बुलंद सोच, जबलपुर।
छतरपुर की पूर्व सीनियर लेक्चरर डॉ. ममता पाठक को पति की हत्या के मामले में उम्रकैद काटते हुए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली है। हाईकोर्ट ने स्वास्थ्य और मानवीय आधार पर उनकी 90 दिनों की अतिरिक्त पैरोल बढ़ाने की याचिका खारिज कर दी है।
न्यायालय ने टिप्पणी की कि एक ही राहत के लिए बार-बार याचिका दायर नहीं की जा सकती। कोर्ट ने आरोपी को पहले कलेक्टर के सामने पेश होने का निर्देश दिया। इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा की एकल पीठ ने की।
डॉ. ममता पाठक को छतरपुर जेल से इंदौर जेल स्थानांतरित किया गया है। उनकी वर्तमान पैरोल 12 अगस्त 2026 को समाप्त हो रही है। उन्होंने अपनी खराब सेहत और मानवीय कारणों का हवाला देते हुए हाईकोर्ट से पैरोल की अवधि को 90 दिन और आगे बढ़ाने की मांग की थी।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से वकील ने कोर्ट को बताया कि याचिकाकर्ता को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं मुहैया कराने के लिए छतरपुर से इंदौर जेल भेजा गया है, जहाँ सभी आवश्यक स्वास्थ्य व्यवस्थाएं मौजूद हैं।
हाईकोर्ट ने सुनवाई करते हुए पाया कि आरोपी ने पुराने आदेश का भी पालन नहीं किया था। गत 23 जुलाई को भी इसी मांग को लेकर एक याचिका दायर की गई थी।
उस समय हाईकोर्ट ने डॉ. पाठक को निर्देश दिया था कि वे पैरोल बढ़ाने के लिए सक्षम प्राधिकारी, यानि छतरपुर कलेक्टर, के समक्ष आवेदन करें। कलेक्टर को नियमानुसार निर्णय लेने का आदेश दिया गया था।
इस आदेश के बावजूद, डॉ. पाठक ने छतरपुर कलेक्टर के पास कोई आवेदन प्रस्तुत नहीं किया। उन्होंने सीधे दोबारा हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट टिप्पणी की कि जब पूर्व में दिए गए आदेश का पालन ही नहीं किया गया, तो समान राहत के लिए दूसरी याचिका विचारणीय नहीं है।

