बुलंद सोच, ग्वालियर।

श्रावण मास की हरियाली अमावस्या इस बार खगोलीय और धार्मिक दोनों दृष्टियों से विशेष महत्व रखेगी। 12 अगस्त, बुधवार को हरियाली अमावस्या के दिन पूर्ण सूर्य ग्रहण लगेगा। यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, जिसके कारण भारत में इसका सूतक काल भी मान्य नहीं होगा। ग्रहण से जुड़े धार्मिक नियमों का प्रभाव भी भारत में नहीं रहेगा। इसके चलते हरियाली अमावस्या पर होने वाले स्नान, दान, पूजन और धार्मिक अनुष्ठान सामान्य रूप से किए जा सकेंगे।
हरियाली अमावस्या का महत्व
ज्योतिषाचार्य सुनील चोपड़ा ने बताया कि श्रावण मास की अमावस्या को हरियाली अमावस्या कहा जाता है। यह पर्व प्रकृति, पर्यावरण और धार्मिक आस्था से जुड़ा हुआ है। इस दिन भगवान शिव की पूजा, जलाभिषेक, पितरों के निमित्त तर्पण, दान-पुण्य और पौधारोोपण का विशेष महत्व माना गया है। हरियाली अमावस्या पर लोग सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना करते हैं। वर्षा ऋतु में प्रकृति के हरे-भरे स्वरूप के कारण भी इस अमावस्या का विशेष महत्व है।
ग्रहण का समय और ज्योतिषीय महत्व
12 अगस्त को लगने वाला पूर्ण सूर्य ग्रहण भारतीय समयानुसार रात 9 बजकर 4 मिनट से शुरू होगा। यह ग्रहण देर रात 1 बजकर 27 मिनट तक रहेगा। ग्रहण का चरम रात 11 बजकर 17 मिनट पर होगा। हरियाली अमावस्या के दिन यह सूर्य ग्रहण होने के कारण इसे ज्योतिषीय दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
वैश्विक दृश्यता और भारत में सूतक की स्थिति
ज्योतिषाचार्य के अनुसार, यह सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, किसी स्थान पर ग्रहण दिखाई नहीं देने की स्थिति में वहां सामान्य तौर पर ग्रहण का सूतक मान्य नहीं माना जाता है। इसलिए, भारत में 12 अगस्त के सूर्य ग्रहण का सूतक प्रभाव नहीं रहेगा। मंदिरों में पूजा-अर्चना और अन्य धार्मिक गतिविधियां भी सामान्य रूप से जारी रहेंगी। यह पूर्ण सूर्य ग्रहण उत्तरी गोलार्ध के कई क्षेत्रों में दिखाई देगा। ग्रीनलैंड, आइसलैंड, स्पेन, रूस और अटलांटिक महासागर के कुछ हिस्सों में पूर्ण ग्रहण देखा जा सकेगा। यूरोप के अधिकांश हिस्सों, उत्तरी अमेरिका के कुछ क्षेत्रों और उत्तर-पश्चिमी अफ्रीका में यह आंशिक रूप से दिखाई देगा।
अगस्त माह में दो ग्रहण
अगस्त माह में दो ग्रहण पड़ रहे हैं। पहला 12 अगस्त को पूर्ण सूर्य ग्रहण होगा। दूसरा 28 अगस्त को आंशिक चंद्र ग्रहण होगा। ये दोनों ग्रहण भारत में स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देंगे। ज्योतिषाचार्य के अनुसार, एक ही माह में सूर्य और चंद्र ग्रहण का होना ज्योतिषीय दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। इसके प्रभाव अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग माने जाते हैं।

