बुलंद सोच, मांडू।
लगातार वर्षा के कारण ऐतिहासिक पर्यटन नगरी मांडू की सुंदरता चरम पर है। पूरा नगर कोहरे से ढका हुआ है, जिससे सदियों पुरानी इमारतें जीवंत प्रतीत हो रही हैं।
शनिवार को मांडू में पर्यटकों की भारी भीड़ उमड़ी। हजारों सैलानियों ने मांडू की ऐतिहासिक इमारतों का भ्रमण किया और उनके इतिहास से अवगत हुए। परिवार, स्कूल ट्रिप और दोस्तों के साथ आए पर्यटकों में खासा उत्साह देखा गया।
लगातार तेज वर्षा के कारण यहां झरने बहने लगे हैं और बादल जमीन पर उतर आए हैं। मांडू के घाट क्षेत्र में आमने-सामने देखना भी मुश्किल हो गया है। पर्यटक वाहनों की हेडलाइट जलाकर मांडू में घूमे और ऐतिहासिक महलों तक पहुंचे। स्थानीय लोगों को दिन में भी घरों और दुकानों की बिजली चालू करनी पड़ी।
वर्षा और प्रकृति के इस अनुपम संगम को देखकर पर्यटक मंत्रमुग्ध दिखाई दिए। इंदौर के सैलानी हर्षवर्धन तोमर ने कहा कि उन्हें ऐसा लगता है कि वे यहीं बस जाएं और कहीं न जाएं, क्योंकि ऐसे सुंदर नज़ारे और कहीं नहीं मिलेंगे।
रविवार को मित्रता दिवस है। हर वर्ष फ्रेंडशिप डे पर हजारों की संख्या में सैलानी मांडू आते हैं। इस बार भी मौसम के मिजाज को देखते हुए बड़ी संख्या में दोस्तों के समूह यहां की खूबसूरत वादियों में मित्रता दिवस मनाने पहुंचे और जीवन भर दोस्ती निभाने की कसमें खाईं।
पर्यटकों की बढ़ती संख्या के मद्देनजर प्रशासन से पार्किंग, शौचालय और ट्रैफिक के बेहतर इंतजाम करने की मांग की जा रही है।
धार्मिक स्वरूप और श्रावण मास
श्रावण मास में मांडू का धार्मिक इतिहास भी पर्यटन को बढ़ावा दे रहा है। एक ओर वाहन से आ रहे पर्यटक हैं, तो दूसरी ओर पैदल चल रहे कांवड़ियों की टोलियां हैं। ‘बोल बम’ के जयकारे गूंजने से धर्म और संस्कृति का इतिहास जीवंत होकर मांडू के पर्यटन को एक अनूठा माहौल प्रदान कर रहा है।
इस सप्ताहांत मांडू के मुख्य आकर्षण
इस सप्ताहांत मांडू में कई खास नजारे देखने को मिले। रानी रूपमती, जहाज और हिंडोला महल कोहरे की चादर ओढ़े और भी खूबसूरत लग रहे थे। वर्षा के कारण सभी झरने सक्रिय हो गए हैं और ऐतिहासिक तालाबों में पानी भरने से मांडू का नजारा और भी मनमोहक हो गया है। मांडू घाट पर घना कोहरा छाए रहने से आमने-सामने देखना भी मुश्किल हो रहा था, जो एडवेंचर प्रेमियों के लिए खास आकर्षण रहा। फ्रेंडशिप डे के लिए दोस्तों के समूह फोटो, पिकनिक और सेल्फी के लिए मांडू को पसंदीदा जगह बना रहे हैं। श्रावण मास में कांवड़ियों और पर्यटकों की एक साथ मौजूदगी से धर्म और पर्यटन का एक अनोखा संगम देखने को मिला।

