BREAKING NEWS
2026-08-01

इंदौर में हाथी द्वारा रिक्शा चालक को कुचलने के मामले में वन विभाग की कार्रवाई, महावत और मालिक पर प्रकरण दर्ज

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, इंदौर।

इंदौर वनमंडल ने रिक्शा चालक को कुचलने वाले हाथी के मामले में शुक्रवार को कार्रवाई आगे बढ़ाई। नौलखा स्थित इंदौर रेंज कार्यालय में महावत रामजी और मालिक संदीप निर्मोही पहुंचे। उन्होंने हाथी का उज्जैन में पंजीयन और लाइसेंस जारी होना बताया।

Advertisement

महावत और मालिक ने उज्जैन से हैदराबाद के बीच का ट्रांजिट पास (परिवहन अनुमति) भी प्रस्तुत किया। हालांकि, हाथी को नांदेड़ से पैदल लाया गया था। इस दौरान वे इंदौर में भी रुके, लेकिन दस्तावेजों में इंदौर की अनुमति नहीं मिली है।

इन तथ्यों के आधार पर अब वन विभाग महावत और मालिक के खिलाफ प्रकरण दर्ज करने की तैयारी में है।

घटना एवं प्रशासनिक कार्रवाई

यह घटना 26 जुलाई को राज नगर में हुई थी, जब रिक्शा चालक विजय होलकर हाथी को गुड़ खिलाने की कोशिश कर रहा था। इस दौरान हाथी ने विजय को सूंड में लपेटकर फेंक दिया और उसके सिर पर पैर रख दिया।

इलाज के दौरान विजय की मौत हो गई। इसके बाद चंदन नगर थाने ने महावत रामजी के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया।

घटना के बाद कलेक्टर शिवम वर्मा ने इंदौर वनमंडल के डीएफओ लाल सुधाकर सिंह को कार्रवाई के लिए निर्देश दिए थे।

दस्तावेज़ एवं पूछताछ

चार दिन बाद महावत रामजी, मालिक संदीप निर्मोही और हेमंत दास ने वन विभाग के समक्ष दस्तावेज प्रस्तुत किए। हाथी का पंजीयन निर्मोही अखाड़ा के नाम पर किया गया है, और लाइसेंस संदीप निर्मोही के नाम पर मिला है।

ट्रांजिट पास उज्जैन से हैदराबाद और हैदराबाद से उज्जैन के लिए जारी किया गया था। इसकी अवधि एक महीने की थी, जो 28 जुलाई को समाप्त हो गई।

इंदौर रेंजर संगीता ठाकुर, डिप्टी रेंजर कोमल परिहार और वनरक्षक आशीष कुशवाहा ने पूछताछ की। संदीप ने बताया कि हाथी को शूटिंग के लिए हैदराबाद ले जाया गया था।

उन्होंने बताया कि 28 जून को हैदराबाद से निकले थे, लेकिन नांदेड़ में ट्रक का टायर फट गया। नया टायर लगाने के बाद हाथी ट्रक में सवार नहीं हुआ, जिसके बाद उसे पैदल लेकर जाना तय किया।

वे रोजाना 13 से 15 किलोमीटर की दूरी तय करते थे। 24 जुलाई को इंदौर पहुंचे और पंचकुईया के राम गोपाल दास आश्रम पर रुके।

पीड़ित को सहायता

हेमंत दास ने बताया कि रिक्शा चालक शराब पिए हुए था और वह जबरदस्ती गुड़ खिलाने की जिद कर रहा था। शराब की गंध से हाथी विचलित हो गया था। महावत ने उसे दूर रहने को कहा, बावजूद इसके वह बार-बार हाथी के नजदीक आ रहा था।

आश्रम ने पीड़ित का अस्पताल में इलाज भी करवाया था। इलाज और दवाइयों के लिए लगभग डेढ़ लाख रुपये दिए गए थे।

पैदल परिवहन की अनुमति नहीं

रेंजर संगीता ठाकुर के अनुसार, हाथी को लेकर उज्जैन-हैदराबाद के बीच परिवहन की अनुमति मिली थी। दस्तावेजों की जांच के बाद पाया गया कि वन विभाग उज्जैन ने अनुमति ट्रक से परिवहन के लिए दी थी।

हाथी को पैदल लाने को लेकर अनुमति से जुड़े कोई दस्तावेज नहीं मिले हैं। इस संबंध में अखाड़ा संचालक और महावत सहित अन्य लोगों के बयान दर्ज किए गए हैं, और कुछ और दस्तावेज मांगे गए हैं।

हाथी महावत की सुपुर्दगी में

इंदौर वनमंडल के डीएफओ लाल सुधाकर सिंह ने बताया कि हाथी से जुड़े दस्तावेज महावत और मालिक ने प्रस्तुत किए हैं। पंजीयन-लाइसेंस और ट्रांजिट पास सहित अन्य दस्तावेजों का अध्ययन किया गया है।

हाथी को महावत को सुपुर्दगी पर दिया गया है, क्योंकि इंदौर वनमंडल में उसे रखने के लिए पर्याप्त जगह नहीं है।