बुलंद सोच, बालाघाट।
मध्य प्रदेश में इथेनॉल उत्पादन के नाम पर हुए चावल घोटाले के तार तीन राज्यों से जुड़ गए हैं। विशेष जांच दल (एसआईटी) की अब तक की जांच में मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ के 14 राइस मिल संचालक संलिप्त पाए गए हैं।
इस बीच, कलेक्टर मृणाल मीना के निर्देश पर भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) और नागरिक आपूर्ति निगम ने भारतीय खाद्य निगम के क्षेत्रीय महाप्रबंधक को पत्र लिखकर इन 14 राइस मिलरों को धान का वितरण न करने को कहा है।
इन 14 राइस मिलों में बालाघाट जिले की सात, सिवनी जिले की तीन, महाराष्ट्र के गोंदिया की तीन और छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव की एक राइस मिल शामिल है।
उल्लेखनीय है कि मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र के इन 14 राइस मिलरों में मध्य प्रदेश के पूर्व मंत्री और वर्तमान भाजपा जिलाध्यक्ष रामकिशोर कावरे के बड़े भाई कुमार कावरे की हर्ष राइस मिल भी शामिल है। एसआईटी ने हर्ष राइस मिल से जुड़े बिजनेस पार्टनर विनोद शर्मा सहित कावरे परिवार के सदस्यों से लंबी पूछताछ की है।
जांच में जिन मिलों की संलिप्तता के साक्ष्य मिले हैं, उनमें छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव की गुरुदेव (लक्ष्मी) राइस मिल; महाराष्ट्र के गोंदिया की खंडेलवाल राइस मिल, श्रीनाथ राइस मिल (खंडेलवाल ग्रुप) और सीडी सोर्टेक्स गोदाम (खंडेलवाल ग्रुप) शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, बालाघाट की संचेती राइस मिल (वारासिवनी), हर्ष राइस मिल (टेकाड़ी), श्री सिद्धी विनायक राइस इंडस्ट्री (लालबर्रा), बिहारी राइस इंडस्ट्री (नैतरा वारासिवनी), शांति राइस मिल (नेवरगांव, वारासिवनी), नवीन सुराना गोदाम (मेहंदीवाड़ा, वारासिवनी) और विराज राइस मिल (गर्रा) भी संलिप्त पाई गई हैं। सिवनी की नंदगोपाल राइस इंडस्ट्री, बोपचे राइस मिल (अरी) और शुभम राइस मिल (अरी) भी इस सूची में हैं।
यह मामला मध्य प्रदेश के बालाघाट और सिवनी जिलों में इथेनॉल के नाम पर करोड़ों के फोर्टिफाइड चावल की हेराफेरी से संबंधित है, जो तीन जून को सामने आया था। इस घोटाले का खुलासा बालाघाट में 242 क्विंटल सरकारी चावल से भरे एक ट्रक के पकड़े जाने के बाद हुआ था। तब से अब तक इस मामले में 10 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है।
एसआईटी की टीमें अभी भी महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ में दबिश दे रही हैं।
