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2026-07-31

मध्य प्रदेश में तीन मौसम प्रणालियां सक्रिय, 17 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच।

मध्य प्रदेश में मानसून ने एक बार फिर जोर पकड़ा है। प्रदेश के ऊपर एक साथ तीन मौसम प्रणालियां सक्रिय हो गई हैं, जिससे बारिश का दायरा बढ़ गया है। इसका सबसे ज्यादा असर मालवा-निमाड़ के जिलों में दिखाई देने की संभावना है।
मौसम विभाग ने गुरुवार को 17 जिलों के लिए भारी से अति भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। कुछ स्थानों पर 24 घंटे के भीतर चार इंच से ज्यादा पानी गिर सकता है।
गुरुवार को धार, देवास, बुरहानपुर, हरदा और नर्मदापुरम में अति भारी बारिश का नारंगी चेतावनी स्तर जारी किया गया है।
वहीं उज्जैन, शाजापुर, सीहोर, बड़वानी, खरगोन, खंडवा, रायसेन, सागर, बैतूल, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा और सिवनी में भारी बारिश की संभावना है।
भोपाल, इंदौर, झाबुआ, आलीराजपुर, नीमच, मंदसौर, रतलाम, आगर-मालवा सहित कई अन्य जिलों में भी गरज-चमक के साथ बारिश का दौर जारी रह सकता है।
मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के अनुसार, प्रदेश में सक्रिय मौसम प्रणालियों का असर दो अगस्त तक बना रह सकता है। इस दौरान कई जिलों में तेज बारिश के साथ कुछ इलाकों में अति भारी बारिश भी हो सकती है। इसका सबसे ज्यादा असर मालवा-निमाड़ और आसपास के क्षेत्रों में पड़ने की संभावना है।

बीते दिनों की बारिश और उसका प्रभाव

बुधवार को बालाघाट, रतलाम, पचमढ़ी और भोपाल समेत कई जिलों में बारिश दर्ज की गई। बालाघाट में तेज बारिश के बाद नदी-नाले उफान पर आ गए।
बैहर-परसवाड़ा मार्ग पर पेड़ गिरने से आवागमन बाधित हुआ। ग्रामीण इलाकों में कुछ रास्तों पर भी पानी भरने से आवाजाही प्रभावित हुई।
ग्वालियर में भी तेज बारिश का दौर देखने को मिला।

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प्रदेश में बारिश की स्थिति

लगातार बारिश के बावजूद मध्य प्रदेश में मानसून का कुल आंकड़ा अभी सामान्य से नीचे है। अब तक प्रदेश में औसतन 14.1 इंच बारिश दर्ज हुई है, जबकि इस अवधि तक 16.9 इंच बारिश होनी चाहिए थी। यानी प्रदेश में करीब 2.8 इंच यानी 16 प्रतिशत बारिश की कमी बनी हुई है।
पूर्वी हिस्से में बारिश 15 प्रतिशत और पश्चिमी हिस्से में 17 प्रतिशत कम है। आने वाले दिनों में तेज बारिश होने पर यह अंतर कम हो सकता है।
प्रदेश के 47 जिलों में अब तक सामान्य से कम बारिश दर्ज हुई है। इनमें उज्जैन, सागर, धार, खरगोन, खंडवा, रतलाम, बैतूल, ग्वालियर, गुना, नर्मदापुरम, जबलपुर, सिवनी, मंडला, रीवा, सतना और शहडोल समेत कई जिले शामिल हैं।
दूसरी ओर भोपाल, भिंड, बुरहानपुर, देवास, इंदौर, मंदसौर, राजगढ़ और सीहोर में सामान्य से ज्यादा बारिश दर्ज की गई है। देवास में सामान्य से 29 प्रतिशत अधिक बारिश हो चुकी है।
जून में कमजोर बारिश के बाद जुलाई की शुरुआत में स्थिति कुछ सुधरी थी, लेकिन पिछले कई दिनों से तेज बारिश में कमी आने के कारण प्रदेश फिर सामान्य बारिश के आंकड़े से नीचे चला गया। मौसम विभाग के अनुसार, पूरे मानसून की बड़ी हिस्सेदारी जुलाई की बारिश पर निर्भर रहती है।
इसलिए जुलाई के आखिरी दिनों में होने वाली बारिश प्रदेश के कुल आंकड़े के लिए बेहद अहम मानी जा रही है।
मध्य प्रदेश में मानसून की सामान्य बारिश 37.3 इंच मानी जाती है। भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर जैसे बड़े शहरों में सामान्य मानसूनी बारिश करीब 38 से 39 इंच के बीच रहती है।
जुलाई में होने वाली तेज बारिश ही इस समय प्रदेश के बारिश घाटे को कम करने में सबसे बड़ी भूमिका निभा सकती है।