बुलंद सोच, इंदौर।
दोस्ती सिर्फ साथ घूमने-फिरने या खुशियां बांटने का रिश्ता नहीं होती, बल्कि मुश्किल वक्त में बिना कहे साथ खड़े होने का नाम भी है। इंदौर शहर में ऐसे कई दोस्त हैं, जिन्होंने सालों पहले शुरू हुई अपनी दोस्ती को आज भी उसी भरोसे और अपनेपन के साथ निभाया है। इन दोस्तों ने जरूरत के समय दोस्ती को सिर्फ रिश्ते तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे एक जिम्मेदारी की तरह निभाया है।
वर्ष 2020 में कोरोना महामारी के कारण आदित्य शर्मा का डिजिटल मार्केटिंग स्टार्टअप लगातार घाटे में जा रहा था। लॉकडाउन लगने के बाद ज्यादातर क्लाइंट्स ने काम बंद कर दिया, जिससे कुछ महीनों में कंपनी बंद होने की स्थिति में पहुंच गई और कर्मचारियों को वेतन देना भी मुश्किल हो गया। इसी दौरान उनके बचपन के दोस्त राहुल वर्मा ने मदद का हाथ बढ़ाया। राहुल ने एक निजी कंपनी में नौकरी करते हुए अपने पीएफ खाते से राशि निकालकर आदित्य को दी। धीरे-धीरे हालात सुधरे, नए क्लाइंट बने और आदित्य ने राहुल को पैसा वापस लौटाया। आज आदित्य का स्टार्टअप पहले से बेहतर स्थिति में है और कई लोगों को रोजगार भी दे रहा है।
मनीष ठाकुर और संदीप चौहान इंजीनियरिंग कॉलेज में साथ पढ़ते थे। पढ़ाई के तीसरे वर्ष में मनीष के परिवार की आर्थिक स्थिति अचानक खराब हो गई, जिससे कॉलेज की फीस जमा करना मुश्किल हो गया और मनीष ने पढ़ाई छोड़ने का मन बना लिया था। इस स्थिति में संदीप ने अपने परिवार की मदद से मनीष की फीस भरने में सहायता की। कॉलेज प्लेसमेंट में दोनों का चयन अलग-अलग कंपनियों में हुआ। फिलहाल मनीष बेंगलुरु की एक आईटी कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में कार्यरत हैं, जबकि संदीप भी एक निजी कंपनी में नौकरी कर रहे हैं।
निखिल जैन और विवेक मोदी कॉलेज के दिनों से दोस्त हैं। पढ़ाई पूरी करने के बाद दोनों ने अलग-अलग कंपनियों में नौकरी शुरू की। कुछ साल काम करने के बाद उन्हें लगा कि अपने अनुभव का उपयोग खुद का काम शुरू करने में किया जा सकता है। दोनों ने कई महीनों तक योजना बनाई और फिर नौकरी छोड़कर साथ में स्टार्टअप शुरू किया। शुरुआती दिनों में उन्हें कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन दोनों ने एक-दूसरे का साथ नहीं छोड़ा और जिम्मेदारियां भी अपनी-अपनी क्षमता के अनुसार बांट लीं। आज उनके स्टार्टअप को दस साल पूरे हो चुके हैं, कंपनी में कई कर्मचारी काम कर रहे हैं और वे अलग-अलग शहरों के क्लाइंट के साथ भी कार्य कर रहे हैं।
नेहा यादव और पूजा सोनी ने साथ में बीएसडब्ल्यू किया। इस दौरान दोनों सामाजिक गतिविधियों में हिस्सा लेती थीं और उसी समय उन्होंने तय किया था कि पढ़ाई पूरी होने के बाद समाज के लिए कुछ ऐसा काम करें, जिससे जरूरतमंद लोगों तक मदद पहुंच सके। कॉलेज खत्म होने के बाद दोनों ने मिलकर एक एनजीओ शुरू किया। शुरुआत में संसाधन कम थे और लोगों तक अपनी बात पहुंचाना भी आसान नहीं था। इसके बावजूद दोनों ने हार नहीं मानी। उन्होंने महिलाओं के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम, बच्चों की शिक्षा से जुड़े अभियान और जरूरतमंद परिवारों के लिए सहायता गतिविधियां शुरू कीं। धीरे-धीरे लोगों का सहयोग मिलने लगा और संस्था का दायरा भी बढ़ता गया। पिछले सात वर्षों से दोनों साथ मिलकर कार्य कर रही हैं।

