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2026-08-01

मध्य प्रदेश में एक वर्ष में 600 करोड़ रुपये से अधिक की साइबर ठगी, जांच के लिए मात्र 19 निरीक्षक

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, भोपाल।

मध्य प्रदेश में साइबर ठगी के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। एक वर्ष के भीतर प्रदेश में साइबर ठगी का आंकड़ा 600 करोड़ रुपये के पार पहुंच गया है। इन मामलों की जांच के लिए साइबर पुलिस का अमला महज 300 कर्मियों का है। इनमें से आईटी एक्ट के तहत जांच के लिए अधिकृत निरीक्षकों की संख्या केवल 19 है।

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जांच में चुनौतियां

साइबर अपराधों की जांच में बड़ी चुनौती यह रहती है कि आरोपित का न तो पता सही होता है और न ही मोबाइल नंबर। आरोपित हर तरह से अपनी पहचान छिपाकर अपराध करते हैं। अधिकतर आरोपित मध्य प्रदेश से बाहर के होते हैं और ठगी की राशि उन्हीं राज्यों के म्यूल खातों में भेजते हैं। आरोपितों का नेटवर्क कई राज्यों में फैला होने के कारण साइबर पुलिस के पास कर्मचारियों की संख्या अन्य अपराधों की तुलना में अधिक होनी चाहिए, लेकिन स्थिति इसके विपरीत है।
भोपाल के साइबर पुलिस अधीक्षक प्रणय नागवंशी के अनुसार, साइबर ठगी की जांच में आगे बढ़ने के तीन ही तरीके होते हैं: मोबाइल नंबर, बैंक खाता नंबर और इंटरनेट मीडिया अकाउंट। इंटरनेट मीडिया अकाउंट के लिए संबंधित कंपनियों पर निर्भरता रहती है। मोबाइल नंबर के मामले में यह आवश्यक नहीं है कि जिसके नाम सिम है, वही उसका उपयोगकर्ता हो, वह देश के किसी भी कोने का हो सकता है। इसी तरह, फर्जी अकाउंट का पता लगाने के लिए बैंकों से जानकारी लेनी होती है। वास्तविक उपयोगकर्ता की पहचान करने में समय लगता है।

पुलिस बल और संसाधन

वर्ष 2013 में साइबर पुलिस के लिए 293 अधिकारी-कर्मचारियों का अमला स्वीकृत किया गया था। इन पदों के विरुद्ध एक बार की सीधी भर्ती में 54 पुलिसकर्मी मिले थे। बाकी जिला पुलिस बल से प्रतिनियुक्ति पर आए कर्मचारियों को मिलाकर लगभग 300 कर्मी पदस्थ हैं। आईटी एक्ट के अंतर्गत विवेचना का अधिकार मात्र निरीक्षकों को है, जिनकी संख्या प्रदेश में केवल 19 है। उपनिरीक्षकों की संख्या 22 है। प्रदेश में साइबर का मात्र एक थाना भोपाल में है। बाकी जिलों में जिला पुलिस के थानों में ही एफआईआर दर्ज की जाती हैं, जिससे विवेचना में देरी होती है। डिजिटल फोरेंसिक लैब सहित संसाधन बढ़ाने के कई प्रस्ताव शासन के स्तर पर लंबित हैं।

आंकड़ों में वृद्धि और भविष्य की योजनाएं

पिछले चार वर्षों में प्रदेश में साइबर ठगी की राशि में 1100 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है। वर्ष 2025 में 634 करोड़ रुपये की ठगी हुई थी, जिसमें से पुलिस द्वारा 137 करोड़ रुपये बैंकों में होल्ड कराए गए थे। इस वर्ष ठगी का आंकड़ा 600 करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। प्रतिवर्ष ढाई हजार से अधिक एफआईआर ठगी को लेकर दर्ज की जा रही हैं। ठगी के अतिरिक्त अन्य प्रकार के साइबर अपराधों के मामले भी सामने आते हैं। इसके बावजूद, साइबर पुलिस का अलग से कोई कैडर नहीं है। जिला पुलिस बल से प्रतिनियुक्ति पर कर्मचारी लिए जाते हैं। हालांकि, पुलिस मुख्यालय के अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही साइबर पुलिस का अलग कैडर बनाया जाएगा। जबलपुर में खुद को सीआरपीएफ जवान बताकर एक सेवानिवृत्त एमपीईबी अधिकारी से 30 हजार रुपये की ठगी का मामला सामने आया है, जिसकी जांच में पुलिस जुटी हुई है।