बुलंद सोच, नवी मुंबई।
मुंबई के कालबादेवी इलाके में रामवाड़ी स्थित ‘भवानी गोल्ड’ नामक फर्म सोने के आभूषणों के थोक व्यापार और मार्केटिंग का कार्य करती है। इस फर्म के मालिक शेरसिंह राजपूत हैं। विक्रमसिंह लाखसिंह पिछले आठ वर्षों से और हेमराज सुतार पिछले तीन वर्षों से यहां सेल्समैन के रूप में कार्यरत हैं। इन दोनों का कार्य सोने के नए-नए डिजाइनों के सैंपल लेकर महाराष्ट्र और कर्नाटक के विभिन्न शहरों में जाना, स्थानीय सुनारों को गहने दिखाकर ऑर्डर प्राप्त करना और सीधे बिक्री करना है।
यात्रा और चोरी की योजना
गत 12 जून को सुबह लगभग 6 बजे विक्रमसिंह और हेमराज लगभग दो किलो सोने के विभिन्न आभूषण एक काले रंग के बैग में रखकर मार्केटिंग के लिए निकले। इस बैग में अंगूठियां, मंगलसूत्र के पेंडेंट, लॉकेट, पूर्ण मंगलसूत्र, कान के टॉप्स और बालियों सहित कई प्रकार के गहने थे। सबसे पहले दोनों पुणे पहुंचे और वहां का कार्य निपटाकर उसी दिन सांगली चले गए, जहां उन्होंने रात बिताई। इसके पश्चात, 13 जून को सांगली, विटा और कराड में, तथा 14 जून को कराड और जत इलाके में मार्केटिंग का कार्य किया गया। 15 जून को वे कर्नाटक के अथणी और विजापुर पहुंचे। विजापुर में दोपहर के समय मार्केटिंग समाप्त करने के बाद दोनों ने मुंबई लौटने की तैयारी की। हेमराज ने रेड बस ऐप के माध्यम से डॉल्फिन टूर्स एंड ट्रैवल्स कंपनी की स्लीपर कोच बस में सीट नंबर 7 और 8 बुक कीं।
बस यात्रा और वारदात
उसी शाम लगभग 7:15 बजे दोनों विजापुर के जेबी गार्डन से मुंबई आने वाली बस में सवार हुए। उनके पास काले रंग के दो पिठ्ठू बैग थे, जिनमें से एक में सोने के गहने, बिल, कपड़े और निजी कागजात थे, जबकि दूसरे बैग में केवल कपड़े और अन्य सामान था। बस विजापुर से चलकर अथणी, मिरज और सांगली में सवारियां लेती हुई रात लगभग 11:30 बजे इस्लामपुर पेठ नाका पर एक होटल में भोजन के लिए रुकी। वहां दोनों भोजन करने नहीं उतरे, बल्कि पास खड़े एक यात्री से बैग का ध्यान रखने का अनुरोध कर वॉशरूम गए और तुरंत वापस लौट आए। रात 12:10 बजे बस वहां से आगे के लिए रवाना हुई। रात लगभग 1:45 बजे तक बस सातारा पहुंची, तब तक विक्रमसिंह और हेमराज दोनों जागे हुए थे। सातारा से निकलने के बाद हेमराज सो गया और कुछ ही देर में विक्रमसिंह को भी नींद आ गई। विक्रमसिंह ने गहनों वाला बैग अपने पैरों के पास वाली रैक और खिड़की के कांच के बीच सुरक्षित रखा था।
चोरी का खुलासा और पुलिस कार्रवाई
