बुलंद सोच, ग्वालियर।

ग्वालियर शहर की औद्योगिक और व्यापारिक रीढ़ कहे जाने वाले ट्रांसपोर्ट नगर की बदहाली दूर नहीं हो रही है। बीते एक साल में कई बार सुर्खियों में रहने के बावजूद इस क्षेत्र की बुनियादी समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हो सका है। मानसून की शुरुआत के साथ ही ट्रांसपोर्ट नगर एक बार फिर जलभराव और जर्जर सड़कों के संकट से जूझ रहा है। यहां न तो पक्की सड़कों का निर्माण कार्य पूरा हो पाया है और न ही वर्षा के पानी की सुगम निकासी के लिए कोई पुख्ता ड्रेनेज सिस्टम बनाया गया है। ऐसे में ट्रांसपोर्ट नगर में रोजाना वाहन, खासतौर से छोटे माल ढोने वाले वाहन पलटते रहते हैं।
व्यापार और आवागमन पर प्रभाव
शहर में बाहर से आने वाला तमाम व्यावसायिक माल सबसे पहले ट्रांसपोर्ट नगर में ही उतरता है और यहीं से ट्रकों व अन्य बड़े व्यावसायिक वाहनों के माध्यम से शहर सहित अंचल के विभिन्न हिस्सों में भेजा जाता है। इसके बावजूद रोजाना सैकड़ों भारी वाहनों की आवाजाही वाले इस क्षेत्र में जलजमाव व खराब सड़कों की स्थिति गंभीर बनी हुई है। वर्षा के पानी के जमा होने से सड़कों पर गहरे गड्ढे छिप जाते हैं, जिससे माल की लोडिंग और अनलोडिंग में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कीचड़ में भारी ट्रकों के फंसने और पलटने की आशंका हर वक्त बनी रहती है, जिससे लाखों रुपये के सामान के नुकसान का जोखिम रहता है। ट्रांसपोर्ट नगर में रोजाना देश व प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से 500 से 600 ट्रक आते-जाते हैं। इसके साथ ही एक हजार के करीब छोटे मालवाहक भी यहां पर माल लाने व ले जाने का काम करते हैं, जिससे यह ग्वालियर-चंबल का सबसे बड़ा ट्रांसपोर्ट नगर है। खासतौर से दिल्ली से ही तीन सौ से अधिक ट्रक यहां आते-जाते हैं।
कार्यबल और अधूरी परियोजनाएं
ट्रांसपोर्ट नगर में करीब तीन हजार लोग विभिन्न ट्रांसपोर्ट कंपनियों सहित मिस्त्री व मजदूर के रूप में काम करते हैं। यहां की सड़कों की खराब हालत की वजह से इन लोगों को आने-जाने से लेकर काम करने में भी परेशानी आती है। चूंकि, यहां पर ट्रकों को सुधारने के लिए कई वर्कशॉप सहित मिस्त्रियों की दुकानें भी हैं, जहां वाहनों की रिपेयरिंग से लेकर बॉडी तक बनती है, लेकिन जलभराव की वजह से वर्षा के मौसम में यहां काम कम हो पाता है। ट्रांसपोर्ट कंपनियों के लोगों का कहना है कि पिछले दिनों पुराने नगर निगम कमिश्नर ने यहां का निरीक्षण किया था। इसके बाद निगम कर्मचारियों ने जलभराव की समस्या को दूर करने के लिए नाले व नालियों की सफाई शुरू कर दी थी। हालांकि, कमिश्नर का ट्रांसफर होने के साथ ही यह काम ठप हो गया है और जलभराव की समस्या फिर से बढ़ गई है। ट्रांसपोर्ट नगर में मुख्य सड़क का निर्माण भी पिछले एक साल में पूरा नहीं हुआ है। ट्रांसपोर्ट यूनियन के पदाधिकारियों ने बताया कि ठेकेदार ने भुगतान न होने के कारण काम बंद होने की जानकारी दी है। पदाधिकारियों के मुताबिक, जहां सड़क बन भी गई है, वहां से गिट्टियां निकलना शुरू हो गई हैं।
यूनियन की मांग और अनसुनी अपील
ट्रांसपोर्ट यूनियन के अध्यक्ष सुनील माहेश्वरी ने बताया कि ट्रांसपोर्ट नगर में रोजाना पांच से छह सौ ट्रक आते-जाते हैं और एक हजार से अधिक छोटे वाहन माल की ढुलाई करते हैं। जलभराव और खराब सड़क की वजह से इन वाहनों के दुर्घटनाग्रस्त होने का खतरा बना रहता है, और कई बार छोटे वाहन पलटते रहते हैं। सुनील माहेश्वरी ने यह भी कहा कि निगम के अफसरों व जनप्रतिनिधियों से बार-बार यहां की समस्या को हल करने के लिए मांग की जा चुकी है, लेकिन समस्या का हल नहीं होता।

