बुलंद सोच, धार।
धार जिले की कुक्षी तहसील स्थित पवित्र कोटेश्वर तीर्थ के समीप सरदार सरोवर बांध के बैकवाटर क्षेत्र में जनसहयोग और श्रमदान से मात्र 54 घंटे में लगभग 54 लाख रुपये की लागत से 54 सीढ़ियों और छह चबूतरों वाला प्रदेश का पहला सीमेंट का पक्का बैकवाटर घाट तैयार किया गया है।
इस घाट के निर्माण से वर्षों से बैकवाटर के कारण स्नान और धार्मिक गतिविधियों में आने वाली परेशानी काफी हद तक दूर हो जाएगी। वर्ष 2017 में सरदार सरोवर बांध के गेट लगने के बाद कोटेश्वर तीर्थ का जलस्तर 131 मीटर पहुंचते ही तीर्थ तक जाने वाला मार्ग जलमग्न हो जाता था। इससे पर्व स्नान, धार्मिक आयोजन और नर्मदा परिक्रमा करने वाले श्रद्धालुओं को परेशानी का सामना करना पड़ता था। पिछले लगभग 10 वर्षों से श्रद्धालु तीर्थ से करीब एक किलोमीटर दूर सड़क किनारे बैकवाटर क्षेत्र में बिना घाट और गंदगी के बीच स्नान करने को मजबूर थे।
कोटेश्वर नर्मदा बहुउद्देशीय सेवा संस्थान ने 14 जुलाई को कोठड़ा में भूमिपूजन कर घाट निर्माण का संकल्प लिया था।
15 से 21 जुलाई के बीच 12,600 ट्राली भराव कर 128 मीटर से 139 मीटर तक मजबूत आधार तैयार किया गया। साथ ही 33,000 वर्गफीट खोदाई कर 11 किसानों की सिंचाई और पेयजल पाइपलाइन को भी सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित किया गया।
28 जुलाई से तीन अगस्त तक प्रतिदिन सुबह नौ से शाम छह बजे तक संस्था के सदस्यों तथा देशवालिया, कड़माल, भवरिया, कोठड़ा, कोलगांव, निसरपुर और धूलसर सहित आसपास के गांवों के करीब 30 समाजसेवियों ने श्रमदान और मशीनों की सहायता से लगातार कार्य किया।
सामूहिक प्रयास से 100 फीट चौड़े और 230 फीट लंबे घाट में 54 सीढ़ियां और छह चबूतरे तैयार किए गए। यह घाट श्रद्धालुओं के लिए सुरक्षित, स्वच्छ और सुविधाजनक स्नान स्थल उपलब्ध कराएगा। इस घाट से कोटेश्वर तीर्थ बैकवाटर में जलमग्न होने पर मंदिरों के शिखर दर्शन भी किए जा सकेंगे। नए घाट पर बैकवाटर जलस्तर 128 मीटर से 139 मीटर तक में स्नान की व्यवस्था है।
संस्थान अध्यक्ष मोहनभाई पाटीदार ने बताया कि अभी घाट निर्माण का पहला चरण पूरा हुआ है और कुल लागत का लगभग 10 प्रतिशत दान ही प्राप्त हुआ है। आगामी चरण में इस घाट से जोड़ते हुए दोनों दिशाओं में 500 फीट चौड़ा और 230 फीट लंबाई का कुल घाट बनाया जाएगा।
साथ ही आठ एकड़ क्षेत्र में मुक्तिधाम, महिलाओं के लिए चेंजिंग रूम, पार्किंग, विद्युत व्यवस्था, बगीचा और मंदिर निर्माण जैसे कार्य किए जाएंगे। इस पूरे प्रकल्प पर लगभग तीन करोड़ 25 लाख रुपये खर्च होंगे, जो जनसहयोग से जुटाए जाएंगे।
कोटेश्वर नर्मदा बहुउद्देशीय सेवा संस्थान ने जनसहयोग के माध्यम से नर्मदा किनारे लगभग 54 किलोमीटर की परिधि में 11 घाट और मुक्तिधाम विकसित किए हैं।
वर्ष 2012 में कोटेश्वर मुक्तिधाम, 2016 में कोटेश्वर तीर्थ घाट, 2019 में राजघाट घाट एवं मुक्तिधाम, 2020 में कोठड़ा मुक्तिधाम, 2022 में छोटी कसरावद घाट, 2024 में जागीरदारपुरा घाट तथा 2025 में बोधवाड़ा घाट का निर्माण कराया जा चुका है, जिस पर चार करोड़ 11 लाख रुपये जनसहयोग से जुटाए गए।
वर्तमान में सेमलदा, वराहनगर, बड़ा बड़दा और चिड़िया संगम (टवलाई) घाटों का निर्माण कार्य भी जनसहयोग से जारी है, जिनकी प्रस्तावित कुल लागत पांच करोड़ 11 लाख रुपये है।

