बुलंद सोच।
सोशल मीडिया पर केरल के मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन की आलोचना की जा रही है। यूजर्स उन्हें महिला विरोधी बता रहे हैं। यह आलोचना उनकी एक टिप्पणी के कारण हो रही है, जिसमें उन्होंने हाल ही में कहा था कि माताओं को अपने बेटों की पत्नियों को पारंपरिक खान-पान की परंपराएं सिखानी चाहिए।
विपक्ष की प्रतिक्रिया
पूर्व सामान्य शिक्षा मंत्री और वरिष्ठ सीपीआई (एम) नेता वी. शिवनकुट्टी ने मुख्यमंत्री की टिप्पणियों की आलोचना की। उन्होंने कहा कि ये टिप्पणियाँ केरल के स्कूली पाठ्यक्रम के माध्यम से प्रचारित लैंगिक समानता के मूल्यों के विपरीत हैं।
अपने एक फेसबुक पोस्ट में, शिवनकुट्टी ने कहा कि पाठ्यपुस्तकों में यह बदलाव किया गया है कि हर किसी को, चाहे वह पुरुष हो या महिला, घर के काम करने चाहिए। पूर्व मंत्री ने यह भी कहा कि घरेलू जिम्मेदारियों का बंटवारा लिंग के आधार पर नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने याद दिलाया कि लड़कों और लड़कियों को समान रूप से घरेलू काम में हिस्सेदारी करने के लिए प्रोत्साहित करने हेतु पाठ्यक्रम में संशोधन किया गया था।
लेखिका एस. सरदाकुट्टी की टिप्पणी
लेखिका एस. सरदाकुट्टी ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में सतीशन की टिप्पणियों की आलोचना की। उन्होंने इन टिप्पणियों को पितृसत्तात्मक बताया। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने पारंपरिक लैंगिक भूमिकाओं के प्रति बढ़ते प्रतिरोध को नजरअंदाज किया है।
सरदाकुट्टी ने जंतर-मंतर पर हाल ही में हुए महिला नेतृत्व वाले विरोध प्रदर्शनों का हवाला दिया। उन्होंने एक कविता भी साझा की, जो प्रतीकात्मक रूप से महिलाओं पर थोपे गए घरेलू बोझ के अंतरपीढ़ीगत हस्तांतरण को अस्वीकार करती है।

