बुलंद सोच, झाबुआ।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शुक्रवार को झाबुआ जिले के थांदला में जनजातीय समाज के प्रति अपने आत्मीय जुड़ाव का अनूठा उदाहरण प्रस्तुत किया। वे प्रदेश स्तरीय स्व-सहायता समूहों के क्षमतावर्धन एवं ऋण वितरण कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री जनजातीय परिवार के सदस्य बसंत सिंह बामनिया के घर पहुंचे और उनके परिवार के साथ आत्मीय समय बिताया।
इस दौरान उन्होंने परिवार के बीच पूरी सहजता से बैठकर संवाद किया और जनजातीय संस्कृति को करीब से जाना।
मुख्यमंत्री ने किसी विशेष व्यवस्था के बजाय पारंपरिक जनजातीय जीवनशैली को अपनाते हुए गोदड़ी पर बैठकर पत्तल में भोजन किया।
मिट्टी और गारे से बने घर के आंगन में परिवार की महिलाओं द्वारा प्रेमपूर्वक परोसे गए पारंपरिक व्यंजनों का उन्होंने स्वाद लिया।
उन्होंने विशेष रूप से उड़द की दाल और स्थानीय व्यंजन पानिया की सराहना की, साथ ही परिवार की आत्मीय मेहमाननवाजी की प्रशंसा भी की।
रक्षाबंधन से पहले सावन माह की पावन बेला में जनजातीय समुदाय की बहनों ने मुख्यमंत्री की कलाई पर राखी बांधी और उनके सुखद एवं मंगलमय जीवन की कामना की।
मुख्यमंत्री ने भी बहनों को शुभकामनाएं दीं और महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा तथा सशक्तिकरण के प्रति प्रदेश सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।
मुख्यमंत्री ने परिवार के बच्चों से भी आत्मीय बातचीत की और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। इस दौरान उन्होंने नन्हे शिवांश को विशेष स्नेह-दुलार दिया।
भोजन के बाद उन्होंने परिवार से आजीविका, शिक्षा, शासन की योजनाओं और जनजातीय समाज की परंपराओं पर चर्चा की।
बसंत सिंह बामनिया ने मुख्यमंत्री को बताया कि उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्का मकान मिल चुका है।
हालांकि, परिवार आज भी अपने पुराने मिट्टी-गारे के घर में रहना पसंद करता है।
उनका कहना है कि यह घर उनकी पीढ़ियों की यादों, परंपराओं और भावनात्मक जुड़ाव का प्रतीक है, जहां उन्हें आज भी आत्मीय सुकून मिलता है।

