बुलंद सोच,
तृणमूल कांग्रेस की सर्वोच्च नेता ममता बनर्जी ने भारत निर्वाचन आयोग को पत्र लिखा है। यह पत्र उन्होंने आयोग के सचिव अश्विनी कुमार मोहाल को भेजा है। ममता बनर्जी ने पार्टी से जुड़ी जांच को तुरंत खत्म करने की मांग की है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि विरोधी पक्ष ऋतब्रत बनर्जी को अब और समय न दिया जाए।
जांच का विवरण
चुनाव आयोग ने जुलाई की शुरुआत में तृणमूल कांग्रेस और उसके पत्रों से जुड़े एक मामले में जांच शुरू की थी।
आयोग ने 2 जुलाई और 13 जुलाई को पत्र जारी किए थे, जिनमें ऋतब्रत बनर्जी की शिकायतों पर तृणमूल कांग्रेस से जवाब मांगा गया था।
तृणमूल कांग्रेस से 6 जुलाई तक अपनी टिप्पणी देने को कहा गया था। पार्टी ने तय समय पर 6 जुलाई को ही अपना जवाब जमा कर दिया था। तृणमूल कांग्रेस ने अपने जवाब की एक कॉपी ई-मेल और स्पीड पोस्ट से ऋतब्रत बनर्जी को भी भेजी थी।
समयसीमा पर आपत्ति
ममता बनर्जी का आरोप है कि आयोग ने ऋतब्रत बनर्जी को बार-बार अतिरिक्त समय दिया, जिससे जांच प्रक्रिया में बेवजह देरी हो रही है।
आयोग ने ऋतब्रत बनर्जी को जवाब देने के लिए 15 दिनों की और मोहलत दी थी, जिसके लिए नई अंतिम तिथि 25 जुलाई तय की गई थी। वहीं, तृणमूल कांग्रेस के लिए समयसीमा 13 जुलाई तक बढ़ाई गई थी।
ममता बनर्जी ने कहा कि 25 जुलाई की तारीख बीतने के बाद भी तृणमूल कांग्रेस को कोई जानकारी नहीं दी गई है। पार्टी को यह भी नहीं पता चला कि ऋतब्रत बनर्जी ने अपना जवाब सौंपा है या नहीं।
निष्पक्षता पर चिंता
ममता बनर्जी ने 29 जुलाई को लिखे अपने पत्र में आयोग की कार्यशैली पर कड़ा ऐतराज जताया है। उन्होंने कहा कि इस मामले का पश्चिम बंगाल की राजनीति पर गहरा असर पड़ रहा है।
इसलिए आयोग को दोनों पक्षों के लिए बराबरी का मैदान सुनिश्चित करना चाहिए। ममता बनर्जी ने लिखा कि न्याय का आधार जनता का विश्वास होता है।
उन्होंने चेतावनी दी कि अगर 25 जुलाई के बाद भी ऋतब्रत बनर्जी को और समय दिया जाता है, तो इससे निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया पर लोगों का भरोसा डगमगा जाएगा। ममता बनर्जी ने मांग की है कि आयोग बिना किसी देरी के इस जांच को तुरंत समाप्त करे।