सुबह लगभग 5:30 बजे जब बस पुणे-मुंबई एक्सप्रेस हाईवे समाप्त होने के बाद नवी मुंबई के कलंबोली में मैकडोनाल्ड्स के सामने रुकी, तब ड्राइवर और क्लीनर ने यात्रियों को आवाज दी। आवाज सुनकर विक्रमसिंह और हेमराज की नींद खुली। उन्होंने तुरंत देखा तो रैक से गहनों वाला बैग गायब था, जबकि केवल कपड़ों वाला बैग वहीं पड़ा हुआ था। उस समय कलंबोली में उतरने वाले यात्री उतर रहे थे और बस आगे बढ़ने लगी थी। बैग गायब देखते ही दोनों ने तुरंत शोर मचाया और बस चालक को गाड़ी रोकने को कहा। ड्राइवर ने सड़क किनारे बस रोकी, जिसके बाद हेमराज ने तुरंत पुलिस कंट्रोल रूम को फोन करके घटना की जानकारी दी। सूचना मिलते ही नवी मुंबई की कामोठे पुलिस मौके पर पहुंची और बस को सीधे पुलिस स्टेशन ले गई। पुलिस ने सभी सवारियों की मौजूदगी में पूरी बस की बारीकी से तलाशी ली, लेकिन सोने के गहनों वाला बैग कहीं नहीं मिला। जांच में सामने आया कि सातारा से कलंबोली के बीच जब दोनों कर्मचारियों को नींद आ गई थी, उसी दौरान किसी अज्ञात चोर ने मौका पाकर गहनों वाला बैग चुरा लिया था। चोरों ने 2 करोड़ 63 लाख रुपये मूल्य के 2 किलो सोने के आभूषण चुराए थे।
पुलिस जांच और आरोपियों की पहचान
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पुलिस ने बस ड्राइवर से बस के शुरुआती स्थान के बारे में पूछताछ की। इसके बाद कई दिनों की मेहनत से बस के पूरे रूट के सीसीटीवी फुटेज की जांच की गई। इसी जांच में पुलिस ने पाया कि जिस बस में मुंबई के गोल्ड सेल्समैन बैठे थे, उस बस के पीछे कई किलोमीटर तक एक स्कॉर्पियो गाड़ी भी चल रही थी। बाद में एक स्टॉप पर स्कॉर्पियो से उतरकर कुछ लोग बस में चढ़ गए। पुलिस ने जब सीसीटीवी फुटेज से स्कॉर्पियो की नंबर प्लेट की जांच की, तो वह फर्जी निकली। हालांकि, पुलिस को स्कॉर्पियो गाड़ी का रंग पता चल गया। फिर उस रंग वाली स्कॉर्पियो की डिटेल्स कर्नाटक से नवी मुंबई के कलंबोली तक के तमाम टोल नाकों से निकाली गईं। इसी दौरान पता चला कि जब यह गाड़ी कर्नाटक के एक टोल नाका से निकली, तो उसका भुगतान फास्टैग के माध्यम से हुआ था। पुलिस ने फिर उस अकाउंट नंबर धारक का विवरण निकाला, जिससे यह भुगतान हुआ था। यह अकाउंट धारक सोलापुर का निकला।
सोलापुर में छापेमारी और चोरों का फरार होना
पुलिस उसके घर पहुंची, तो पता चला कि वह व्यक्ति बीमार था और अस्पताल से डिस्चार्ज होकर एक दिन पहले ही घर लौटा था। उसने बताया कि वह गाड़ी चला ही नहीं रहा था। जब उससे पूछा गया कि गाड़ी किसे दी थी, तब उसने अपने एक रिश्तेदार का नाम बताया। पुलिस को उस रिश्तेदार के गांव का पता भी मिल गया। इसके बाद नवी मुंबई से लगभग 50 पुलिसकर्मियों की एक टीम सादी वर्दी और वर्दी में आरोपियों के बताए गए गांव पहुंची। पुलिस को देखते ही किसी ने वहां एक पटाखा फोड़ दिया, जिसकी आवाज सुनकर असली चोर सतर्क हो गए कि पुलिस आ गई है, और इसके बाद सभी वहां से भाग गए। एक पटाखे ने पुलिस की पूरी मेहनत पर पानी फेर दिया। एक महीने के बाद भी पुलिस द्वारा आरोपियों की खोजबीन जारी है, लेकिन आरोपी अभी भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं।
