बुलंद सोच, ग्वालियर।
अगर आप पैकेज्ड फूड पर लिखे ‘100 प्रतिशत प्योर’ या ‘100 प्रतिशत नेचुरल’ जैसे दावों को देखकर उन्हें खरीदते हैं, तो आपको सावधान रहने की आवश्यकता है। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने बाजार में बेचे जा रहे कई प्रमुख ब्रांड्स के उत्पादों के इन दावों की सच्चाई उजागर की है।
हाल ही में, खाद्य नियामक ने मशहूर एफएमसीजी कंपनी सहित कई अन्य बड़ी कंपनियों को उनके कई उत्पादों पर लिखे भ्रामक दावों को लेकर कड़ा नोटिस जारी किया है। एफएसएसएआई द्वारा की गई शुरुआती जांच और खाद्य नमूनों के अध्ययन से यह सामने आया है कि लेबल पर ‘सौ प्रतिशत प्योर’ या ‘सौ प्रतिशत नेचुरल’ लिखने वाली ये कंपनियाँ वास्तव में उपभोक्ताओं को गुमराह कर रही थीं।
जांच में पाया गया कि इन उत्पादों में प्रोसेस्ड इंग्रीडिएंट्स, प्रिजर्वेटिव्स या फ्लेवर एन्हांसर्स का इस्तेमाल किया गया था, जिसके कारण इन्हें पूरी तरह से प्राकृतिक या शुद्ध नहीं माना जा सकता। खाद्य कानूनों के तहत, ऐसे झूठे दावों के माध्यम से किसी उत्पाद की बिक्री करना कानूनी रूप से गलत और उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन है।
एफएसएसएआई की पूर्व कार्रवाई
हाल के दिनों में एफएसएसएआई का कड़ा रुख देखने को मिला है। यह पहला मौका नहीं है जब एफएसएसएआई ने पैकेज्ड फूड इंडस्ट्री पर नकेल कसी है। पिछले कुछ महीनों में संस्था ने भ्रामक विज्ञापनों और दावों पर चौतरफा कार्रवाई की है।
एफएसएसएआई के कड़े रुख के बाद कंपनियों को पैकेज्ड फ्रूट जूस के डिब्बों से ‘100 प्रतिशत रियल जूस’ या ‘100 प्रतिशत प्योर जूस’ जैसे शब्द हटाने पड़े। इसका कारण यह है कि री-कान्स्टिट्यूटेड (पानी मिलाकर बनाए गए) जूस को शत-प्रतिशत प्राकृतिक नहीं कहा जा सकता।
नियामक ने हाल ही में ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स और कंपनियों को निर्देश दिया था कि वे माल्ट-बेस्ड या शुगरी ड्रिंक्स को हेल्थ ड्रिंक की श्रेणी में बेचना बंद करें। कानून में ऐसी कोई श्रेणी परिभाषित नहीं है।
अंतरराष्ट्रीय और घरेलू स्तर पर मसालों में एथलीन ऑक्साइड की मिलावट और खाद्य तेलों में ब्लेंडिंग को लेकर भी कई नामी कंपनियों को नोटिस जारी किए गए थे। इस संबंध में खराब बैच वापस मंगाए गए थे।
उपभोक्ताओं के लिए महत्वपूर्ण जानकारी
एफएसएसएआई की इस कार्रवाई से यह स्पष्ट है कि सिर्फ पैकेट की चमक-दमक या ‘ऑर्गेनिक’ व ‘नेचुरल’ जैसे लुभावने शब्दों पर भरोसा करना समझदारी नहीं है। किसी भी उत्पाद को खरीदते समय उसके सामने के हिस्से पर लिखे दावों के बजाय पैकेट के पीछे बनी सामग्री की सूची और न्यूट्रिशनल इंफॉर्मेशन को ध्यान से पढ़ना चाहिए।
यदि उसमें कृत्रिम रंग, अतिरिक्त चीनी, रिफाइंड सामग्री या केमिकल कोड्स दर्ज हैं, तो वह उत्पाद किसी भी सूरत में ‘100 प्रतिशत नेचुरल’ नहीं है। एफएसएसएआई ने कंपनियों को अपने लेबल सुधारने का स्पष्ट निर्देश दिया है, ताकि आम जनता धोखा खाने से बच सके।
इसी क्रम में, रायपुर रेलवे स्टेशन पर 500 किलो पनीर जब्त किया गया। यह खेप भोपाल से आई थी और पिछले 48 घंटों में यह दूसरी ऐसी कार्रवाई है।

