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2026-07-31

मध्य प्रदेश में ग्रीष्मकालीन मूंग की खेती पर विवाद

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, भोपाल।

मध्य प्रदेश में ग्रीष्मकालीन मूंग की खेती विवाद का कारण बन रही है। सरकार इसके उत्पादन में कीटनाशक के बेजा उपयोग को देखते हुए इसे हतोत्साहित कर रही है। पिछले दो साल से किसानों को ग्रीष्मकालीन मूंग की खेती छोड़ने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
इसी तारतम्य में समर्थन मूल्य पर उड़द की शत-प्रतिशत उत्पादन खरीदी के साथ 600 रुपये प्रति क्विंटल प्रोत्साहन राशि देने की घोषणा भी की जा चुकी है। लेकिन कम समय में अधिक लाभ के गणित में किसान मूंग का मोह नहीं छोड़ पा रहे हैं।
प्राइस सपोर्ट स्कीम में उपार्जन का लक्ष्य भारत सरकार निर्धारित करती है, मगर उससे अधिक खरीदी के लिए दबाव बनाया जाता है। स्थिति यह है कि गोदामों में पिछले सालों की लगभग तीन हजार करोड़ रुपये की साढ़े तीन लाख टन से अधिक मूंग रखी हुई है।
कमजोर गुणवत्ता के कारण कारोबारी भी इसे खरीदने के इच्छुक नहीं हैं। यह समस्या हर साल की बनती जा रही है।

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उत्पादन और उपार्जन लक्ष्य

प्रदेश में ग्रीष्मकालीन मूंग की खेती साढ़े 14 लाख हेक्टेयर में हुई है। तृतीय अग्रिम अनुमान के अनुसार, प्रति हेक्टेयर उत्पादकता लगभग डेढ़ क्विंटल के आसपास है। इस हिसाब से 20.16 लाख टन उत्पादन होने की संभावना है।
सरकार ने सीजन प्रारंभ होने के पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि कुल उत्पादन का 25 प्रतिशत समर्थन मूल्य पर खरीदा जाएगा। इसके बाद भी किसानों ने क्षेत्र बढ़ाया।
भारत सरकार ने 4.54 लाख टन उपार्जन का लक्ष्य दिया। पात्र किसानों से उपज लेने के लिए पंजीयन कराया और उपार्जन प्रारंभ हुआ।

किसानों की असंतुष्टि और बहिष्कार

उपार्जन में प्रति हेक्टेयर डेढ़ क्विंटल के हिसाब से मात्रा निर्धारित की गई, जिससे किसान असंतुष्ट हुए। किसानों का दावा है कि प्रति हेक्टेयर औसत उत्पादन 14 से 16 क्विंटल के आसपास है।
हालांकि, प्रति हेक्टेयर उत्पादकता 1,419 किलो रखी गई ताकि खरीदी कम से कम करनी पड़े। ग्रीष्मकालीन फसलों में लागत अधिक आती है, जिसमें लगातार सिंचाई और खरपतवार नाशक के साथ कीटनाशक का उपयोग करना होता है। मूंग में तो पांच से छह स्प्रे तक किए जाते हैं।
यही कारण है कि किसान आंदोलित हुए और एक प्रकार से उपार्जन प्रक्रिया का बहिष्कार कर दिया। 3.47 लाख पंजीकृत किसानों में से केवल 82 हजार ने ही अपनी उपज बेची।

किसान नेता का बयान और आगामी कार्यक्रम

राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ के अध्यक्ष शिव कुमार शर्मा ने कहा कि यदि सरकार मूंग को मानव स्वास्थ्य के लिए खतरनाक बता रही है, तो इसमें उपयोग हो रही खाद और पेस्टीसाइड को प्रतिबंधित क्यों नहीं किया जाता है और वे बाजार में बिक कैसे रहे हैं? उन्होंने यह भी कहा कि जब सरकार खुद मूंग की उपज को प्रोत्साहित कर रही थी, तो उपार्जन भी किया जाना चाहिए।
किसान आंदोलन के बीच राकेश टिकैत राजगढ़ आएंगे। वे मथुरा होते हुए गुरुवार को खैरासी पहुंचेंगे।