बुलंद सोच, दिल्ली।
मानसून सत्र में विपक्षी दल दिल्ली में छात्रों पर हुए बल प्रयोग के मामले में सरकार को घेरने का प्रयास करेंगे। विपक्ष गृह मंत्री अमित शाह का इस्तीफा भी मांगेगा। विपक्षी दलों का कहना है कि दिल्ली पुलिस ने गृह मंत्री के निर्देश पर छात्रों और युवाओं को निशाना बनाया, ऐसे में शाह को माफी मांगनी चाहिए। आज का सत्र हंगामेदार रहने के आसार हैं, क्योंकि सरकार की तैयारियां और विपक्षी खेमे में घेराव की रणनीति बन रही है। लोकसभा के साथ-साथ राज्यसभा में भी विपक्षी दल सरकार से जवाबदेही के मुद्दे पर तीखे सवाल करेंगे। सोमवार को सदन शुरू होने से पहले इंडिया ब्लॉक के नेता राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे के कार्यालय में बैठक कर रणनीति तय करेंगे। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी खासतौर पर एकजुट होकर सरकार पर दबाव बनाने के पक्ष में हैं। कांग्रेस नेता राहुल गांधी लगातार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से माफी की मांग कर रहे हैं। राहुल के तेवर से जाहिर है कि विपक्ष सिर्फ शिक्षा मंत्री के इस्तीफे से संतुष्ट नहीं होगा। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के सांसद जॉन ब्रिटास ने कहा है कि वे छात्रों पर पुलिसिया कार्रवाई के विरोध में गृह मंत्री शाह का इस्तीफा मांगेंगे। वे उच्च शिक्षा सचिव के रूप में नरेश पाल गंगवार की नियुक्ति का मामला भी उठाएंगे। राज्यसभा में तृणमूल कांग्रेस की उप-नेता सागरिक घोष ने नियम 267 के तहत चर्चा का नोटिस देकर प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग के मुद्दे पर तुरंत चर्चा कराने की मांग की है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने संसद के दूसरे सप्ताह से ठीक पहले गृह मंत्री शाह को पत्र लिखा है। उन्होंने शांतिपूर्ण ढंग से विरोध कर रहे छात्रों पर पुलिस के लाठीचार्ज, आंसू गैस के गोले दागने और पैलेट गन के इस्तेमाल पर जवाबदेही की मांग की है। राहुल गांधी ने अपने पत्र में लिखा है कि शांतिपूर्ण विरोध लोकतंत्र का अहम हिस्सा है और सरकार की जिम्मेदारी है कि वह प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा करे तथा बातचीत के जरिये उनकी शिकायतों का समाधान करे। राहुल गांधी ने शाह से पूछा है कि क्या उन्होंने युवाओं के खिलाफ पैलेट गन समेत जानलेवा बल प्रयोग को मंजूरी दी थी। उन्होंने यह भी कहा कि छात्राओं से भी दुर्व्यवहार किया गया। राहुल गांधी ने कहा कि देश इसका जवाब मांग रहा है। उन्होंने छात्र साहिल लोचब का भी जिक्र किया, जिसे पैलेट गन के छर्रे लगे होने का दावा किया जा रहा है। विपक्ष श्रीराम मंदिर में चढ़ावा चोरी का मुद्दा भी उठाएगा, जिस पर वह सरकार को घेरेगा।
सरकार की पलटवार की तैयारी
सरकार ने विपक्ष पर पलटवार के लिए तैयारी कर ली है। विपक्ष पर हमलावर रहते हुए सरकार संसद सत्र में अपने रुके हुए एजेंडे को तेजी से आगे बढ़ाएगी। सरकार संसद में रुके हुए विधायी कार्य कराने की कोशिश करेगी। सरकार ने शिक्षा मंत्री का इस्तीफा दिलाकर विपक्ष के हाथ से एक बड़ा मुद्दा छीन लिया है। सरकार न केवल नकल विहीन परीक्षा कराने और दोषियों को कठोर सजा दिलाने का संदेश देगी, बल्कि विरोधियों पर युवाओं को बरगलाने का आरोप भी लगाएगी। प्रधानमंत्री की ओर से युवाओं के लिए उठाए गए कदमों का ऐलान और शिक्षा में सुधार अभियान को संसद में भी प्रभावी तरीके से सामने रखा जाएगा। वंदे मातरम संबंधी बिल पर भी विपक्ष को कठघरे में खड़ा किया जाएगा। इसके अलावा, परिसीमन बिल को फिर से लाने की कवायद भी शुरू हो सकती है।
पेपर लीक रोकने संबंधी विधेयक
सार्वजनिक परीक्षाओं में नकल और पेपर लीक रोकने के लिए सख्त कानून बनाने वाला विधेयक आज संसद में पेश किया जाएगा। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक-2026 लोकसभा में पेश करेंगे। इस विधेयक में पेपर लीक के आरोपियों को जल्द और सख्त सजा दिलाने के लिए सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने का प्रस्ताव है। सभी राज्यों के हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन करेंगे। विधेयक के अनुसार, पेपर लीक मामले में शिकायत दर्ज होने की तारीख से दो महीने में जांच पूरी करनी होगी। फास्ट ट्रैक कोर्ट के जज को तीन माह में केस का निपटारा कर फैसला सुनाना होगा। संशोधन कानून लागू होने के बाद सभी लंबित मामले स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट में स्थानांतरित किए जाएंगे, और इनका निपटारा भी तीन महीने में करना होगा। नए विधेयक में संगठित तरीके से अनुचित साधन पर सजा पांच साल से बढ़ाकर सात साल की गई है। संगठित अपराध पर जुर्माना राशि एक करोड़ से बढ़ाकर दस करोड़ रुपये किया गया है। गैर-संगठित अपराध पर सजा न्यूनतम तीन व अधिकतम पांच वर्ष से बढ़ाकर पांच और दस वर्ष कर दी गई है। गैर-संगठित अपराध पर जुर्माना राशि दस लाख से बढ़ाकर पचास लाख रुपये कर दी गई है। फास्ट ट्रैक अदालतों में रोजाना सुनवाई की जाएगी और आरोपपत्र दाखिल होने के तीन महीने के भीतर मुकदमे का निपटारा करना होगा। पेपर लीक मामले में राज्यों के अधिकारों के संबंध में, पुराने कानून की धारा 12 में प्रावधान था कि परीक्षा में अनुचित साधनों की जांच के लिए सीबीआई को केस सौंपा जाता था। अब राज्य सरकारें चाहें, तो जांच के लिए एसआईटी का गठन कर सकती हैं। यदि केंद्र ने एसआईटी गठित की है, तो राज्य सरकारों की एसआईटी के मुकाबले जांच वही करेगी।

