बुलंद सोच, भोपाल।
मध्य प्रदेश में अगले साल ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट होने वाली है। निवेश को सुगम बनाने के लिए सड़कों को औद्योगिक गलियारे के रूप में विकसित करने की कार्ययोजना तैयार की गई है। इस पहल का उद्देश्य लॉजिस्टिक्स लागत को कम करना, कनेक्टिविटी में सुधार करना और निवेशकों के लिए व्यापारिक प्रक्रियाओं को अधिक सुविधाजनक एवं आकर्षक बनाना है। इससे आमजन को भी आवागमन में सुविधा मिलेगी।
इसी सोच के साथ प्रदेश में 13 नए मार्ग विकसित किए जा रहे हैं। इन चिह्नित स्थानों पर उद्योगों की स्थापना के लिए जगह सुरक्षित रहेगी। भारत सरकार पहले ही राष्ट्रीय राजमार्गों के आसपास औद्योगिक केंद्र विकसित करने की पहल कर चुकी है, और प्रदेश सरकार इसे आगे बढ़ा रही है।
कार्ययोजना के अनुसार, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) चार और मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम (एमपीआरडीसी) नौ मार्ग बनाएगा। इन नए रोड नेटवर्क से शहरों के बीच कनेक्टिविटी बढ़ेगी, यात्रा में कम समय लगेगा और औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।
अधिकारियों के अनुसार, एनएचएआई ग्वालियर-नागपुर, लखनादौन-रायपुर, इंदौर-भोपाल और जबलपुर-भोपाल के बीच नए रोड नेटवर्क बिछाएगा।
इसी तरह, एमपीआरडीसी ने अपने सभी नौ नई सड़कों के रूट तय किए हैं। इनमें सागर-दमोह-कटनी, आशापुर-हरदा-नर्मदापुरम-पिपरिया-नरसिंहपुर-जबलपुर, सागर-सतना (प्रस्तावित ग्रीनफील्ड), सिवनी-बालाघाट, खलघाट-मनावर, इंदौर-देपालपुर, दिनारा-दतिया, बुधनी-इटारसी और भोपाल-मंदसौर के बीच नई सड़कें बनाई जाएंगी। ये बिल्कुल नए रूट हैं, और इनमें से कुछ सड़कों की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार कर कार्य शुरू भी कर दिया गया है।
मध्य प्रदेश में वर्तमान में लगभग 4.2 लाख किलोमीटर का रोड नेटवर्क है। लोक निर्माण विभाग के अंतर्गत कुल 77,268 किलोमीटर सड़कों का नेटवर्क है। यह नेटवर्क प्रदेश के प्रमुख शहरों को जोड़ने के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मुख्यधारा में लाता है।
एनएचएआई की नई सड़क परियोजनाएं
ग्वालियर-नागपुर परियोजना की लंबाई 600 किलोमीटर है और इसकी अनुमानित लागत 20,000 करोड़ रुपये है। लखनादौन-रायपुर परियोजना 200 किलोमीटर लंबी है, जिसकी अनुमानित लागत 9,600 करोड़ रुपये है। इंदौर-भोपाल परियोजना की लंबाई 160 किलोमीटर है और इसकी अनुमानित लागत 9,716 करोड़ रुपये है। जबलपुर-भोपाल परियोजना 255 किलोमीटर लंबी है, जिसकी अनुमानित लागत 13,400 करोड़ रुपये है।
एमपीआरडीसी की नई सड़क परियोजनाएं
सागर-दमोह-कटनी परियोजना 184 किलोमीटर लंबी है। आशापुर-हरदा-नर्मदापुरम-पिपरिया-नरसिंहपुर-जबलपुर परियोजना की लंबाई 375 किलोमीटर है। सागर-सतना (प्रस्तावित ग्रीनफील्ड) परियोजना की लंबाई 235 किलोमीटर है। सिवनी-बालाघाट परियोजना 87 किलोमीटर लंबी है। खलघाट-मनावर परियोजना की लंबाई 48 किलोमीटर है। इंदौर-देपालपुर परियोजना 32 किलोमीटर लंबी है। दिनारा-दतिया परियोजना की लंबाई 32 किलोमीटर है। बुधनी-इटारसी परियोजना 36 किलोमीटर लंबी है। भोपाल-मंदसौर परियोजना की लंबाई 320 किलोमीटर है।
देवास-भोपाल कॉरिडोर ने पूरे गलियारे पर चौबीसों घंटे सक्रिय इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम विकसित किया है।

