बुलंद सोच, भोपाल।
मध्य प्रदेश में वन कर्मियों को हथियार दिए गए हैं, लेकिन उन्हें किसी भी स्थिति में हथियार चलाने का अधिकार नहीं दिया गया है।
इस मामले में हाई कोर्ट ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को नोटिस जारी कर पूछा है कि इसके पीछे वजह क्या है।
इसके साथ ही हाई कोर्ट ने वन क्षेत्रों में शिकारियों, अतिक्रमणकारियों और शरारती तत्वों पर लगाम कसने के लिए वन अधिकारियों को मोबाइल डेटा, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) न मिलने और ड्यूटी के दौरान सुरक्षा के मुद्दे पर भी जवाब मांगा है।
उल्लेखनीय है कि मध्य प्रदेश में वन अमले पर अवैध खनिज उत्खनन करने वालों, अतिक्रमणकारियों और शिकारियों द्वारा हमले की कई घटनाएं हो चुकी हैं।
अपराधियों से मोर्चा लेने के लिए वन कर्मी हाथ में थामे हथियारों का प्रयोग इसलिए नहीं कर पाते, क्योंकि उन्हें इनके उपयोग पर पूरी तरह से प्रतिबंध है, ऐसे में कई वन कर्मी घायल हो जाते हैं।
वरिष्ठ अधिवक्ता अंशुमान सिंह ने हाई कोर्ट के समक्ष बात रखी कि मध्य प्रदेश में बायोडायवर्सिटी एक्ट का पालन नहीं हो रहा है।
अधिवक्ता ने बताया कि वन अधिकारियों और कर्मचारियों को मोबाइल डेटा और सीडीआर का अधिकार नहीं है, साथ ही जंगल की सुरक्षा और आत्मरक्षा के लिए हथियार के उपयोग का भी अधिकार नहीं है।
अधिवक्ता ने कोर्ट के समक्ष मांग रखी कि वन अधिकारियों और कर्मचारियों को सीआरपीसी की धारा 197 के तहत वैधानिक सुरक्षा दी जाए, ताकि ड्यूटी के दौरान हथियार के उपयोग पर अनावश्यक कार्रवाई का डर न रहे।
साथ ही वन अपराधों की जांच के लिए मोबाइल लोकेशन, डेटा और कॉल डिटेल जैसी तकनीकी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।
कोर्ट में सुनवाई के दौरान खंडवा में वन कर्मियों पर अतिक्रमणकारियों के हमले का भी उदाहरण दिया गया, जिसमें अतिक्रमणकारियों ने धारदार हथियारों से हमला कर दिया था और कई वनकर्मी घायल हुए थे।
कोर्ट को बताया गया कि जंगल को अतिक्रमण से बचाने व आत्मरक्षा के लिए हथियार चलाने का अधिकार वन अमले को नहीं है, और वन अमले को डर रहता है कि पुलिस उनके विरुद्ध ही मामला दर्ज न कर दे।
बाओबाब पेड़ों के मामले में सुनवाई
धार जिले में संरक्षित बाओबाब (खुरासानी इमली) के पेड़ों को अवैध रूप से काटने, बेचने और परिवहन से जुड़ी खबर पर हाई कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया था।
स्वतः संज्ञान व जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता अंशुमान सिंह ने पक्ष रखा।
युगलपीठ ने राज्य जैव विविधता बोर्ड को निर्देश दिया है कि प्रदेश में मौजूद सभी बाओबाब पेड़ों की तस्वीरों के साथ वर्तमान स्थिति की स्टेटस रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए।
केंद्र सरकार से मांगा जवाब
सीडीआर और लाइव डेटा का विषय केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में आने के कारण जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस बीपी शर्मा की पीठ ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को नोटिस जारी कर अगली सुनवाई तक जवाब प्रस्तुत करने के आदेश दिए हैं।
कोर्ट ने यह भी कहा कि पर्यावरण और वन्यजीवों के संरक्षण के लिए केंद्र और राज्य सरकार, दोनों हितधारकों को एक साझा मंच पर आकर सकारात्मक और ठोस समाधान निकालना होगा।
इस मामले की अगली सुनवाई 17 अगस्त को की जाएगी।
गुना में अंधविश्वास के चलते तेंदुए की बलि दी गई, जिसमें दवा और टोटके के लिए उसके सिर, पंजे और पूंछ काटे गए, इस मामले में चार आरोपी गिरफ्तार किए गए हैं।

