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2026-08-01

मुंबई में वीवीआईपी कोटे से फर्जी रेल टिकट रैकेट का भंडाफोड़, छह गिरफ्तार

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, मुंबई।

मुंबई पुलिस ने वीवीआईपी कोटे से रेल टिकट कन्फर्म कराने वाले एक बड़े रैकेट का पर्दाफाश किया है। इस मामले में एक कपड़ा व्यापारी सहित छह लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

यह रैकेट पिछले तीन-चार साल से पूरे देश में सक्रिय था। जांच में सामने आया है कि इस नेटवर्क के जरिए राज्यपाल के एडीसी (एड-डी-कैंप), मंत्रियों, वरिष्ठ रेलवे अधिकारियों और अन्य बड़े पदाधिकारियों के फर्जी लेटरहेड तैयार कर अब तक 400 से ज्यादा रेल टिकट वीवीआईपी कोटे से कन्फर्म कराए गए थे।

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मास्टरमाइंड और नेटवर्क

पुलिस के अनुसार, इस गिरोह का मास्टरमाइंड 41 वर्षीय अमरीश ईश्वरलाल ठक्कर है। वह दादर में थोक कपड़े का कारोबार करता था, लेकिन जल्दी और ज्यादा कमाई के लालच में उसने वीवीआईपी कोटे से टिकट कन्फर्म कराने का अवैध कारोबार शुरू किया।

अमरीश ठक्कर का नेटवर्क केवल मुंबई तक सीमित नहीं था, बल्कि गुजरात और उत्तर प्रदेश तक फैला हुआ था। उसके अधीन करीब 200 एजेंट और सब-एजेंट काम करते थे, जो जरूरतमंद यात्रियों से मोटी रकम लेकर टिकट कन्फर्म कराने का दावा करते थे।

फर्जीवाड़े का खुलासा

इस पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा तब हुआ, जब भारतीय रेलवे ने मुंबई में लोक भवन के अधिकारियों से संपर्क किया। रेलवे ने जानकारी दी कि वीवीआईपी कोटे से टिकट कन्फर्म कराने के लिए कुछ आवेदन आए हैं, जिन पर राज्यपाल के एडीसी के हस्ताक्षर और मुहर लगी हुई है।

लोक भवन में इन दस्तावेजों की जांच करने पर पता चला कि आधिकारिक लेटरहेड की हूबहू नकल कर फर्जी आवेदन तैयार किए गए थे। इसके बाद लोक भवन प्रशासन ने मुंबई के मालाबार हिल पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।

जांच और गिरफ्तारियां

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने जांच शुरू की और सबसे पहले उन चार सब-एजेंटों तक पहुंची, जो वीवीआईपी कोटे के जरिए टिकट कन्फर्म कराने का काम कर रहे थे। पुलिस ने 33 वर्षीय तारिक खान, 27 वर्षीय दीपक कुमार यादव, 24 वर्षीय विनय रावत और 34 वर्षीय शत्रुंजय यादव उर्फ मोहन उर्फ अनूप को गिरफ्तार किया।

इनसे पूछताछ में पूरे नेटवर्क का खुलासा हुआ और पुलिस मास्टरमाइंड अमरीश ठक्कर तक पहुंच गई। बाद में उसके छोटे भाई 32 वर्षीय सागर ठक्कर को भी गिरफ्तार कर लिया गया।

मुंबई की पुलिस उपायुक्त आर. रागासुधा ने बताया कि सागर अपने भाई की मदद से राज्यपाल के एडीसी, मंत्रियों, वरिष्ठ रेलवे अधिकारियों और अन्य महत्वपूर्ण पदाधिकारियों के नाम से फर्जी लेटरहेड तैयार करता था। इन्हीं लेटरहेड और जाली हस्ताक्षरों के आधार पर वीवीआईपी कोटे से टिकट कन्फर्म कराने के लिए आवेदन भेजे जाते थे।

पूर्व मामले और वसूली

जांच में यह भी पता चला कि अमरीश ठक्कर के खिलाफ पहले से ही मुंबई के कुर्ला गवर्नमेंट रेलवे पुलिस और मुंबई सेंट्रल में डिविजनल रेलवे मैनेजर (डीआरएम) के फर्जी लेटरहेड का इस्तेमाल कर टिकट कन्फर्म कराने के मामले दर्ज हैं। इसके बावजूद वह लगातार अपना नेटवर्क बढ़ाता रहा।

पुलिस के अनुसार, गिरोह टिकट की मांग और उसकी तत्काल जरूरत के हिसाब से रकम तय करता था। जिस यात्री को जितनी जल्दी टिकट चाहिए होती थी, उससे उतने ज्यादा पैसे वसूले जाते थे। कई मामलों में आरोपियों ने टिकट की वास्तविक कीमत से दोगुना तक पैसा वसूला।

बरामदगी और आगे की जांच

छापेमारी के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 12 मोबाइल फोन, 16 सिम कार्ड, 70 से ज्यादा क्रेडिट और डेबिट कार्ड तथा 400 से अधिक यात्रियों का डेटा बरामद किया है।

जांच में सामने आया है कि इन्हीं यात्रियों के टिकट फर्जी लेटरहेड के जरिए वीवीआईपी कोटे से कन्फर्म कराए गए थे। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि इस पूरे रैकेट में रेलवे का कोई कर्मचारी या अन्य सरकारी व्यक्ति भी शामिल था या नहीं।