बुलंद सोच, भोपाल।

मध्य प्रदेश में नीट यूजी 2026-27 की राज्य स्तरीय संयुक्त काउंसलिंग में शामिल होने वाले शासकीय विद्यालय विद्यार्थी कोटा के अभ्यर्थियों के लिए चिकित्सा शिक्षा संचालनालय ने नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। कॉलेज आवंटित होने के बाद दस्तावेज सत्यापन के दौरान निर्धारित प्रमाण पत्र और अंकपत्र प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा। आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराने पर अभ्यर्थी को सरकारी स्कूल कोटे का लाभ नहीं मिलेगा। ऐसी स्थिति में आवंटित सीट भी निरस्त की जा सकती है।
मध्य प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में पांच प्रतिशत सीटें सरकारी स्कूल विद्यार्थी कोटे के तहत आरक्षित हैं। चिकित्सा शिक्षा संचालक डॉ. अरुणा कुमार की ओर से जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, कक्षा छठवीं से 12वीं तक मध्य प्रदेश के शासकीय विद्यालयों में अध्ययन करने वाले अभ्यर्थियों को सक्षम अधिकारी द्वारा जारी शासकीय विद्यालय विद्यार्थी प्रमाण पत्र, जिसे प्रपत्र-10 भी कहा जाता है, प्रस्तुत करना होगा। इसके साथ अभ्यर्थी को कक्षा छठवीं से 12वीं तक के सभी मूल अंकपत्र भी दस्तावेज सत्यापन के समय दिखाने होंगे।
यदि किसी कक्षा का अंकपत्र उपलब्ध नहीं है या वह खो गया है, तो संबंधित शासकीय विद्यालय के प्रधानाचार्य से पढ़ाई का प्रमाण पत्र बनवाना होगा। संचालनालय के अनुसार, प्रधानाचार्य द्वारा जारी प्रमाण पत्र ही इस स्थिति में मान्य किया जाएगा।
जिन विद्यार्थियों ने शिक्षा का अधिकार कानून (आरटीई) के तहत कक्षा एक से आठवीं तक निजी स्कूल में पढ़ाई की है और कक्षा नौवीं से 12वीं तक शासकीय विद्यालय में अध्ययन किया है, उनके लिए भी दस्तावेज संबंधी नियम स्पष्ट किए गए हैं। ऐसे अभ्यर्थियों को संबंधित निजी स्कूल के प्रधानाचार्य का प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना होगा। इसके अलावा, प्रपत्र-10 के साथ कक्षा नौवीं से 12वीं तक के शासकीय विद्यालय के मूल अंकपत्र भी जमा करने होंगे।
चिकित्सा शिक्षा संचालनालय ने स्पष्ट किया है कि सत्यापन के समय प्रपत्र-10 और आवश्यक अंकसूचियां प्रस्तुत नहीं करने वाले अभ्यर्थी को शासकीय विद्यालय विद्यार्थी कोटे की पात्रता से बाहर कर दिया जाएगा।
एमबीबीएस सीटों की स्थिति
नेशनल मेडिकल काउंसिल और चिकित्सा शिक्षा विभाग के आंकड़ों के अनुसार, मध्य प्रदेश में 2026-27 सत्र के लिए सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों को मिलाकर कुल 4900 एमबीबीएस सीटें हैं। प्रदेश में 18 सरकारी मेडिकल कॉलेज हैं, जिनमें 2700 सीटें उपलब्ध हैं, वहीं 12 निजी कॉलेजों में 2200 सीटें हैं।
पिछले वर्ष डीएमई के अनुसार प्रदेश में कुल 4775 एमबीबीएस सीटें थीं। इस साल पीपीपी वाले चार नए कॉलेज धार, बैतूल, कटनी और पन्ना में 100-100 सीटें जुड़ने के बाद कुल सीटों की संख्या बढ़कर 4900 हो गई है।
मध्य प्रदेश में मेडिकल कॉलेजों की पांच प्रतिशत सीटें शासकीय स्कूलों में पढ़े विद्यार्थियों के लिए आरक्षित हैं। इस हिसाब से करीब 245 सीटें इस कोटे के तहत उपलब्ध होंगी। ये सीटें 18 सरकारी और 12 निजी मेडिकल कॉलेजों में राज्य कोटा की सीटों में से दी जाएंगी।
काउंसलिंग कार्यक्रम
पहले दौर की काउंसलिंग के लिए पात्र अभ्यर्थी 13 अगस्त रात 11:59 बजे तक ऑनलाइन पंजीयन कर सकेंगे। रिक्त सीटों का प्रकाशन 11 अगस्त को होगा, जबकि रिक्त सीटों पर आपत्ति 12 अगस्त शाम पांच बजे तक दर्ज की जा सकेगी। अंतिम रिक्त सीटों का प्रकाशन 13 अगस्त को होगा।
राज्य मेरिट सूची 14 अगस्त को जारी होगी। इसके बाद च्वाइस फिलिंग और लॉकिंग की प्रक्रिया 15 से 18 अगस्त रात 11:59 बजे तक चलेगी। इसमें केवल मध्य प्रदेश के मूल निवासी अभ्यर्थी भाग ले सकेंगे।
पहले दौर का सीट आवंटन परिणाम 20 अगस्त को जारी किया जाएगा। इसके बाद कॉलेज में रिपोर्टिंग और दस्तावेज जांच की प्रक्रिया 21 से 27 अगस्त शाम छह बजे तक होगी। प्रवेश रद्द या त्याग की प्रक्रिया 21 से 27 अगस्त शाम सात बजे तक चलेगी।
दूसरे दौर के लिए उन्नयन विकल्प 21 से 27 अगस्त रात 11:55 बजे तक उपलब्ध रहेगा। कॉलेज में प्रवेश लेते समय प्रत्येक अभ्यर्थी को उन्नयन विकल्प में हां या न में से एक विकल्प चुनना अनिवार्य होगा। विकल्प नहीं चुनने पर प्रवेश पर्ची जारी नहीं की जाएगी। अभ्यर्थी 27 अगस्त रात 11:55 बजे तक अपने लॉगिन से उन्नयन विकल्प में बदलाव भी कर सकेंगे।

