए, ताकि बच्चे अचानक कार के दरवाजों को न खोल सकें।
बच्चों की जिद के कारण उन्हें गोद में बैठाकर कार नहीं चलानी चाहिए।
कार की फ्रंट सीट पर बच्चे को खड़ा नहीं करना चाहिए।
गर्भवती महिलाओं की सुरक्षा
गर्भवती महिला की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कार के पिछले कांच पर ‘बेबी ऑन बोर्ड’ का मैसेज या संकेत देना चाहिए, ताकि पीछे आ रही कार अपनी गति नियंत्रित रख सके।
पिछली सीट पर बैठे यात्रियों की सुरक्षा
कार में पिछली सीट पर बैठकर सफर करने वाले यात्रियों को भी सीट बेल्ट लगाना अनिवार्य है, क्योंकि दुर्घटना के समय झटके से वे भी चोटिल हो सकते हैं।
अब कई कारों में पिछली सीट पर बैठे यात्रियों की सुरक्षा के लिए भी एयरबैग उपलब्ध हैं।
बच्चों की सुरक्षा सीटों के प्रकार
बच्चों की सुरक्षा सीटों के प्रकार इस प्रकार हैं: 0 से 3 वर्ष के लिए रियर फेसिंग सीट, 1 से 7 वर्ष के लिए फारवर्ड फेसिंग सीट, 4 से 12 वर्ष के लिए बूस्टर सीट और 8 से 13 वर्ष के बच्चों के लिए सीट बेल्ट का उपयोग आवश्यक है।
कारों में बच्चों की सुरक्षा के नए फीचर
एसजीएसआईटीएस के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के सहायक प्रोफेसर विनोद पाराशर ने बताया कि अब नई कारों में बच्चों के लिए आइसोफिक्स (ISOFIX) फीचर आ रहा है। जिन कारों में यह सुविधा नहीं है, उनमें बच्चों की सुरक्षा के लिए रियर फेसिंग सीट, फारवर्ड फेसिंग सीट और बूस्टर सीट का उपयोग किया जाना चाहिए। इन सीटों पर बैठने से ही दुर्घटना या आपात स्थिति में बच्चे की सुरक्षा सुनिश्चित होती है।
प्रोफेसर विनोद पाराशर ने यह भी बताया कि बच्चे को गोद में बैठाकर सफर करना सुरक्षित नहीं है; छोटे बच्चों को पिछली सीट पर और दो लोगों के बीच में बैठाना चाहिए। कार में पावर विंडो कंट्रोल और चाइल्ड लॉक भी बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं। अब कारों में गियर लीवर इंटरलॉक भी आ रहा है, ताकि बच्चे गियर के साथ छेड़छाड़ न कर सकें, जो दुर्घटना का कारण बन सकता है। इसके अतिरिक्त, कारों में ट्रंक रिलीज सिस्टम भी उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि नई कारों में सुरक्षा के नए फीचर आ रहे हैं, लेकिन पुरानी कारों में जहाँ ये फीचर नहीं हैं, वहाँ कार चालक को बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए।
मोटर वाहन अधिनियम के प्रावधान
एडिशनल डीसीपी ट्रैफिक संतोष कौल ने बताया कि भारत में मोटर वाहन अधिनियम और सुरक्षा नियमों के अनुसार, कार में यात्रा करते समय सीट बेल्ट पहनना अनिवार्य है। वाहन अधिनियम की धारा 194 बी (2) के तहत, 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चे को कार में बिना सीट बेल्ट के बैठाकर ले जाना गैर-कानूनी है। यदि बच्चा सीट बेल्ट नहीं लगाता या सुरक्षित कार सीट (चाइल्ड सेफ्टी सीट) में नहीं बैठा है, तो एक हजार रुपये के चालान का प्रावधान है।
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